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	<title>Comments on: “हिंदुस्तान” का अंधविश्वास</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: अरविंद शेष</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/07/09/hindustan-and-superstitions/comment-page-1/#comment-148</link>
		<dc:creator>अरविंद शेष</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2009 12:53:30 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=920#comment-148</guid>
		<description>सुशील शर्मा की सूचना और विश्लेषण क्षमता कहां से संचालित हो रही है, इस बात का पता लगाने की जरूरत है। इससे पहले भी इस तरह की मूर्खतापूर्ण रिपोर्टें इनके नाम रही हैं। पता नहीं ये समाज को शिक्षित कर रहे हैं, या खुद इन्हें शिक्षा की जरूरत है। इस रिपोर्ट की बात करें तो अगर इनकी ये बातें सचमुच रक्षा विभाग के भीतर आधिकारिक तौर पर निकली हैं तो कायदे से इसकी धज्जियां उड़ाते हुए एक विश्लेषण लिखना चाहिए था। लेकिन यह समझना मुश्किल है कि सुशील शर्मा पर रिपोर्ट हावी है या रिपोर्ट पर ये हावी हैं। या यह कहीं और का आदेश है...

इस बात पर तो घोर आपत्ति दर्ज किया जाना चाहिए कि-
&quot;सैनिकों की मानसिक हालत पर हवन और मंत्रों के प्रभाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। इसके नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। विशेष रूप से गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्री “सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम् , प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम्” मंत्र का जाव किया गया। देखा गया कि इससे तनावशैथिल्य, रक्तचाप व हृदय गति पर सकारात्मक असर पड़ा। यहां तक कि जहां हवन किया गया, उस स्थान पर यंत्रों ने एक चुंबकीय प्रभाव भी दर्ज किया।&quot;

क्या इतना भी माथा नहीं लगाया जा सकता कि अगर ऐसा हो रहा है तो क्या इसके आगे हवन और मंत्रों के इस उत्साहजनक नतीजे इस रूप में सामने आएंगे कि सभी सैनिकों को बर्खास्त कर सिर्फ हवन करने वाले और मंत्रों का जाप करने वालों को बहाल किया जाएगा?

अब प्रक्षेपास्त्रों और तोपों की जगह हवन कर मंत्रों और हवन के चुंबकीय प्रभावों से इस बात का इंतजार किया जाए, कि भारत अब विश्वविजेता बनने वाला ही है!!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सुशील शर्मा की सूचना और विश्लेषण क्षमता कहां से संचालित हो रही है, इस बात का पता लगाने की जरूरत है। इससे पहले भी इस तरह की मूर्खतापूर्ण रिपोर्टें इनके नाम रही हैं। पता नहीं ये समाज को शिक्षित कर रहे हैं, या खुद इन्हें शिक्षा की जरूरत है। इस रिपोर्ट की बात करें तो अगर इनकी ये बातें सचमुच रक्षा विभाग के भीतर आधिकारिक तौर पर निकली हैं तो कायदे से इसकी धज्जियां उड़ाते हुए एक विश्लेषण लिखना चाहिए था। लेकिन यह समझना मुश्किल है कि सुशील शर्मा पर रिपोर्ट हावी है या रिपोर्ट पर ये हावी हैं। या यह कहीं और का आदेश है&#8230;</p>
<p>इस बात पर तो घोर आपत्ति दर्ज किया जाना चाहिए कि-<br />
&#8220;सैनिकों की मानसिक हालत पर हवन और मंत्रों के प्रभाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। इसके नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। विशेष रूप से गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्री “सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम् , प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम्” मंत्र का जाव किया गया। देखा गया कि इससे तनावशैथिल्य, रक्तचाप व हृदय गति पर सकारात्मक असर पड़ा। यहां तक कि जहां हवन किया गया, उस स्थान पर यंत्रों ने एक चुंबकीय प्रभाव भी दर्ज किया।&#8221;</p>
<p>क्या इतना भी माथा नहीं लगाया जा सकता कि अगर ऐसा हो रहा है तो क्या इसके आगे हवन और मंत्रों के इस उत्साहजनक नतीजे इस रूप में सामने आएंगे कि सभी सैनिकों को बर्खास्त कर सिर्फ हवन करने वाले और मंत्रों का जाप करने वालों को बहाल किया जाएगा?</p>
<p>अब प्रक्षेपास्त्रों और तोपों की जगह हवन कर मंत्रों और हवन के चुंबकीय प्रभावों से इस बात का इंतजार किया जाए, कि भारत अब विश्वविजेता बनने वाला ही है!!!</p>
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		<title>By: शशि सिंह</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/07/09/hindustan-and-superstitions/comment-page-1/#comment-147</link>
		<dc:creator>शशि सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2009 11:31:40 +0000</pubDate>
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		<description>खबर की संरचना गलत हो सकती है पर मुझे नहीं लगता कि सूर्य नमस्कार या फिर वैदिक मंत्रों को अंध विश्वास ठहराया जा सकता है। मुझे यह भी नहीं लगता कि सूर्य नमस्कार या वैदिक मंत्रों का अभ्यास करने कि लिए साधु होना जरूरी है और न ही इस पर किसी साधू या संत का कॉपीराइट ही है। इसके अभ्यास से लाभ की बातें देखी और सुनी है अलबत्ता नुकसान की किसी ख़बर की जानकारी मुझे नहीं है। मैं खुद भी सूर्य नमस्कार का अभ्यास करता हूं... इससे शारीरिक चुस्ती-फूर्ती के साथ आत्मिक शांति का अनुभव करता हूं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>खबर की संरचना गलत हो सकती है पर मुझे नहीं लगता कि सूर्य नमस्कार या फिर वैदिक मंत्रों को अंध विश्वास ठहराया जा सकता है। मुझे यह भी नहीं लगता कि सूर्य नमस्कार या वैदिक मंत्रों का अभ्यास करने कि लिए साधु होना जरूरी है और न ही इस पर किसी साधू या संत का कॉपीराइट ही है। इसके अभ्यास से लाभ की बातें देखी और सुनी है अलबत्ता नुकसान की किसी ख़बर की जानकारी मुझे नहीं है। मैं खुद भी सूर्य नमस्कार का अभ्यास करता हूं&#8230; इससे शारीरिक चुस्ती-फूर्ती के साथ आत्मिक शांति का अनुभव करता हूं।</p>
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