ईरान में गिरफ़्तार पत्रकार रुक्साना साबेरी को रिहा कर दिया गया है। ईरानी मूल की रुक्साना को अमेरिकी नागरिकता भी हासिल है। ईरान में उन्हें जासूसी के आरोप में अदालत ने आठ साल कैद की सज़ा सुनाई थी। लेकिन अब अपील कोर्ट ने सज़ा घटा कर दो साल कर दी है और उस पर अमल को पांच साल के लिए निलंबित कर दिया है। इस फैसले से अब रुक्साना अमेरिका लौट सकेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस फैसले का स्वागत किया है।
रुक्साना स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर अमेरिका और ब्रिटेन की कई समाचार एजेंसियों के लिए काम करती हैं। उसी सिलसिले में वो लंबे अरसे से ईरान में रह रही थीं। इसी साल जनवरी में उन्हें शराब खरीदने के आरोप में हिरासत में लिया गया। जिसके बाद उन्हें कुछ करीबी दोस्तों को छोड़ कर किसी से भी मिलने की इजाजत नहीं दी गई। फिर उन पर जासूसी का आरोप भी लगा दिया गया। इस कदम के लिए दलील दी गई कि रुक्साना का पत्रकार परमिट ख़त्म हो गया है फिर भी वो यहां से ख़बरें बाहर भेज रही हैं। रुक्साना ने जासूसी के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि वो एक किताब पर काम कर रही हैं और उसी सिलसिले में वहां रुकी हैं।
गिरफ़्तारी के तुरंत बाद से ही ईरान पर रुक्साना को रिहा करने के लिए दबाव बढ़ रहा था। रुक्साना के पिता रेजा साबेरी ईरानी नागरिक हैं, लेकिन वो बाद में अमेरिका में बस गए। रुक्साना का जन्म भी अमेरिका में ही हुआ। इसलिए उसे दोहरी नागरिकता हासिल है। अमेरिका ने भी ईरान के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रुक्साना को तुरंत रिहा करने की मांग की। पिछले महीने जब अदालत ने उन्हें आठ साल कैद की सज़ा सुनाई तो तनाव बढ़ गया था। खुद रुक्साना ने जेल में दो दिन तक भूख हड़ताल की।
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