
प्रकाश कुमार
सवाल – मुख्यमंत्री के दफ़्तर में आखिर मारपीट क्यों हुई?
प्रकाश कुमार – मुख्यमंत्री के चेंबर में दैनिक जागरण में छपी एक तस्वीर पर चर्चा हो रही थी। उस तस्वीर में मेरा चेहरा ब्लर कर दिया गया था। मैंने जागरण के सुभाष पांडे से पूछा कि आखिर उन लोगों ने ऐसा क्यों किया? हम लोगों के कैमरे में भी दैनिक जागरण के कई पत्रकारों की तस्वीर आ जाती है। हम तो कभी ब्लर नहीं करते। मुख्यमंत्री ने भी मेरी बात का समर्थन किया। दैनिक जागरण के सुभाष पांडे के पास मेरे सवाल का कोई जवाब नहीं था। मैंने उनसे ये भी कहा कि मैं जागरण पर मानहानि का मुकदमा करूंगा। इस बातचीत के बाद नीतीश जी निकल गए और बात ख़त्म हो गई। तभी अचानक कन्हैया भेलारी पहुंचे। भेलारी ने एक विधायक ज्ञानेंद्र ज्ञानू को कहा कि इधर आइए। इस पर सुभाष पांडे ने चुटकी ली और कहा कि जाइए कुछ सिफारिश करेंगे। भेलारी को चाहिए था कि सुभाष पांडे को जवाब देते, लेकिन उन्होंने मुझ पर तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनका हमारा चेहरा ब्लर करने की जरूरत नहीं पड़ती है। भेलारी से मेरी बातचीत बंद है। उन्हें कोई हक़ नहीं था कि मेरा मजाक उड़ाएं। मुझे गुस्सा आ गया मैंने कहा कि यहां पर कुछ ग़लत लोग भी बैठे हुए हैं जिनका काम सिर्फ़ दूसरों पर कीचड़ उछालना है। इस पर बेलारी ने मुझे गाली दी और भला बुरा कहने लगे। मैंने जवाब दिया तो भेलारी हाथापाई पर उतर आए। उसके बाद बीच-बचाव से मामला शांत हुआ।सवाल - क्या आप मानते हैं कि वहां पर जो कुछ भी हुआ वो शर्मनाक था?
प्रकाश कुमार - यकीनन ग़लत था। दैनिक जागरण को नहीं चाहिए था कि किसी भी सामान्य नागरिक की तस्वीर को ब्लर कर, उसे अपमानित करे। उसने ऐसा किया, ग़लत किया। बुरी नीयत से किया। मुख्यमंत्री के चेंबर में एक पत्रकार का मजाक उड़ाया गया। ग़लत हुआ। फिर भेलारी ने मेरे बारे में भद्दी टिप्पणी की… वो भी ग़लत था। और मेरे विरोध करने पर वो हाथापाई… सबकुछ गलत था। वहां जो कुछ भी हुआ उसका मुझे हमेशा अफसोस रहेगा।
सवाल – ये भी कहा जा रहा है कि प्रेस क्लब को लेकर चल रहे झगड़े की वजह से ही ये मारपीट हुई?
प्रकाश कुमार – ये ग़लत है। वहां पर प्रेस क्लब की बात हुई ही नहीं। एक बार प्रेस क्लब को लेकर भेलारी से मेरी कहासुनी हुई थी। लेकिन वो बीते जमाने की बात है। मैं उस वाकये को भुला चुका हूं। आज बात सिर्फ दैनिक जागरण की करतूत पर हो रही थी और इसमें भेलारी को अनावश्यक तौर पर मजा नहीं लेना चाहिए था। उन्हें मुझ पर भद्दी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने किया। इससे जाहिर होता है कि वो बात बढ़ाना चाहते थे।
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