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“हिंदुस्तान” का अंधविश्वास

“हिंदुस्तान” अंधविश्वास की गिरफ़्त में है और उसमें आए दिन कई ऐसी ख़बरें छपती हैं जिनसे अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है। श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान सबने देखा कि किस तरह वहां हेडलाइन दी गई श्रीलंका में एक और लंका कांड। बिना सोचे-समझे प्रभाकरण की तुलना रावण से की गई और लगा कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति राम से कम नहीं।

अब आप वहां छपी एक और ख़बर पर नज़र डालिए। इसे 12वें पन्ने पर बड़ी प्राथमिकता से छापा गया है। पढ़ते वक़्त ये भी ध्यान रखिएगा कि ये कोई गोपनीय ख़बर नहीं है। फिर भी इसमें आपको किसी सूत्र का नाम नहीं मिलेगा। एक जगह पर लिखा गया है कि रक्षा वैज्ञानिकों ने पाया है और बताया है लेकिन वो रक्षा वैज्ञानिक कौन हैं इसका कोई जिक्र नहीं। योग की बात तो ठीक है। लेकिन पाठकों को ये भी तो पता चलना चाहिए कि किस महान शख़्स की सिफारिश पर सेना ने धरम-करम का सहारा लिया है और हवन कीर्तन कराना शुरू कर दिया है।

हेडर – सैनिकों के लिए वरदान बना “सूर्य नमस्कार”!
सुशील शर्मा, नई दिल्ली

कभी योग साधना के नाम पर नाक भौं सिकोड़ने वाली सेना में अब योग साधना (सहज योग) काफी लोकप्रिय है। विशेष रूप से ऊंचे पहाड़ों पर तैनात सैनिकों में शारीरिक ऊर्जा का अपव्यय किए बगैर शरीर को दुरुस्त रखने के लिए सैनिक बड़े पैमाने पर योगाध्यास कर रहे हैं। ….
((ख़बर में आगे है))
…. एक रक्षा वैज्ञानिक ने बताया कि शुरू में सेना का कहना था कि हमें जवानों को साधु नहीं लड़ाकू बनाना है, लिहाजा योग का सेना में कोई स्थान नहीं। बाद में सैनिकों में आत्महत्या तथा अफसरों की हत्या की घटनाओं ने योग के प्रति सेना का रवैया बदला। ….
((ख़बर में आगे है))
…. सैनिकों की मानसिक हालत पर हवन और मंत्रों के प्रभाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। इसके नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। विशेष रूप से गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्री “सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम् , प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम्” मंत्र का जाव किया गया। देखा गया कि इससे तनावशैथिल्य, रक्तचाप व हृदय गति पर सकारात्मक असर पड़ा। यहां तक कि जहां हवन किया गया, उस स्थान पर यंत्रों ने एक चुंबकीय प्रभाव भी दर्ज किया।

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2 Responses to “हिंदुस्तान” का अंधविश्वास

  1. शशि सिंह Reply

    July 9, 2009 at 5:01 pm

    खबर की संरचना गलत हो सकती है पर मुझे नहीं लगता कि सूर्य नमस्कार या फिर वैदिक मंत्रों को अंध विश्वास ठहराया जा सकता है। मुझे यह भी नहीं लगता कि सूर्य नमस्कार या वैदिक मंत्रों का अभ्यास करने कि लिए साधु होना जरूरी है और न ही इस पर किसी साधू या संत का कॉपीराइट ही है। इसके अभ्यास से लाभ की बातें देखी और सुनी है अलबत्ता नुकसान की किसी ख़बर की जानकारी मुझे नहीं है। मैं खुद भी सूर्य नमस्कार का अभ्यास करता हूं… इससे शारीरिक चुस्ती-फूर्ती के साथ आत्मिक शांति का अनुभव करता हूं।

  2. अरविंद शेष Reply

    July 9, 2009 at 6:23 pm

    सुशील शर्मा की सूचना और विश्लेषण क्षमता कहां से संचालित हो रही है, इस बात का पता लगाने की जरूरत है। इससे पहले भी इस तरह की मूर्खतापूर्ण रिपोर्टें इनके नाम रही हैं। पता नहीं ये समाज को शिक्षित कर रहे हैं, या खुद इन्हें शिक्षा की जरूरत है। इस रिपोर्ट की बात करें तो अगर इनकी ये बातें सचमुच रक्षा विभाग के भीतर आधिकारिक तौर पर निकली हैं तो कायदे से इसकी धज्जियां उड़ाते हुए एक विश्लेषण लिखना चाहिए था। लेकिन यह समझना मुश्किल है कि सुशील शर्मा पर रिपोर्ट हावी है या रिपोर्ट पर ये हावी हैं। या यह कहीं और का आदेश है…

    इस बात पर तो घोर आपत्ति दर्ज किया जाना चाहिए कि-
    “सैनिकों की मानसिक हालत पर हवन और मंत्रों के प्रभाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। इसके नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। विशेष रूप से गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्री “सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम् , प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम्” मंत्र का जाव किया गया। देखा गया कि इससे तनावशैथिल्य, रक्तचाप व हृदय गति पर सकारात्मक असर पड़ा। यहां तक कि जहां हवन किया गया, उस स्थान पर यंत्रों ने एक चुंबकीय प्रभाव भी दर्ज किया।”

    क्या इतना भी माथा नहीं लगाया जा सकता कि अगर ऐसा हो रहा है तो क्या इसके आगे हवन और मंत्रों के इस उत्साहजनक नतीजे इस रूप में सामने आएंगे कि सभी सैनिकों को बर्खास्त कर सिर्फ हवन करने वाले और मंत्रों का जाप करने वालों को बहाल किया जाएगा?

    अब प्रक्षेपास्त्रों और तोपों की जगह हवन कर मंत्रों और हवन के चुंबकीय प्रभावों से इस बात का इंतजार किया जाए, कि भारत अब विश्वविजेता बनने वाला ही है!!!

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