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जागरण में ये ख़बर किसने “प्लांट” की?

दैनिक जागरण में 18 जून को एक ख़बर छपी। उसका शीर्षक दिया गया… “उपभोक्ता कर रहे हैं एमटीएनएल फोन व इंटरनेट से तौबा”। अब आप इस हेडिंग को पढ़ कर क्या सोचेंगे। यही न कि उसमें कुछ ऐसे उपभोक्ताओं से बात होगी जो एमटीएनएल का कनेक्शन लेने के बाद से परेशान हो गए हैं। ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या दी गई होगी जिन्होंने हाल के दिनों में एमटीएनएल का कनेक्शन कटवा लिया हो। उपभोक्ताओं की शिकायतों और परेशानियों पर एमटीएनएल के किसी अधिकारी की सफाई होगी। उससे बात करने की कोशिश की गई होगी।

अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो ग़लत है। उस ख़बर में ऐसा कुछ नहीं था। तीन कॉलम की उस ख़बर में सिवाए लंतरानी के कुछ नहीं मिला। अब आप उस ख़बर की पहली पंक्ति पर ध्यान दें। – “एमटीएनएल का फोन व इंटरनेट लेने के इच्छुक लोग यह ख्याल अपने जेहन से निकाल दें।” क्यों भाई.. क्या आपको कोई निजी कंपनियों ने सामूहिक तौर पर प्रवक्ता नियुक्त कर लिया है, जो आप इस तरह का फरमान दे रहे हैं? अब रिपोर्ट की अगली पंक्तियों पर गौर फरमाइये… “क्योंकि इसकी सेवा कब बाधित हो जाए इसका पता विभाग के अधिकारियों को भी नहीं होता। यही उपभोक्ताओं को परेशान करने के बाद उनकी शिकायत सुनने वाला भी कोई नहीं होता है। उल्लेखनीय है कि एमटीएनएल कनेक्शन 24 घंटे में 15 घंटे तक बाधित ही रहते हैं।” एक के बाद एक संगीन आरोप। लगता है कि एमटीएनएल से वो रिपोर्टर या फिर अख़बार का कोई अधिकारी पुराना हिसाब चुकाना चाहता था। इसलिए किसी उपभोक्ता, सबूत और आंकड़े का जिक्र किये बगैर एमटीएनएल की सिर्फ़ और सिर्फ़ निंदा की गई है। 19 पंक्तियों की उस ख़बर में सिर्फ एक पंक्ति में ये कहा गया है कि “विभाग के जीएम अरोड़ा उपभोक्ताओं से बात करने के बजाए ब्रांडबैंड व इंटरनेट सेवा के प्रमुख आरए राय के पास भेज देते हैं”। क्या रिपोर्टर ये कहना चाह रहा है कि एमटीएनएल का जीएम उपभोक्ताओं को अपने केबिन में बिठा कर उनकी शिकायत दूर करने के लिए खुद ही भागदौड़ क्यों नहीं करता? कहीं ये ख़ास उपभोक्ता वो रिपोर्टर खुद तो नहीं?

अब इस तरह की बेनामी.. बिना सबूत वाली ख़बर सिर्फ़ दो वजह से छप सकती है। पहली, रिपोर्टर या फिर अख़बार के किसी प्रभावशाली शख़्स का एमटीएनएल से कोई झगड़ा हो गया हो और वो हिसाब चुकता करने के लिए ऐसा लिख रहा हो। दूसरा, उन्हें निजी कंपनियों की तरफ से कोई ठेका दिया गया हो कि जितना हो सके एमटीएनएल का नकारात्मक प्रचार करो। सार्वजनिक क्षेत्र की ये बड़ी कंपनी कमजोर होगी तभी महानगरों में निजी कंपनियों का बोलबाला बढ़ेगा। अगर ऐसा नहीं है तो फिर इन तमाम आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश क्यों नहीं किया गया? ऐसा शीर्षक लगाने और फरमान सुनाने के साथ ये क्यों नहीं बताया गया कि बीते एक हफ़्ते, एक महीने… या फिर एक साल में कितने लोगों ने एमटीएनएल का कनेक्शन कटवाया है? कितने लोगों ने जागरण के रिपोर्टर से कहा है कि उनकी शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं हुई?

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2 Responses to जागरण में ये ख़बर किसने “प्लांट” की?

  1. लोकेश Reply

    June 23, 2009 at 10:24 pm

    आपकी बातें बिल्कुल सही है।

    वैसे जागरण में, ये भी एक तरीका है हो सकता है रिपोर्टिंग का :-)

  2. रंगनाथ सिंह Reply

    June 26, 2009 at 12:07 am

    bhai saab ye khabar plant ki gyi hogi isame mujhe koi sandeh nhi h. lekin ye bhi sach hai ki private companiya sirf akhbaro ko paisa nhi deti wo MTNL ke adhikariyo ko bhi riswat de sakti hai. iska asar MTNL ke network par bhi saf dikhayi deta h.

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