ईरान में मीडिया पर नकेल कसी जा रही है। ख़बरों के मुताबिक अब तक 33 से ज़्यादा पत्रकारों को गिरफ़्तार कर जेल में बंद कर दिया गया है। इस वक़्त दुनिया के किसी भी देश में इतनी बड़ी संख्या में पत्रकार जेल में नहीं हैं। इनमें से ज़्यादातर को 14 जून के बाद गिरफ़्तार किया गया है। चुनाव नतीजों के सामने आने के बाद उसी दिन से ईरान में मुसावी समर्थकों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
अहमदीनेजाद सरकार विरोध की आग पर काबू पाने के लिए मुसावी समर्थकों को गिरफ़्तार कर रही है। उसी के तहत उसने मुसावी की अख़बार के सभी कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया। यही नहीं कई और मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को गिरफ़्तार किया गया है और कई को ईरान से बाहर जाने का आदेश दिया गया है। मीडिया पर इस सख़्ती की पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका और कई यूरोपीय देश ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं, बावजूद इसके बोलने की आज़ादी को क्रूर तरीके से ख़त्म करने की किसी भी कोशिश का समर्थन नहीं किया जा सकता।
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