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महिला पत्रकारों पर उत्तर कोरिया ख़ामोश

अमेरिका की दो महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ सुनवाई पर उत्तर कोरिया ख़ामोश है। उत्तर कोरिया ने पहले एलान किया था कि चार जून की दोपहर उन दोनों पत्रकारों के ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई शुरू की जाएगी। लेकिन उस सुनवाई में क्या हुआ? सुनवाई हुई भी या नहीं? इस पर उत्तर कोरिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही। उत्तर कोरिया ने दोनों महिला पत्रकारों पर देश में अवैध तरीके से दाखिल होने और साज़िश में शामिल होने का आरोप लगाया है। अगर उन दोनों का जुर्म साबित हुआ तो उन्हें 10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई जा सकती है।

 

लौरा लिंग और यूना ली अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति अल गोर के चैनल करंट टीवी में काम करती हैं। उन्हें 17 मार्च को उत्तर कोरिया ने गिरफ़्तार किया था। उस वक़्त वो दोनों रिपोर्टिंग के लिए चीन जा रही थीं। तब से दोनों उत्तर कोरिया की जेल में बंद हैं। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों ने उन्हें रिहा करने के लिए कई बार अपील की, लेकिन उत्तर कोरिया कुछ भी सुनने को तैयार नहीं।

 

जानकारों के मुताबिक उत्तर कोरिया उन दोनों महिला पत्रकारों को रिहा करने की शर्त पर अमेरिका से कुछ समझौता करना चाहता है। दबाव बनाने के लिए पहले तो उन दोनों महिला पत्रकारों को सज़ा सुनाई जाएगी और फिर रिहाई के नाम पर अमेरिका से सौदेबाजी होगी।

 

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