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मणिपुर में निशाने पर पत्रकार

मणिपुर की राजधानी इंफाल में एक स्थानीय अख़बार पावोजेल के दफ़्तर पर हमला हुआ है। हमला कर्फ्यू के दौरान गुरुवार की शाम को हुआ। उस वक़्त अख़बार के दफ़्तर में कुछ कर्मचारी काम कर रहे थे और किसी ने बाहर से गोली चला दी। ये कर्मचारियों की खुशकिस्मती है कि गोली से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

मणिपुर में 23 जुलाई को पुलिस कमांडो ने संजीत नाम के युवक की हत्या कर दी। मणिपुर पुलिस कमांडोज (एमपीसी) के मुताबिक संजीत को मुठभेड़ में मारा गया, लेकिन तहलका पर छपी तस्वीरें और स्थानीय लोग उसके दावे को खोखला साबित कर रहे हैं। उनके मुताबिक एमपीसी के छह जवानों ने मिल कर सोची समझी रणनीति के तहत संजीत की हत्या की है। उसके बाद से ही मणिपुर सुलग रहा है। सोमवार और मंगलवार को बंद के दौरान जमकर हिंसा हुई। जिसके बाद शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। हालांकि भारी दबाव के बाद मुख्यमंत्री ने संजीत हत्याकांड में न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है, लेकिन लोगों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है। रह रह कर कोई न कोई इलाका धधकने लगता है।

ऐसे अशांत माहौल में पत्रकारों पर दोहरा दबाव रहता है। सरकार का और सरकार विरोधी तत्वों का भी। मणिपुर का मीडिया इस वक़्त इसी दोहरे दबाव के बीच काम कर रहा है। पत्रकारों के मुताबिक ये सही है कि वो सरकार विरोधी तत्वों के निशाने पर भी हैं, लेकिन इस हमले में शक की सुई सुरक्षाकर्मियों पर है। कर्फ्यू के दौरान… जब सड़कों पर सन्नाटा पसरा हो तो कोई उपद्रवी उन पर हमला क्यों करेगा? मीडिया की शिकायत के बाद पुलिस ने इस हमले की जांच शुरू कर दी है।

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