प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की लड़ाई जोर पकड़ रही है। आज शाम मैनेजमेंट कमेटी की बैठक बुलाई गई है। ख़बरों के मुताबिक इस बैठक में कोषाध्यक्ष (ट्रेजरार) नदीम अहमद काजमी को उनके पद से हटाया जा सकता है। उन पर क्लब की गोपनीयता भंग करने और “गैरकानूनी” तरीके से पर्चा छपवाने का आरोप लगाया जा रहा है। गौरतलब है कि नदीम अहमद काजमी ने दो दिन पहले एक ई-मेल जारी किया था और एक पर्चा प्रेस क्लब के सदस्यों को बांटा था। उसमें क्लब के खाते में भारी धांधली की आशंका जताई गई थी। क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के कामकाज पर सवाल खड़ा किया गया था। उन्होंने बताया था कि किस तरह मैनेजमेंट कमेटी की मंजूरी के बगैर पुष्पेंद्र ने बैंक में एक अलग खाता खुलवाया और लेन-देन उसी खाते से किया। नदीम के उस ई-मेल के बाद से उन्हें हटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
इस बारे में नदीम ने बताया है कि उन्हें ई-मेल मजबूरी में जारी करना पड़ा। धांधली का खुलासा करना पड़ा। नदीम के मुताबिक वो क्लब के कोषाध्यक्ष हैं और अगर भविष्य में धांधली की जांच होती तो उनकी ईमानदारी पर भी अंगुलियां उठ सकती थीं। इसलिए उन्हें पहले ही ये साफ़ कर देना पड़ा कि इस हेर-फेर से उनका कोई नाता नहीं है। क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र ने उनके फ़ैसलों को नज़रअंदाज करते हुए सबकुछ खुद ही किया है। इसलिए सारी अनियमितता के लिए भी पुष्पेंद्र खुद ही जिम्मेदार हैं।
दूसरी तरफ, क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र और अध्यक्ष परवेज पर ईजीएम बुलाने के लिए दबाव बढ़ रहा है। ईजीएम बुलाने की मांगपत्र पर अब तक 350 सदस्य हस्ताक्षर कर चुके हैं। अगर ईजीएम बुलाई गई तो इससे पुष्पेंद्र और परवेज की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। फिलहाल मैनेजमेंट कमेटी में चार लोगों को छोड़ कर बाकी उनके पैनल के हैं। यही वजह है कि वो पूरी कोशिश में लगे हैं कि सारी बातें मैनेजमेंट कमेटी के स्तर पर ही सुलझा ली जाएं। विरोधियों को बाहर निकाल दिया जाए और ईजीएम बुलाने की नौबत नहीं आए।
इस बारे में जनतंत्र ने पुष्पेंद्र से बात करने की कोशिश की। लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जबकि एक दूसरी वेबसाइट से पुष्पेंद्र ने कहा है कि वो मीडिया से कुछ भी साझा नहीं करेंगे। ये क्लब का “अंदरुनी” मसला है और उन्हें जो कुछ कहना होगा वो मैनेजमेंट कमेटी से कहेंगे।
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