याहू और माइक्रोसॉफ्ट की यारी
साइबर स्पेस में अब लड़ाई और रोमांचक हो गई है। गूगल को चुनौती देने के लिए दो धुरंधरों माइक्रोसॉफ्ट और याहू ने हाथ मिला लिया है। बुधवार को हुए करार के मुताबिक दोनों मिल कर ऑनलाइन सर्च में गूगल को टक्कर देंगे।
दस साल के लिए हुए इस समझौते में याहू.कॉम अब माइक्रोसॉफ्ट के नए सर्च इंजन बिंग का इस्तेमाल करेगा। दोनों को उम्मीद है कि इससे याहू पर विज्ञापन क्षेत्र की बड़ी कंपनियां आकर्षित होंगी। इस करार से जो भी आमदनी होगी माइक्रोसॉफ्ट उसमें से 88 फीसदी याहू को दे देगा।
याहू के मुताबिक इस समझौते से उसकी आमदनी में सालाना 50 करोड़ डॉलर से ज़्यादा बढ़ोतरी होगी। माइक्रोसॉफ्ट के चीफ एक्जीक्यूटिव स्टीव बालमेर का दावा है कि इस समझौते से उसे सर्च इंजन के रिसर्च में और मदद मिलेगी। जिससे विज्ञापन देने वालों और उपभोक्ताओं दोनों को ज़्यादा फ़ायदा मिल सके। ख़बरों के मुताबिक कई कंपनियों ने एक साझा बयान में ये कहा है कि अब उन्हें विज्ञापन के लिए सिर्फ एक सर्च इंजन पर निर्भर नहीं रहना होगा।
डेढ़ साल चली बातचीत
माइक्रोसॉफ्ट और याहू के बीच फरवरी 2008 में बातचीत शुरू हुई। तब माइक्रोसॉफ्ट ने याहू को खरीदने के लिए 44.6 अरब डॉलर की बिडिंग की। जिसे याहू ने ठुकरा दिया। उस समय याहू के शेयर की कीमत करीब 19.98 डॉलर थी। माइक्रोसॉफ्ट ने उसे प्रति शेयर 31 डॉलर देने की पेशकश की थी। लेकिन याहू ने कहा कि ये पेशकश काफी कम है। यही नहीं माइक्रसॉफ्ट को चिढ़ाने के लिए याहू ने गूगल के सात कुछ हफ्तों का करार किया। माइक्रसॉफ्ट ने तब याहू को प्रति शेय दो डॉलर अधिक यानी 33 डॉलर देने की पेशकश की। लेकिन बात नहीं बनी। उसके बाद दोनों कंपनियों ने लंबी साझेदारी पर वार्ता शुरू की। हालांकि बीच में कई ऐसे अवसर आए जब लगा कि ये बातचीत बेनतीजा ख़त्म होगी, लेकिन दोनों ने कारोबारी हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ लचीला रुख अपनाया और करार हो गया है।
गूगल को टक्कर देना कितना मुमकिन?
सर्च इंजन के मामले में गूगल से भिड़ना आसान नहीं है। हालांकि ज़्यादातर जानकार इस मुकाबले के बारे में निर्णायक तरीके से कुछ भी कहना नहीं चाह रहे। लेकिन वो इतना जरूर कह रहे हैं कि गूगल की तकनीक ज़्यादा यूजर फ्रेंडली (यानी इस्तेमाल में बहुत आसान) है। जबकि याहू और माइक्रोसॉफ्ट की तकनीक इस्तेमाल में उतनी आसान नहीं। यही नहीं गूगल को सिर्फ़ एक सर्च इंजन कहना ग़लत होगा। गूगल के साथ जी-मेल से लेकर, ऑरकुट, यू-ट्यूब, गूगल अर्थ, पिकासा .. एक से बढ़ कर एक ऐसी सुविधाएं हैं जिनका उपभोक्ता मुफ़्त में लुत्फ़ उठाते हैं। जबकि बिंग के साथ अभी ऐसा नहीं है। इसलिए अगर गूगल से भिड़ना है तो माइक्रोसॉफ्ट और याहू को कई ऐसी सुविधाओं के साथ मैदान में उतरना होगा जो लोगों की आदत बदल कर उन्हें अपनी ओर खींच सकें।
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