आखिर क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन का हिंदी मतलब है सूअर। स्वाइन प्लू सूअर से फैलने वाली बीमारी है। इसमें सर्दी-जुकाम होता है और तेज बुखार भी। ये बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। इसका वायरस हवा में तैरता है और इंसान से इंसान में फैलता चला जाता है। इस बार स्वाइन फ्लू नए इन्फ्लुएंजा वायरस ए/एच1एन1 से फैल रहा है। इसका पहला केस 17 मार्च 2009 को मैक्सिको में सामने आया था। उसके बाद इसने अमेरिका में पैर पसारे। 17 अप्रैल 2009 को अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया में दो बच्चे इसकी चपेट में आए। उनमें से कोई भी किसी जानवर के संपर्क में नहीं आया था। 17 मार्च से 25 अप्रैल के भीतर मैक्सिको और अमेरिका के कई इलाकों में इस वायरस ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।
स्वाइन फ्लू इंसान को कैसे अपनी चपेट में लेता है?
आमतौर पर स्वाइन फ्लू वायरस इंसानों पर हमला नहीं करता है। लेकिन अगर कोई स्वाइन फ्लू से ग्रसित सूअर के संपर्क में सीधे आ जाए तो ये बीमारी उसे भी पकड़ लेती है। इस बार इंसानों पर हमला करने वाले वायरस ए/एच1एन1 का स्रोत भी सूअर ही है, लेकिन ये इंसानों से इंसानों में भी तेजी से फैलता है। अगर किसी को ये बीमारी है और वो छींके या फिर खांसे तो उसके बगल मैं मौजूद किसी शख़्स को ये बीमारी हो सकती है। बीमार के संपर्क में आने के बाद अगर कोई अपने नाक या मुंह पर हाथ लगाता है ये स्वाइन वायरस उसे पकड़ लेता है।
बरसात और सर्दी में वायरस का असर
बर्ड फ्लू की ही तरह स्वाइन फ्लू का वायरस 70 डिग्री तापमान पर निष्क्रिय हो जाता है। लेकिन तापमान कम होने पर ये वायरस काफी सक्रिय रहता है। बरसात और सर्दियों में इसका प्रकोप बढ़ सकता है।
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय
आप समय-समय पर अपने हाथ साबुन से धोते रहें। जितना हो सके नींद लें। तनाव को दूर रखने की कोशिश करें। अधिक से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करें। खूब पौष्टिक भोजन लें। स्वाइन फ्लू के मरीजों के बहुत करीब जाने की कोशिश न करें।
दूसरों को स्वाइन फ्लू से बचाने का उपाय?
अगर किसी को स्वाइन फ्लू है तो उसे दूसरों के बहुत कम मिलना चाहिए। स्कूल-दफ्तर जाना तुरंत बंद कर देना चाहिए। खांसते और छींकते वक्त मुंह और नाक पर टिशू पेपर रखना चाहिए। खांसने और छींकने के तुरंत बाद हाथ साबुन से धोना चाहिए।
शरीर से बाहर ये वायरस कितने समय तक ज़िंदा रहता है?
आमतौर पर ये वायरस शरीर से बाहर दो घंटे या फिर उससे थोड़ा अधिक समय तक जिंदा रहता है। कैफेटेरिया, रेस्तरां जैसी जगहों पर इसकी उम्र थोड़ी देर बढ़ जाती है। अगर ऐसी जगहों से लौटें तो अपने हाथ कई बार साबुन से धोएं।
मैं खुद को बीमार पड़ने से कैसे बचाऊं?
अभी स्वाइन फ्लू के लिए कोई टीका तैयार नहीं हुआ है। इसका टीका बाज़ार में आने में वक़्त लगेगा। एहतियात के जरिए ही इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। खांसते और छींकते वक़्त अपने नाक और मुंह पर टिशू पेपर रखें। इस्तेमाल के बाद टिशू पेपर को नष्ट कर दें। समय समय पर हाथ साबुन से धोएं। खासतौर से जब आपको छींक या फिर खांसी आए। आंख, नाक और मुंह को छूने से जितना हो सके बचें। जरूरी काम हो तभी घर से बाहर जाएं। स्कूल और दफ़्तर के बाद सीधे घर पहुंचें। कुछ दिन के लिए बिना बात घूमना बंद कर दें।
बीमारी के लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण आम फ्लू की तरह ही हैं।
सर्दी, खांसी और जुकाम,
बुखार (कुछ मामलों में बहुत तेज तो कुछ में साधारण बुखार)
जोड़ों में दर्द और उल्टी
सांस लेने में तकलीफ
शरीर में सुस्ती
स्वाइन फ्लू का इलाज
जहां तक स्वाइन फ्लू के टीके का सवाल है… दुनिया के कई देशों में अभी इसका शोध चल रहा है। ताज़ा ख़बर के मुताबिक जल्दी ही इसका टीका ढूंढ लिया जाएगा। भारत में दवाई बनाने वाली कंपनी कैडिला कुछ दिन में इसके क्लिनिकल परीक्षण के लिए सरकार से मंजूरी मांग सकती है। टीका ढूंढ लिये जाने पर एक साल में पूरी दुनिया में एक से दो अरब तक टीके तैयार किए जा सकते हैं। ये दुनिया की कुल आबादी की तुलना में काफी कम है।
फिलहाल तो टेमीफ्लू नाम की दवा से स्वाइन फ्लू का इलाज होता है। लेकिन इस दवा के साइड इफेक्ट्स बहुत ज़्यादा हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों को ये दवा देने पर नुकसान भी हो सकता है। इसलिए जिसे हिंदुस्तान के लोग कारगार इलाज बता रहे हैं वह इतना कारगर भी नहीं है।
यह हाल तब है जब विज्ञान ने काफी प्रगति की है। वरना यह बीमारी कितनी घातक है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 1918 में इससे हुई मौत की संख्या प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की संख्या से कहीं ज़्यादा थी।
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