Subscribe by Email

पुलिसिया चक्रव्यूह में फंसे अनिरुद्ध और सुहासिनी

अनिरुद्ध बहल, पत्रकार

अनिरुद्ध बहल, पत्रकार

2005 में आज तक पर चला ऑपरेशन दुर्योधन आपको याद होगा। उस स्टिंग ऑपरेशन में पूरे देश ने ग्यारह सांसदों को सवाल पूछने के लिए घूस मांगते देखा था। उस स्टिंग ऑपरेशन के बाद पूरे देश में हंगामा मचा। संसदीय समिति का गठन हुआ। संसदीय समिति ने अपनी जांच में सभी सांसदों को दोषी पाया और उन्हें संसद से बाहर कर दिया गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक अब उस मामले में नाटकीय मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में ग्यारह सांसदों के साथ स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने वाले कोबरा पोस्ट के दो पत्रकार अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज का नाम भी है। भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत सांसदों पर पद के दुरुपयोग का मामला बनाया गया है। जबकि अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज पर अपराध के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में एक सांसद राजा रामपाल को छोड़ कर अदालत ने बाकी सभी को समन भेज दिया है। राजा रामपाल इस बार कांग्रेस के चुनाव जीत गए हैं और उनके ख़िलाफ़ मामला चलाने के लिए पुलिस को स्पीकर की मंजूरी का इंतज़ार है। इस मामले की सुनवाई बीस अगस्त से शुरू होगी।

पुलिस की चार्जशीट में दोनों पत्रकारों का नाम होने से मीडिया जगत में लोग हैरान हैं। दरअसल ऑपरेशन दुर्योधन में सांसदों पर लगे आरोप की जांच के लिए एक संसदीय समिति का गठन हुआ था। उस समिति ने सभी ग्यारह सांसदों को पैसे लेकर सवाल पूछने का दोषी पाया। भ्रष्टाचार का दोषी पाया। संसदीय समिति ने स्टिंग ऑपरेशन को सही ठहराते हुए कहा था कि वो देशहित में एक बड़ा खुलासा है। जब संसदीय समिति से कोबरा पोस्ट के पत्रकारों को क्लीन चिट मिल गई तो फिर इस मामले में उन्हें आरोपी बनाने का क्या तुक है ये समझ में नहीं आ रहा।

ऑपरेशन दुर्योधन क्या था?

सवाल पूछने के लिए पैसे लेने का ये अनोखा मामला था। संसद में जनता के प्रतिनिधियों से ये उम्मीद की जाती है कि वो जनता और देश हित से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे। वहां एक सकारात्मक बहस होगी और लोगों की मुश्किलों को दूर करने का उपाय किया जाएगा। लेकिन कुछ सांसद अपने इस अधिकार का दुरुपयोग करते पकड़े गए। कोबरा पोस्ट के स्टिंग ऑपरेशन में कुल 11 सांसदों को सवाल पूछने के लिए पैसे मांगते हुए देखा गया। भारत के इतिहास में ये अपने तरह का पहला मामला था। इस खुलासे के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया। संसद और संसदीय मर्यादा की धज्जियां उड़ गईं।

इस स्टिंग ऑपरेशन में सात बीजेपी, दो बीएसपी, एक कांग्रेस और एक आरजेडी के सांसद फंसे थे। इन ग्यारह सांसदों में दस लोकसभा से और एक राज्यसभा से थे। चूंकि ये मसला संसद के भीतर हुए अपराध से जुड़ा था। इसलिए इसकी जांच के लिए संसदीय समिति का गठन हुआ। संसदीय समिति ने सभी ग्यारह सांसदों को दोषी ठहराते हुए संसद से बाहर कर दिया। साथ ही समिति ने इस भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करने वाली टीम और आज तक की तारीफ भी की।

स्टिंग ऑफरेशन में फंसे सांसदों की सूची

बीजेपी के सांसद –

छत्रपाल सिंह, उड़ीसा (राज्यसभा)
अन्नासाहेब एम के पाटिल, इरनाडोल, महाराष्ट्र
वाई जी महाजन, जलगांव, महाराष्ट्र
सुरेश चंदेल, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश
लालचंद कोल, रॉबर्ट्सगंज, उत्तर प्रदेश
प्रदीप गांधी, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
चंद्रप्रताप सिंह, सीधी, मध्य प्रदेश

बीएसपी के सांसद
नरेंद्र कुशवाहा, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश
राजा रामपाल, बिल्हौर, उत्तर प्रदेश

कांग्रेस के सांसद
रामसेवक सिंह, ग्वालियर, मध्य प्रदेश

आरजेडी के सांसद
मनोज कुमार, पलामू, झारखंड

Share This Post

2 Responses to पुलिसिया चक्रव्यूह में फंसे अनिरुद्ध और सुहासिनी

  1. संदीप Reply

    August 13, 2009 at 6:11 pm

    यह सब जनता के सामने नेताओं-अफसरों की असलियत लाने वाले बचे-खुचे पत्रकारों के मुंह बंद करने के प्रयास ही हैं।

  2. amit tyagi Reply

    August 19, 2009 at 9:03 pm

    patrakaron ko fansane ki achhi ranniti. is prayas ko munhtod jawab diya jayega

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>