इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी ने कहा है कि पत्रिकाएं लोगों को हमेशा आकर्षित करती रहेंगी। उनके मुताबिक पत्रिकाओं और डिजिटल मीडिया के बीच कोई मुकाबला नहीं है और ना ही अख़बार और न्यूज़ चैनलों के बीच। असली प्रतियोगिता बिज़नेस मॉडल्स के बीच है। सबकुछ इस पर निर्भर करेगा कि लोग नए प्लेटफॉर्म के जरिये अपने ब्रांड का फायदा कैसे उठाते हैं। किनसे नए कारोबारी गठजोड़ करते हैं और आय के नए मॉडल किस तरह विकसित करते हैं।
एक्सचेंज4मीडिया को दिए इंटरव्यू में अरुण पुरी ने कहा कि जब भी कोई नई तकनीक आती है तो थोड़ी दिक्कत होती है। मगर वो अंत नहीं है। प्रकाशकों को अपने ब्रांड की ताकत के साथ अपनी क्षमता और रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) पर भरोसा रहना चाहिए। आज हालात मुश्किल हैं, मगर इस अंधेरी सुरंग के दूसरे छोर पर रोशनी की किरण नज़र आ रही है।
अरुण पुरी पहले भारतीय हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय संस्था “फेडरेशन ऑफ पीरियॉडिकल प्रेस” (एफआईपीपी) का चेयरमैन चुना गया है। उन्होंने ग्लोबल मंदी के दौर में ये पद संभाला है और सबकी उम्मीदों पर खरा उतरना आसान नहीं होगा।
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