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जिन्ने “हिंदुस्तान” नई वेख्या …

हिलेरी क्लिंटन और मनमोहन

हिलेरी क्लिंटन और मनमोहन


अमेरिका से एंड यूजर मॉनीटरिंग एग्रीमेंट (एयूएमए) से जुड़ी ख़बर अंग्रेजी अख़बारों में तो पहले पन्ने पर है ही, हिंदी के ज़्यादातर अख़बारों ने भी इसे पहले पन्ने पर छापा है। विपक्ष के आरोप और उन पर सरकार की सफाई दोनों छापी गई है। कुछ ने तो कांग्रेस के भीतर उभर रहे विरोध के सुरों को भी जगह दी है।

दैनिक जागरण की ख़बर है एंड यूजर समझौते पर घिरी सरकार … सब हेडर – गिलानी के बाद हिलेरी के साथ दरियादिली ने डाला मुश्किल में … उसके अलावा एक विश्लेषण कि “रुला सकता है अमेरिका से किया समझौता”। इस ख़बर से जुड़े सभी पहलुओं को कम ही शब्दों में सही पहले पन्ने पर समेटने की कोशिश की गई है।

दैनिक भास्कर ने भी पहले पन्ने पर इससे जुड़ी ख़बर के साथ विश्लेषण भी छापा है ख़बर का हेडर है – अमेरिका से रक्षा समझौते पर बिफरा समूचा विपक्ष…. विश्लेषण का हेडर है – विदेश नीति पर अपने फ़ैसलों से घिरे मनमोहन।

नई दुनिया ने भी राष्ट्रीय राजधानी संस्करण के पहले पन्ने पर इस ख़बर को अच्छा स्पेस दिया है। लेकिन हिंदुस्तान के संपादक को शायद ये ख़बर पहले पन्ने लायक नहीं लगी। इसलिए उन्होंने इसे आठवें पन्ने पर धकेल दिया है। वहां पहले पन्ने के एक तिहाई से ज़्यादा हिस्से में सूर्यग्रहण है। बाकी हिस्सों में चांदनी चौक में डकैती है। दरभंगा में अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाया गया बच्चा है। नेताओं को नक्सलियों की धमकी है। नेताजी की सुरक्षा में कटौती का फरमान है। दिल्ली के हादसे हैं। अगर नहीं है तो संसद सत्र के बीच गुपचुप तरीके से अमेरिका से हुआ एक ऐसा करार जिसे लेकर संसद में जोरदार हंगामा हुआ। जानकार भी जिसे भारतीय हितों की अनदेखी बता रहे हैं। मनमोहन सरकार चारों तरफ से घिरी हुई नज़र आ रही है।


कलाम पर हिंदुस्तान का कमाल

हिंदुस्तान के पेज नंबर एक पर कलाम की बेइज्जती की ख़बर छपी है। बताया गया है कि एयरपोर्ट पर जांच के दौरान पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के जूते उतरवाने की घटना पर संसद में कितना बवाल मचा। अमेरिकी एयरलाइन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है। यह भी बताया गया है कि कॉन्टिनेंटल एयरलाइन का क्या दावा है और किन किन हस्तियों को छूट मिली हुई है। अब आप अख़बार के बारहवें पन्ने पर जाइए। वहां पर आपको इसी से जुड़ी एक और ख़बर नज़र आएगी। उसका हेडर है – कलाम से जूते तक उतरवा लिए थे। लगता है कि अख़बार अपने पाठकों को कल ये ख़बर देना भूल गया। शायद भूल सुधार की प्रक्रिया के तहत हिंदुस्तान के संपादकों ने फॉलोअप पहले पन्ने और घटना का ब्योरा बारहवें पन्ने पर छाप दी। इसी को तो कहते हैं देर आयद दुरुस्त आयद।

हिलेरी एडिट पेज पर हो गईं हिलरी

हिंदी में शब्दों का मानकीकरण तो है ही नहीं। लेकिन आमतौर पर एक संस्था से ये उम्मीद तो की ही जाती है कि उनके यहां शब्द खासकर नाम एक तरह से लिखे जाएं। लेकिन लगता है कि हिंदुस्तान में इस मामले में लोकतंत्र है। जिसका जो मन चाहे वो वैसे लिखे। इसलिए बाकी सभी पन्नों की हिलेरी क्लिंटन एडिट पेज पर हिलरी हो जाती हैं। एक जगह अंतर होता तो मान लिया जाता कि गलती हो गई। लेकिन संपादकीय पेज पर सभी जगह हिलरी ही लिखा है। चाहे वो अख़बार का संपादकीय हो या फिर पुष्पेश पंत का लेख।

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