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गूगल का नया सर्च इंजन और फेसबुक की ललकार

गूगल का नया सर्च इंजन “कैफीन”

गूगल ने एक बड़े राज़ से पर्दा उठा दिया है। गूगल की टीम पिछले कई महीने से एक नए सर्च इंजन पर काम कर रही है। एक ऐसा सर्च इंजन जो नई पीढ़ी की जरूरत के हिसाब से हो। इसके लिए गूगल ने चुपके से फीडबैक मंगाने शुरू कर दिया है। वेबसर्च के इस नए सिस्टम का नाम कैफीन रखा गया है।

आमतौर पर गूगल अपने सर्च इंजन में कुछ न कुछ बदवाल करता आया है। लेकिन 2006 के बाद बड़े स्तर पर कोई बदला नहीं हुआ है। गूगल के इंजीनियरों के मुताबिक किसी भी सर्च इंजन को तैयार करने में तीन मुख्य बातों का ध्यान रखना होता है। एक जितनी भी कमांड के तुरंत बाद वेब पर मौजूद अरबों पन्नों में से जरूरत के पन्नों को छांटना। फिर तेजी से उन्हें एक क्रम में लगाना और उसके बाद रैंक और रेटिंग के हिसाब से उन्हें सर्च इंजन पर पेश करना। इन्हीं बातों को ध्यान में रख कर पहले से कहीं अधिक बेहतर सर्च इंजन बनाने में गूगल की टीम दिन रात जुटी है।

गूगल के आधिकारिक गूगल वेबमास्टर्स सेंट्रल ब्लॉग पर उसके दो इंजीनियरों सीताराम अय्यर और मैट कट्स ने पोस्ट लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा है कि नए सर्च इंजन पर काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उसमें सुधार के लिए गूगल इस्तेमाल करने वालों के सुझाव चाहिए। अगर आप भी सुझाव देना चाहते हैं तो गूगल वेबमास्टर्स सेंट्रल ब्लॉग पर क्लिक करके नए सर्च इंजन पर हाथ आजमा सकते हैं और उसे अनुभव कर सकते हैं।

वैसे नए और पुराने सर्च इंजन में पहली झलक में कोई खास अंतर नहीं नज़र आ रहा है। लेकिन शुरुआती फीडबैक के मुताबिक कैफीन पुराने सर्च इंजन से अधिक तेज है। यही नहीं उसमें किसी भी विषय पर वेबसाइट्स का ब्योरा ज़्यादा मिलता है। नए सर्च इंजन में और कौन-कौन से नए फीचर हैं इसका खुलासा धीरे धीरे होगा।

सर्च इंजन के संग्राम में फेसबुक की ललकार

सर्च इंजन के क्षेत्र में फेसबुक भी कूद पड़ा है। इसके लिए उसने फ्रेंडफीड नाम की एक सोशल नेटवर्किंग साइट को 5 करोड़ डॉलर में खरीद लिया है। गार्डियन पर छपी ख़बर के मुताबिक फ्रेंडफीड को खरीदने के साथ ही उसे 12 लोगों की ऐसी टीम मिली है जिसमें से चार गूगल के लिए काम कर चुके हैं। पॉल बैकेट, जिम नौरिस, ब्रेट टेलर और संजीव सिंह 2007 में गूगल को छोड़ कर फ्रेंडफीड की स्थापना की। करीब एक साल बाद उन्होंने इसकी औपचारिक घोषणा की। एक साल के भीतर फ्रेंडफीड इस्तेमाल करने वालों की संख्या ढाई लाख हो गई है। हालांकि ये संख्या फेसबुक इस्तेमाल करने वालों 25 करोड़ लोगों की तुलना में बहुत बहुत कम है, लेकिन फ्रैंडफीड इस्तेमाल करने वाले इसके कायल हैं।

फेसबुक से पहले गूगल को माइक्रोसॉफ्ट भी ललकार चुका है। उसने इस लड़ाई में याहू को भी साथ मिला लिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक नया सर्च इंजन बिंग भी जारी किया है। लेकिन बिंग की रिपोर्ट अच्छी नहीं रही। गूगल की तुलना में बिंग काफी पीछे है। माइक्रोसॉफ्ट के इंजीनियर भी गूगल की काट निकालने के लिए दिन रात काम कर रहे हैं।
फेसबुक के मैदान में उतरने से सर्च इंजन के लिए लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है। अब देखना है कि माइक्रोसॉफ्ट और याहू की जोड़ी या फिर फेसबुस में से कौन सर्च इंजन के क्षेत्र में गूगल की बादशाहत को चुनौती दे पाता है।

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