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“आज तक” की गर्दन पर सवार “इंडिया टीवी”

“आज तक” की गर्दन पर सवार “इंडिया टीवी”

चुनाव बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि इंडिया टीवी बहुत जल्द आज तक को पीट देगा। लंबे समय से बिना किसी उठापटक के नंबर वन की कुर्सी पर…

वोट से पहले मीडिया में खेला गया नोट का खेल

वोट से पहले मीडिया में खेला गया नोट का खेल

दिल्ली सरकार ने चुनाव पूर्व मीडिया के लिए खजाना खोल दिया था। दस साल में विज्ञापन राशि तीस गुना से ज्यादा बढ़ गई है। चार साल में गैर-समाचार पत्र प्रचार…

“एसपी” के बहाने मीडिया – कल, आज और कल

“एसपी” के बहाने मीडिया – कल, आज और कल

27 जून करीब है। ये वही दिन है जब 12 साल पहले सुरेंद्र प्रताप सिंह यानी सबके प्यारे एसपी ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके जाने के बाद…

हरीश खरे ने कार्यभार संभाला

हरीश खरे ने कार्यभार संभाला

वरिष्ठ पत्रकार हरीश खरे ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार का कार्यभार संभाल लिया। इससे पहले हरीश खरे द हिंदू के चीफ ऑफ ब्यूरो और सीनियर एसोसिएट…

आरटीआई के दायरे में हों मीडिया संस्थान

आरटीआई के दायरे में हों मीडिया संस्थान

मीडिया को सूचना अधिकार के दायरे में लाया जाए या नहीं – ये बहस तेज हो रही है। कुछ समय पहले अरुंधति रॉय से बात हुई तो उन्होंने मीडिया को…

जागरण में ये ख़बर किसने “प्लांट” की?

जागरण में ये ख़बर किसने “प्लांट” की?

दैनिक जागरण में 18 जून को एक ख़बर छपी। उसका शीर्षक दिया गया… “उपभोक्ता कर रहे हैं एमटीएनएल फोन व इंटरनेट से तौबा”। अब आप इस हेडिंग को पढ़ कर…

दिल्ली के पत्रकार को जान से मारने की धमकी

दिल्ली के पत्रकार को जान से मारने की धमकी

दिल्ली के पत्रकार अरबिंद गोस्वामी को जान से मारने की धमकी दी गई है। अरबिंद मुंबई से छपने वाली पत्रिका “युवा” में काम करते थे और उन्हें धमकी उस कंपनी…

क्या कंधों पर कुछ बोझ महसूस हो रहा है?

क्या कंधों पर कुछ बोझ महसूस हो रहा है?

शैलेंद्र सिंह की असमय मौत से उठे सवाल ने हर किसी को बेचैन कर दिया है। यही वजह है कि जनतंत्र की अपील के बाद कई लोग अपने दिल की…

मीडिया के साथियों से एक अपील

मीडिया के साथियों से एक अपील

जहां सौ-दो सौ लोग काम करते हैं, वहां थोड़ा टकराव तो ज़रूर होता है। ख़बरों पर तीखी बहस होती है। किसी की लापरवाही से ख़बर समय पर नहीं चले तो…

शैलेंद्र जाते-जाते हमें सोचने को मजबूर कर गए हैं

शैलेंद्र जाते-जाते हमें सोचने को मजबूर कर गए हैं

((पत्रकार शैलेंद्र के निधन से आहत एक शख़्स ने शुक्रवार शाम जनतंत्र के ई-मेल पर एक ख़त भेजा। ख़त भेजने वाले को मैं व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं। मैंने फोन…

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