बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेंबर में जो कुछ भी हुआ उस पर वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश कुमार अफसोस जाहिर कर चुके हैं। कन्हैया भेलारी भी उस घटना को शर्मनाक बता रहे हैं। वो मानते हैं कि उन्हें ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए था जिससे प्रकाश कुमार के सम्मान को ठेस पहुंची। लेकिन उनका ये भी कहना है कि प्रकाश को उनका मजाक पसंद नहीं आया तो वो शब्दों के जरिए विरोध जता सकते थे। जनतंत्र से वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी की बातचीत।

कन्हैया भेलारी, वरिष्ठ पत्रकार
सवाल – मुख्यमंत्री के चेंबर में आखिर झगड़े की नौबत क्यों आई? प्रकाश से आपका झगड़ा किस बात पर हुआ?
कन्हैया भेलारी - मैं जब मुख्यमंत्री के चेंबर में घुसा तब वहां पहले से क्या बातचीत चल रही थी इसका मुझे अंदाजा नहीं था। मैंने जब ज्ञानेंद्र ज्ञानू को अपनी ओर बुलाया तो सुभाष पांडे ने मजाक किया। कहा कि जाइए ज्ञानू कोई पैरवी होगी। इस पर मैंने कहा कि देखो मेरा चेहरा ऐसा नहीं है कि तुम उसे पोत (ब्लर कर) दो। इसी पर प्रकाश भड़क गए। उन्होंने मुझे गाली दी। मैं भी खुद पर काबू नहीं रख सका। मैंने भी गाली दी। उसके बाद प्रकाश ने पिन वाला डिब्बा मेरे मुंह पर फेंक दिया। मैंने हाथ से रोकने की कोशिश की तो शायद उन्हें लगा कि मैं हमला करने जा रहा हूं। उन्होंने तपाक से मेरे मुंह पर घूसा जड़ दिया। सच तो ये है कि मारपीट में मेरा जरा भी यकीन नहीं। जिन्हें भी लग रहा है कि मैं मारने के लिए आगे बढ़ा था, वो गलतफहमी में हैं। मैंने सिर्फ़ अपने बचाव में हाथ ऊपर किया था। वहां पहले क्या हुआ था- इस बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। मुझे नहीं मालूम था कि प्रकाश अपने दोस्तों के साथ दैनिक जागरण में छपी फोटो पर प्रोटेस्ट दर्ज कराने गए हैं। और मुख्यमंत्री समेत कई लोगों ने उस पर प्रतिक्रिया दी है। लेकिन मैं ये नहीं समझ पा रहा कि इतना गुस्सा किस लिए कि एक मजाक पर आप किसी की पिटाई कर दीजिए?
सवाल – क्या आपको लगता है कि इसके पीछे कोई और वजह है?
कन्हैया भेलारी – मेरा एकदम यही मानना है कि सबकुछ प्रेस क्लब से जुड़े ट्रस्ट का मामला है। हम लोगों ने प्रकाश और इनके साथियों का खेल बिगाड़ दिया, इसलिए वो सभी हमसे नाराज़ चल रहे हैं। ये लोग क्लब की कैंटीन का ठेका दे चुके थे। शराब का ठेका दे चुके थे। कर्मचारियों की नियुक्ति की बात हो चुकी थी। लेकिन जैसे ही हम लोगों को पता चला इनकी सारी योजना फेल हो गई। तब से ये वक्त बेवक्त मुझे बेइज्जत करने में लगे रहते हैं। प्रेस क्लब के मसले पर इन लोगों ने मुझ पर काफी दबाव डाला था। मेरे घर पर आकर बातचीत की। फिर नेता भेजा। लेकिन मैं जब नहीं झुका तो इन लोगों उसे दिल पर ले लिया।
सवाल – क्या आप मानते हैं कि वहां जो कुछ हुआ वो शर्मनाक था?
कन्हैया भेलारी - मैं मानता हूं कि वहां जो कुछ हुआ वो शर्मनाक था। मुझे प्रकाश पर वो कमेंट नहीं करना चाहिए था। वैसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन मैंने जो कहा वो मजाक के लहजे में था और मुझे ये अंदाजा नहीं था कि वहां इस मसले पर तीखी बात हो चुकी थी। लेकिन साथ ही मैं ये भी मानता हूं कि मेरे ऊपर हमला करना भी सही नहीं था।
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