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मंदी के नाम पर बेशर्मी

boston-200पत्रकारों की छंटनी हर जगह हो रही है, लेकिन कुछ जगहों पर मैनेजमेंट ने सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। ऐसी ही एक कंपनी है अमेरिका की बोस्टन ग्लोब। इसके मैनेजमेंट ने कर्मचारी संगठनों के सामने कुछ ख़तरनाक शर्तें रखी हैं। साथ ही कहा है कि अगर संगठनों ने इन शर्तों को पूरा नहीं किया तो या तो अख़बार बंद कर दिया जाएगा या फिर बेच दिया जाएगा।

बोस्टन ग्लोब की सबसे बड़े संगठन से एक करोड़ डॉलर जुटाने को कहा गया है। इसे जुटाने के लिए सुझाव देते हुए मैनेजमेंट ने कहा है कि कर्मचारी अपनी तनख्वाह में कटौती करें, रिटायरमेंट प्लान में कंपनी कंट्रिब्यूशन को खत्म करें और हेल्थ केयर प्लान में भी कंपनी की हिस्सेदारी कम करने की छूट दी जाए। इनके अलावा कर्मचारियों से अब कहीं ज्यादा देर तक काम करने को कहा जा रहा है। साथ ही कंपनी ने कर्मचारी संगठनों से ये छूट भी मांगी है कि वो जब चाहें कर्मचारियों की छंटनी कर सके… इनमें वो 430 कर्मचारी भी शामिल हैं जो स्थाई नौकरी पर हैं और करीब 18-19 साल से कंपनी की सेवा कर रहे हैं।

मैनेजमेंट ने कर्मचारी संगठनों से कहा है कि बोस्टन ग्लोब को पिछले साल 5 करोड़ डॉलर यानी करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और इस साल ये घाटा बढ़ कर 8.5 करोड़ डॉलर यानी 425 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मैनेजमेंट कंपनी की मजबूरी को समझ रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि मैनेजमेंट की शर्तों को मान लेने के बाद उनके पास क्या रह जाएगा?

बोस्टन ग्लोब को न्यूयॉर्क टाइम्स ने 1993 में 1.1 अरब डॉलर में खरीदा था। बोस्टन ग्लोब ने कंपनी को एक दशक से भी ज्यादा वक्त तक भारी मुनाफा दिया। लेकिन बीते कुछ साल से उनकी आमदनी कम हुई है और दो साल से कंपनी लगातार घाटे में है।

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