उत्तर कोरिया की अदालत ने अमेरिका की दो महिला पत्रकारों को 12 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है। उन दोनों पर अवैध तरीके से उत्तर कोरिया की सीमा में दाखिल होने और देश के ख़िलाफ़ साज़िश का आरोप लगाया गया था।
लौरा लिंग और यूना ली अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति अल गोर के चैनल करंट टीवी में काम करती हैं। उन्हें 17 मार्च को उत्तर कोरिया ने गिरफ़्तार किया था। उस वक़्त वो दोनों रिपोर्टिंग के लिए चीन जा रही थीं। तब से दोनों उत्तर कोरिया की जेल में बंद हैं। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों ने उन्हें रिहा करने के लिए कई बार अपील की, लेकिन उत्तर कोरिया तैयार नहीं हुआ। उसके बाद चार जून को उन दोनों के ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई शुरू की गई। इस सुनवाई में किसी भी पत्रकार को जाने की इजाजत नहीं दी गई और ना ही इसका कोई ब्योरा जारी किया गया। अब अदालत ने दोनों महिला पत्रकारों को सश्रम कारावास की सज़ा सुना दी है। लौरा लिंग और यूना ली को ये बारह साल ऐसे जेल शिविर में बिताने होंगे जहां से काफी शिकायतें आती हैं।
उधर, अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने उत्तर कोरियाई अदालत के इस फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर दी है। अमेरिका का कहना है कि वो अमेरिकी नागरिकों के ख़िलाफ़ इस फ़ैसले से काफी चिंतित हैं और उन्हें छुड़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
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