<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
		>
<channel>
	<title>Comments on: जिसकी जैसी मार्केटिंग, उसको वैसा वोट</title>
	<atom:link href="http://jantantra.com/2009/06/18/meadia-management-and-vote/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://jantantra.com/2009/06/18/meadia-management-and-vote/</link>
	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
	<lastBuildDate>Wed, 08 Feb 2012 02:53:02 +0000</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.2.1</generator>
	<item>
		<title>By: ABHAY MISHRA</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/06/18/meadia-management-and-vote/comment-page-1/#comment-1452</link>
		<dc:creator>ABHAY MISHRA</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2009 13:44:25 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=674#comment-1452</guid>
		<description>शानदार विश्लेषण, मीडिया के सहारे कुछ चमकीले पोस्टरों की रोशनी से पूरे देश को अंधेरे रहित बनाने का दावा, अरविंद जी की शैली लाजबाव कर देने वाली है। हालांकि मैं इस बात से सहमत नहीं कि जिस का जैसा प्रचार उसे वैसा ही वोट, मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश और दिल्ली का विधानसभा चुनाव और ताजे लोकसभा चुनाव का अनुभव यहीं कहता है कि पैसे वालों ने पूरे के पूरा अखबार ही खरीद लिया, हर रोज उन्ही का चेहरा दिखता था लेकिन बावजूद इसके नेता और मीडिया का यह गठजोड़ जीत में तब्दील नहीं हो पाया, अगर ऐसा होता तो मध्यप्रदेश में आज भी दिग्गी सरकार होती और यूपी में मायावती का कोई नाम लेवा नही बचता।
          अरविंद जी ने नेता,मीडिया और कारपोरेट के गठजोड़ द्वारा जारी लोकतंत्र के अपहरण उद्दोग का बेहतरीन खाका खींचा है,नीतीश जैसे अच्छे नेता यदि आईना देख सके तो बेहतर होगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शानदार विश्लेषण, मीडिया के सहारे कुछ चमकीले पोस्टरों की रोशनी से पूरे देश को अंधेरे रहित बनाने का दावा, अरविंद जी की शैली लाजबाव कर देने वाली है। हालांकि मैं इस बात से सहमत नहीं कि जिस का जैसा प्रचार उसे वैसा ही वोट, मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश और दिल्ली का विधानसभा चुनाव और ताजे लोकसभा चुनाव का अनुभव यहीं कहता है कि पैसे वालों ने पूरे के पूरा अखबार ही खरीद लिया, हर रोज उन्ही का चेहरा दिखता था लेकिन बावजूद इसके नेता और मीडिया का यह गठजोड़ जीत में तब्दील नहीं हो पाया, अगर ऐसा होता तो मध्यप्रदेश में आज भी दिग्गी सरकार होती और यूपी में मायावती का कोई नाम लेवा नही बचता।<br />
          अरविंद जी ने नेता,मीडिया और कारपोरेट के गठजोड़ द्वारा जारी लोकतंत्र के अपहरण उद्दोग का बेहतरीन खाका खींचा है,नीतीश जैसे अच्छे नेता यदि आईना देख सके तो बेहतर होगा.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>

