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इंडिया टीवी ने एनबीए से नाम वापस लिया

indiatv-200बस एक फ़ैसला और न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) में दरार पड़ गई। ये एसोसिएशन बस आठ महीने पुरानी है और इंडिया टीवी ने इससे अपना नाम वापस लेने के लिए नोटिस भेज दिया है। एक ग़लत ख़बर दिखाने पर एनबीए ने इंडिया टीवी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और उससे माफीनामा चलाने को कहा था।

मामला अमेरिका में रह रही पाकिस्तानी मूल की एक लेक्चरर और लेखिका फरहाना अली से जुड़ा है। फरहाना अली ने एनबीए से इंडिया टीवी के ख़िलाफ़ शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर को एक इंटरव्यू दिया था। जिसे इंडिया टीवी ने हिंदी में पैराडब करके चलाया। साथ ही इंटरनेट से उनकी कुछ तस्वीरें डाउनलोड करके उस इंटरव्यू को ऐसे चलाया जैसे वो इंडिया टीवी को दिया गया हो। यही नहीं इंडिया टीवी ने उन्हें जासूस भी बताया, जिससे उनकी छवि काफी खराब हुई। फरहाना अली की इस शिकायत पर एनबीए ने अपना फैसला सुनाया।

ये एनबीए का पहला फैसला था। लेकिन लगता है कि इस फैसले से अब एसोसिएशन में ही फूट पड़ गई है। इंडिया टीवी का तर्क है कि 31 मार्च को लिखे एक खत में उसने एनबीए से कहा था कि फरहाना अली की शिकायत को पहले ही दूर किया जा चुका है। खुद फरहाना अली भी इंडिया टीवी की सफाई से खुश थीं। साथ ही इंडिया टीवी का ये भी कहना है कि एनबीए ने उसकी दलीलों पर गौर नहीं किया। एकतरफा फैसले में उसे दोषी ठहराया गया जिसके बाद वो एनबीए से नाम वापस लेने के लिए मजबूर है।

एनबीए का गठन न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स ने मिल कर किया था। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जे एस वर्मा इस एसोसिएशन के चेयरमैन हैं। प्रोफेसर दीपांकर गुप्ता, नैसकॉम के पूर्व चीफ किरण कार्णिक, पूर्व आईएफएस अधिकारी कोकिला अय्यर और अर्थशास्त्री नीतिन देसाई एनबीए से सदस्य हैं।

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