Subscribe by Email

"हत्यारों का संहार"

((प्रभाकरण की मौत के साथ एक अध्याय का अंत हो गया। किसी ने खूब कहा है कि मुश्किल से मुश्किल घड़ी में भी हर शख़्स के सामने दो रास्ते होते हैं। उनमें से एक सही होता है और दूसरा ग़लत। लेकिन सही और ग़लत का फ़ैसला हर शख़्स अपने हिसाब से करता है। वेलुपिल्लई प्रभाकरण ने भी अपने हिसाब से रास्ता चुना और सही और ग़लत का फ़ैसला किया। जो भी उसके फ़ैसले के ख़िलाफ़ खड़ा हुआ उसे मार दिया गया। हिंसा की राह पर चलते हुए प्रभाकरण आज खुद मारा गया है। श्रीलंकाई मीडिया, तमिल मीडिया और पश्चिमी देशों का मीडिया उसकी मौत को अपने-अपने चश्मे से देख रहा है। उनमें से कुछ पर आप भी एक नज़र डालिये।))
———————————————

डेली न्यूज़, श्रीलंका- खुद को खुदा समझने वाला आतंकी प्रभाकरण मारा गया

(रिपोर्ट)
“जाबांज सुरक्षाबलों ने एलटीटीई के कब्जे से भूमि के आखिरी इंच को भी आज़ाद करा लिया है। इसके साथ ही एलटीटीई के सभी शीर्ष नेताओं का ख़ात्मा हो गया है। …. प्रभाकरण के बड़े बेटे चार्ल्स एंथनी, खुफिया शाखा के नेता पोट्टू अम्मान, सैन्य सिपहसालार जेयम और लक्ष्मण, राजनीतिक साखा के मुखिया नाडेसन, ब्लैक टाइगर लीडर रतनाम मास्टर और एलटीटीई पुलिस चीफ इलांगो के शवों की पहचान हो गई है”।

(संपादकीय)
“श्रीलंका के लिए यकीनन वो पल निर्णायक था, जब आधी शताब्दी पहले हमने ब्रितानिया हुकूमत से आज़ादी हासिल की। इस बार ये एक अलग किस्म की आज़ादी है। तीन दशक तक चली आतंकी अभियान से आज़ादी। जिसने न केवल हमे बांट दिया बल्कि त्याग से हासिल की गई आज़ादी को भी बेमानी बना दिया था।

आज जब राष्ट्रपति राजपक्षे ने अपने भावुक और ऐतिसाहिक भाषण में देश के एकीकरण का एलान किया तो हर सच्चा देशभक्त श्रीलंकाई उस मौके पर भावविभोर हो गया होगा। लेकिन ये वक़्त आगे बढ़ने और तीन दशक तक चली हिंसा से बने गहरे जख़्मों को भरने का भी है”।
——————————-

आइसलैंड, श्रीलंका- हत्यारों का संहार
(संपादकीय)
ये दुखद है कि कुछ देश और उनके सहयोगी आतंक पर श्रीलंका की ऐतिहासिक जीत को सही नजरिये से नहीं देख रहे। वो अब भी एलटीटीई को बढ़ावा देने में लगे हैं। पश्चिमी देशों के मीडिया ने तो प्रभाकरण की मौत पर यकीन करने से भी इनकार कर दिया था। वो उसे अजेय बताते रहे। वो हमसे लगातार सबूत मांगते रहे और आतंकी वेबसाइट पर अंतरराष्ट्रीय रैकेटियर “केपी” के दावे को सही ठहराते रहे कि प्रभाकरण जिंदा है। ….
प्रभाकरण का शव बरामद होने पर जैसे ही उसे टीवी पर दिखाया जाने लगा तो वो समाचार संगठन (पश्चिमी देशों का मीडिया) बिना किसी इंतजार के आम नागरिकों की हत्या से जुड़े एलटीटीई के आरोप को प्रचारित करने लगे। वो भी एलटीटीई से सबूत की मांग किए बगैर।
——————————-

डेली मिरर, श्रीलंका
(संपादकीय)
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद किसी युद्ध में ऐसी ऐतिहासिक जीत और हार नहीं हुई होगी। महारथियों, खलनायकों और नेताओं के लिहाज से इस युद्ध के बराबर यूनान की कई ऐतिहासिक लड़ाइयां भी नहीं हैं। अब इस (युद्ध) पर से पर्दा गिर गया है और हर देशभक्त के जेहन में मातृभूमि श्रीलंका के लिए नई ज़िंदगी की उम्मीद जन्म ले रही है।
——————————-

द नेशन, श्रीलंका- मारा गया “प्रभा”
किसी समय अजेय समझा जाने वाला, दुनिया का नंबर एक आतंकवादी और एलटीटीई सुप्रीमो वेलुपिल्लई प्रभाकरण (54) के मारे जाने की पुष्टि हो गई है। श्रीलंका और भारत का ये वांटेड अपराधी अब जिंदा नहीं है।
——————————-

divaina (सिंघली भाषा का अख़बार है), श्रीलंका
पूरी दुनिया को हिला देने वाले क्रूर फासीवादी संगठन का नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरण और उसके साथी मारे जा चुके हैं। ये सही है कि मौत पर जश्न नहीं मनाना चाहिये। लेकिन इस घृणित व्यक्ति और उसके फासीवादी गिरोह की मौत उस देश के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ खुशख़बरी ही हो सकती है जिसने आतंक झेला है।
———————————

जहां तक एलटीटीई की समर्थक वेबसाइट तमिलनेट का सवाल है। उस पर नया कुछ नहीं है। कल रात उस वेबसाइट पर प्रभाकरण की मौत की ख़बर को ग़लत बताया गया था। अंतर्राष्ट्रीय संपर्क के मुखिया एस पद्मनाथन के हवाले से कहा गया था कि प्रभाकरण जिंदा है। उसमें ये भी कहा गया था कि श्रीलंकाई सेना ने सोची समझी रणनीति के तहत एलटीटीई के नेताओं और समर्थकों का नरसंहार किया जा रहा है। ये मानवता के प्रति एक अपराध है और उसकी जांच होनी चाहिये। उसके बाद से इस वेबसाइट पर आज सुबह चार बजे तक कुछ भी नया नहीं था।
———————————-

बीबीसी- सदमे में तमिल प्रवासी
(एक तमिल का बयान)
हम काफी गुस्से में हैं और हर तमिल इस “जीत” पर आंसू बहा रहा है। श्रीलंकाई सरकार ने सिर्फ अपनी सीमा का विस्तार किया है। एलटीटीई के समर्थक सभी जगह हैं। पूरी दुनिया में हैं। जब तक तमिल लोगों को उनका हक नहीं मिलेगा ये समस्या बनी रहेगी। उनकी जमीन को मान्यता देनी होगी।…. सरकार को हमारे प्रति सम्मान जाहिर करना चाहिये और हमारी समस्या को तुरंत हल करना चाहिये। हम मांग करते हैं कि बेगुनाह तमिलों की तुरंत रक्षा की जाए।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>