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	<title>Comments on: यहां &#8220;शहाबुद्दीन”, “बजाज” और “ये पत्रकार” एक जैसे हैं!</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: sushant jha</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/15/race-for-rajya-sabha/comment-page-1/#comment-1097</link>
		<dc:creator>sushant jha</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Aug 2009 08:02:25 +0000</pubDate>
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		<description>अरविंदजी, अपने देश में ये मान के राज्यसभा बनाई गई थी कि काबिल, अनुभवी और विशेषज्ञ लोगों को जगह मिलेगी और देश इनके अनुभवों का फायदा उठाएगा। लेकिन काबिलियत के नाम पर दलाल, अनुभवी के नाम पर चमचे और चुनाव का सामना न करनेवाले राजनेता और विशेषज्ञ के नाम पर निजी कंपनियों के एजेंट राज्यसभा में घुस गए हैं। ये किसका हित साधेंगे और जनता के हित में कैसी आवाज बुलंद करेंगे-ये देखने की बात है। एक सुधार ये हो सकता है कि जो सुविधाएं लोकसभा के सांसद को मिलती है वो इनसे छीन ली जाए-मसलन सांसद निधि, हवाई भत्ता और दिल्ली में बेहतरीन आवास। फिर देखिए इन जनसेवकों की संख्या मे कितनी कमी आती है। मैं ये नहीं समझ पाता कि ग्लैमर से दूर रहनेवाले कई समाजसेवकों को तो कोई पार्टी घास नहीं देती-लेकिन ये संपादक महोदय कैसे इन मौकों को लपक लेते हैं। जाहिर है, ये व्यवस्था और इसके कथित वाचडाग एक दूसरे के पूरक बन गए हैं और घोड़े ने घास से दोस्ती कर ली है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरविंदजी, अपने देश में ये मान के राज्यसभा बनाई गई थी कि काबिल, अनुभवी और विशेषज्ञ लोगों को जगह मिलेगी और देश इनके अनुभवों का फायदा उठाएगा। लेकिन काबिलियत के नाम पर दलाल, अनुभवी के नाम पर चमचे और चुनाव का सामना न करनेवाले राजनेता और विशेषज्ञ के नाम पर निजी कंपनियों के एजेंट राज्यसभा में घुस गए हैं। ये किसका हित साधेंगे और जनता के हित में कैसी आवाज बुलंद करेंगे-ये देखने की बात है। एक सुधार ये हो सकता है कि जो सुविधाएं लोकसभा के सांसद को मिलती है वो इनसे छीन ली जाए-मसलन सांसद निधि, हवाई भत्ता और दिल्ली में बेहतरीन आवास। फिर देखिए इन जनसेवकों की संख्या मे कितनी कमी आती है। मैं ये नहीं समझ पाता कि ग्लैमर से दूर रहनेवाले कई समाजसेवकों को तो कोई पार्टी घास नहीं देती-लेकिन ये संपादक महोदय कैसे इन मौकों को लपक लेते हैं। जाहिर है, ये व्यवस्था और इसके कथित वाचडाग एक दूसरे के पूरक बन गए हैं और घोड़े ने घास से दोस्ती कर ली है।</p>
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		<title>By: रंगनाथ सिंह</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/15/race-for-rajya-sabha/comment-page-1/#comment-1096</link>
		<dc:creator>रंगनाथ सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Aug 2009 00:03:37 +0000</pubDate>
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		<description>अरविन्द जी

लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि जिस देश मेे यह हो उस देश का सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षणिक इत्यादि चरित्र अपने प्रतिनिधीत्व के साथ संसद में मौजूद रहता है। राजशाही के बारे में कहावत थी कि यथा राजा तथा प्रजा। लोकशाही के लिए भी दौ सौ प्रतिशत सत्य है। यथा प्रजा तथा राजा।

संभवतः इसलिए बर्नार्ड शा ने कहा होगा कि लोकतंत्र की सबसे अच्छी बात यह है कि जनता जिस लायक होती है उसी तरह के लोग उस पर शासन करते हैं। ईमादारी,न्याय,जनपक्षधरता इत्यादि किसी भी मुद्दी की राह सड़क से संसद की ओर जाती है न कि संसद से सड़क की ओर।
सीपीएम एण्ड कम्पनी के िसंगुरीकरण के बाद तो मैं पूरे दावे के साथ कहा सकता हूँ कि भारतीय संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय संसद में कोई विपक्ष है ही नहीं। चुनाव में दो-चार वोट कम या ज्यादा पाने से क्या फर्क पड़ता है। यह सभी लोग एक ही नीति-रीति के पक्षधर हैं।

आलोक मेहता ने जो हरकत की उसका प्रतिरोध जरूरी था। लेकिन ससंद में मनोनित हो कर कौन जाए इस पर मुझे किसी तरह की बहस का ज्यादा अवसर नहीं दिखता। जिन संभावित छह का नाम जाहिर हुआ है उनमें से कोई सासंद बन जाए ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला।

मैं तो कहता हूँ कि ये सारे रंगे सियार संसद में एक साथ न पहुँचे तो इनको पहचानना मुश्किल हो जाएगा। संसद जाने का लालच न होता तो ये अपनी खाल कभी नहीं उतारते। और आराम से भीतरखाने मौज मारते जिंदगी गुजारते।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरविन्द जी</p>
<p>लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि जिस देश मेे यह हो उस देश का सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षणिक इत्यादि चरित्र अपने प्रतिनिधीत्व के साथ संसद में मौजूद रहता है। राजशाही के बारे में कहावत थी कि यथा राजा तथा प्रजा। लोकशाही के लिए भी दौ सौ प्रतिशत सत्य है। यथा प्रजा तथा राजा।</p>
<p>संभवतः इसलिए बर्नार्ड शा ने कहा होगा कि लोकतंत्र की सबसे अच्छी बात यह है कि जनता जिस लायक होती है उसी तरह के लोग उस पर शासन करते हैं। ईमादारी,न्याय,जनपक्षधरता इत्यादि किसी भी मुद्दी की राह सड़क से संसद की ओर जाती है न कि संसद से सड़क की ओर।<br />
सीपीएम एण्ड कम्पनी के िसंगुरीकरण के बाद तो मैं पूरे दावे के साथ कहा सकता हूँ कि भारतीय संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय संसद में कोई विपक्ष है ही नहीं। चुनाव में दो-चार वोट कम या ज्यादा पाने से क्या फर्क पड़ता है। यह सभी लोग एक ही नीति-रीति के पक्षधर हैं।</p>
<p>आलोक मेहता ने जो हरकत की उसका प्रतिरोध जरूरी था। लेकिन ससंद में मनोनित हो कर कौन जाए इस पर मुझे किसी तरह की बहस का ज्यादा अवसर नहीं दिखता। जिन संभावित छह का नाम जाहिर हुआ है उनमें से कोई सासंद बन जाए ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला।</p>
<p>मैं तो कहता हूँ कि ये सारे रंगे सियार संसद में एक साथ न पहुँचे तो इनको पहचानना मुश्किल हो जाएगा। संसद जाने का लालच न होता तो ये अपनी खाल कभी नहीं उतारते। और आराम से भीतरखाने मौज मारते जिंदगी गुजारते।</p>
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		<title>By: कबीर</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/15/race-for-rajya-sabha/comment-page-1/#comment-1095</link>
		<dc:creator>कबीर</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Aug 2009 20:33:39 +0000</pubDate>
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		<description>चंदन मित्रा के लेख में बहुत अहंकार नज़र आता है। उन्होंने न केवल अपने लेख में बल्कि संसद में दिए अपने भाषण में भी इस अहंकार को जाहिर किया। उन्होंने सभी सांसदों के बीच कहा कि उन्हें बाकी पत्रकारों की तुलना में काफी कम उम्र में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया। ये कहने का क्या तुक बनता है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो ये जतलाना चाहते हैं कि वो कुलदीप नैयर जैसे बाकी पत्रकारों की तुलना में श्रेष्ठ हैं। आप सब भी चंदन मित्रा के उस विदाई भाषण को एक बार पढ़ें।

&quot;Mr. Chairman, Sir, first and foremost, may I express my deep sense of gratitude to you, and through you, the Deputy Chairman, and all the Members of this House, especially the Leader of the House, the hon. Prime Minister, the Leader of the Opposition and Leaders of every political party from across the spectrum, for the enormous cooperation and support that I received during my six years in this House!

Sir, I came here from above, I mean, from the Press Gallery there. I used to be there, taking down notes of proceedings. &lt;strong&gt;Then, I was deeply honoured when the former President of India, on the advice of the former Prime Minister, nominated me to the House. That time, many people told me that it was very unusual that a person without grey hair was coming in the nominated category. &lt;/strong&gt;Sir, my beard, has, of course, greyed over the time. This is not anything meant to all my colleagues and friends who have grey hair; some day I will also get it. But, I must thank, particularly the former President, Dr. A.P.J. Abdul Kalam for having nominated me at a much younger age than my predecessors.&quot;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चंदन मित्रा के लेख में बहुत अहंकार नज़र आता है। उन्होंने न केवल अपने लेख में बल्कि संसद में दिए अपने भाषण में भी इस अहंकार को जाहिर किया। उन्होंने सभी सांसदों के बीच कहा कि उन्हें बाकी पत्रकारों की तुलना में काफी कम उम्र में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया। ये कहने का क्या तुक बनता है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो ये जतलाना चाहते हैं कि वो कुलदीप नैयर जैसे बाकी पत्रकारों की तुलना में श्रेष्ठ हैं। आप सब भी चंदन मित्रा के उस विदाई भाषण को एक बार पढ़ें।</p>
<p>&#8220;Mr. Chairman, Sir, first and foremost, may I express my deep sense of gratitude to you, and through you, the Deputy Chairman, and all the Members of this House, especially the Leader of the House, the hon. Prime Minister, the Leader of the Opposition and Leaders of every political party from across the spectrum, for the enormous cooperation and support that I received during my six years in this House!</p>
<p>Sir, I came here from above, I mean, from the Press Gallery there. I used to be there, taking down notes of proceedings. <strong>Then, I was deeply honoured when the former President of India, on the advice of the former Prime Minister, nominated me to the House. That time, many people told me that it was very unusual that a person without grey hair was coming in the nominated category. </strong>Sir, my beard, has, of course, greyed over the time. This is not anything meant to all my colleagues and friends who have grey hair; some day I will also get it. But, I must thank, particularly the former President, Dr. A.P.J. Abdul Kalam for having nominated me at a much younger age than my predecessors.&#8221;</p>
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		<title>By: राजेश पांडे</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/15/race-for-rajya-sabha/comment-page-1/#comment-1094</link>
		<dc:creator>राजेश पांडे</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Aug 2009 18:06:30 +0000</pubDate>
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		<description>अरविंद जी,
आपका लेख इस पूरे मामले को नए नज़रिए से देखने के लिए मजबूर कर रहा है। ये बात बिल्कुल सही है कि जिसके बाद जो हथियार है उसी का इस्तेमाल सत्ता हथियाने के लिए कर रहा है। किसी के पास पैसा है, किसी के पास ताकत और किसी के पास कलम। फिर उन तीनों में अंतर क्यों? इस बेहतरीन लेख के लिए साधुवाद।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरविंद जी,<br />
आपका लेख इस पूरे मामले को नए नज़रिए से देखने के लिए मजबूर कर रहा है। ये बात बिल्कुल सही है कि जिसके बाद जो हथियार है उसी का इस्तेमाल सत्ता हथियाने के लिए कर रहा है। किसी के पास पैसा है, किसी के पास ताकत और किसी के पास कलम। फिर उन तीनों में अंतर क्यों? इस बेहतरीन लेख के लिए साधुवाद।</p>
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