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	<title>Comments on: एक राहुल, सौ सलाहकार</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: chandan rai</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/05/20/advisors-of-rahul-gandhi/comment-page-1/#comment-62</link>
		<dc:creator>chandan rai</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 May 2009 07:42:32 +0000</pubDate>
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		<description>जब बात कांग्रेस के राजकुमार की हो तो हर मंत्राालय कुबाZन। भई राजकुमार हैं तो पिफर राजा की गददी ही चाहिए। लेकिन अभी राजमाता सोनिया जी ने इस पद पर अपने विश्वासपात्रा को बिठा रखा है। जब तक राहुल राजनीति में मैच्योर नहीं हो जाते चरण पादुका लेकर मनमोहन जी ही विराजेंगे। डर है कि कहीं प्रियंका की महात्वाकांक्षा भी जोर मारने लगे तब क्या होगा? आखिर प्रधनमंत्राी के पद पर दो तो बैठ नहीं सकते। भारत में नवजात लोकतंत्रा का गला घोंटने में गांध्ी परिवार ने कोई कसर बाकि नहीं रख छोडी। कुछ हमारी आदत भी राजनीति में एक परिवार के पिछलग्गू बने रहने की रही। कांग्रेस ने तो राजनीति में परिवारवाद की जो विष बेल बोई है उसी के दावेदार सचिन पायलट,संदीप दीक्षित से लेकर प्रिया दत्त और न जाने कई लोग रहें है। आखिर समाजसेवा भी तो एक ध्ंध है जो पैतक संपित्त की तरह अपनी विरासत साथ में लेकर चलती है। राजनीतिज्ञों की विदेशों में पली बढी नई पौध्, जिसे भारतीय संस्कति का ककहरा भी नहीं पता हो,बिना ग्राउन्ड  लेवल पर काम किए सीध्े हमारे सिर पर बिठा दी जाती है और हम विक्रम की तरह वैताल को अपने कंधें पर ढोने को मजबूर हैं। कौन कहता है कि भारत में लोकतंत्रा है? लोकतंत्रा के सभी दुर्गुZण तो हैं जैसे परिवारवाद,साम्प्रदायिकता,जातिवाद,आर्थिक असमानता,अशिक्षा ....लेकिन सच्चा लोकतंत्रा नहीं। राहुल को कौन सा मलाईदार पद मिलता है,इसपर चर्चा ही व्यर्थ है। हम तो शर्मिंदगी से यह देखने को मजबूर हैं कि कब कोई कांग्रेस का कार्यकर्ता जिसकी डोर सोनिया जी के हाथों में हो मंच से राहुल को पीएम पद के लिए आमंत्रिात करता है। और कांग्रेस में कब अपने को गांध्ी परिवार का विश्वासपात्रा दिखाने के लिए सियारों की तरह हुआ..हुआ शुरू होती है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब बात कांग्रेस के राजकुमार की हो तो हर मंत्राालय कुबाZन। भई राजकुमार हैं तो पिफर राजा की गददी ही चाहिए। लेकिन अभी राजमाता सोनिया जी ने इस पद पर अपने विश्वासपात्रा को बिठा रखा है। जब तक राहुल राजनीति में मैच्योर नहीं हो जाते चरण पादुका लेकर मनमोहन जी ही विराजेंगे। डर है कि कहीं प्रियंका की महात्वाकांक्षा भी जोर मारने लगे तब क्या होगा? आखिर प्रधनमंत्राी के पद पर दो तो बैठ नहीं सकते। भारत में नवजात लोकतंत्रा का गला घोंटने में गांध्ी परिवार ने कोई कसर बाकि नहीं रख छोडी। कुछ हमारी आदत भी राजनीति में एक परिवार के पिछलग्गू बने रहने की रही। कांग्रेस ने तो राजनीति में परिवारवाद की जो विष बेल बोई है उसी के दावेदार सचिन पायलट,संदीप दीक्षित से लेकर प्रिया दत्त और न जाने कई लोग रहें है। आखिर समाजसेवा भी तो एक ध्ंध है जो पैतक संपित्त की तरह अपनी विरासत साथ में लेकर चलती है। राजनीतिज्ञों की विदेशों में पली बढी नई पौध्, जिसे भारतीय संस्कति का ककहरा भी नहीं पता हो,बिना ग्राउन्ड  लेवल पर काम किए सीध्े हमारे सिर पर बिठा दी जाती है और हम विक्रम की तरह वैताल को अपने कंधें पर ढोने को मजबूर हैं। कौन कहता है कि भारत में लोकतंत्रा है? लोकतंत्रा के सभी दुर्गुZण तो हैं जैसे परिवारवाद,साम्प्रदायिकता,जातिवाद,आर्थिक असमानता,अशिक्षा &#8230;.लेकिन सच्चा लोकतंत्रा नहीं। राहुल को कौन सा मलाईदार पद मिलता है,इसपर चर्चा ही व्यर्थ है। हम तो शर्मिंदगी से यह देखने को मजबूर हैं कि कब कोई कांग्रेस का कार्यकर्ता जिसकी डोर सोनिया जी के हाथों में हो मंच से राहुल को पीएम पद के लिए आमंत्रिात करता है। और कांग्रेस में कब अपने को गांध्ी परिवार का विश्वासपात्रा दिखाने के लिए सियारों की तरह हुआ..हुआ शुरू होती है।</p>
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		<title>By: nirmla.kapila</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/05/20/advisors-of-rahul-gandhi/comment-page-1/#comment-61</link>
		<dc:creator>nirmla.kapila</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 May 2009 13:09:35 +0000</pubDate>
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		<description>janab unhen dal roti khane dijiye  ab sara din vo aur kya karen</description>
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