
पुलिस कमांडो के बीच संजीत
अभी जनतंत्र पर चल रही बहस को बीच में रोकते हुए आप सभी से तहलका डॉट कॉम पर छपी एक ख़बर पढ़ने की गुजारिश कर रहा हूं। उस ख़बर का हेडर है मर्डर इन प्लेन साइट। ऐसी ख़बरें बहुत कम ही पढ़ने, देखने और सुनने को मिलती हैं। हम सब जानते हैं कि किस तरह सुरक्षाबल अपने अधिकार का बेजा इस्तेमाल करके बेकसूर लोगों को गोलियों से छलनी करते हैं। ये राज्य का आतंकवाद है जिसके आगे किसी भी तरह का आतंकवाद अदना सा लगता है। जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ और उत्तर पूर्व ज़्यादातर राज्यों में इस आतंकवाद का घिनौना चेहरा देखने को मिल जाएगा। तहलका ने जिस चेहरे को उजागर किया है वो चेहरा मणिपुर का है।

संजीत का शव
23 जुलाई को इंफाल में संजीत नाम का एक युवक मुठभेड़ में मारा जाता है। मणिपुर पुलिस कमांडो के जवान उसे घेर कर मार डालते हैं। पुलिस के मुताबिक संजित भागने की कोशिश कर रहा था और रोकने पर उसने पुलिस पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में मारा गया। लेकिन वहां मौजूद एक स्थानीय फोटोग्राफर ने उस मुठभेड़ की तस्वीरें खींच ली। पुलिस के डर से उसने ये तस्वीरें स्थानीय अख़बारों को नहीं दीं। आप तहलका डॉट कॉम पर छपी उन तस्वीरों को देखिए और पूरी ख़बर पढ़िए सो बताइये कि उन क्रूर पुलिसवालों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई होनी चाहिए? और अगर कोई सरकार अपने ही राज्य की जनता के दमन के लिए पुलिस के वेश में ऐसे हत्यारों को पालती है तो उस सरकार को सत्ता में बने रहने का क्या हक़ है?
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