“अंग्रेजी पत्रकार की जिन बातों को हिंदी पत्रकार उसके गुण बताते, उन्हीं बातों को वे अपनी सहकर्मी के चरित्र हनन का औजार बना लेते। मसलन, अंग्रेजी पत्रकार बोले तो तेज-तर्रार…
“हिंदुस्तान” अंधविश्वास की गिरफ़्त में है और उसमें आए दिन कई ऐसी ख़बरें छपती हैं जिनसे अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है। श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान सबने देखा कि किस…
7 अप्रैल 2009। ये वही दिन था जब दैनिक जागरण के पत्रकार जरनैल सिंह ने गृह मंत्री पी चिदंबरम के सामने जूता उछाला था। उसके बाद सबने न्यूज़ चैनलों पर…
प्रणब मुखर्जी के बजट को मीडिया ने आड़े हाथों लिया है। कुछ अख़बारों ने बड़ी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बजट की आलोचना में कुछ पत्रकार तो व्यक्तिगत हो गए हैं।…
बहुत से संवेदनशील मुद्दों पर न्यूज़ चैनलों और सरकार का गठजोड़ साफ़ दिखता है। लालगढ़ भी ऐसा ही मुद्दा है, जहां मीडिया ने सत्ता पक्ष के साथ हाथ मिला कर…
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