न्यूज़ चैनलों और अख़बारों के संपादकों के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद और सूचना एंव प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बैठक की। बैठक में सरकार ने स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा दिया। साथ ही ये भी बताया कि इस बीमारी से लड़ने के लिए नए दिशानिर्देश अगले एक-दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में गुलाम नबी आज़ाद ने स्वाइन फ्लू पर मीडिया के रवैये को लेकर शिकायत की। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू पर वो तीन बार संसद में अपनी बात कह चुके थे, लेकिन मीडिया ने ये ख़बर तब तक नहीं उठाई जब तक कि एक शख़्स की मौत नहीं हो गई। हालांकि उनकी इस बात से कई संपादक सहमत नहीं थे। उनके मुताबिक सरकार भी एक शख़्स की मौत और मीडिया के हंगामे के बाद ही हरकत में आई है।
दरअसल, स्वाइन फ्लू के कवरेज को लेकर मीडिया और सरकार के बीच कुछ मतभेद उभर आए हैं। सरकार का मानना है कि मीडिया डर का माहौल पैदा कर रहा है। जबकि मीडिया के मुताबिक सरकार की लापरवाही से स्थिति बिगड़ी है। इससे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज़ चैनलों से जिम्मेदार तरीके से रिपोर्टिंग करने की अपील की थी। सूत्रों के मुताबिक सरकार और मीडिया के बीच उभरे इस मतभेद को पाटने के लिए प्रधानमंत्री की सलाह पर ये बैठक बुलाई गई थी।
शास्त्री भवन में सोमवार को हुई ये बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। एनडीटीवी की तरफ़ से पंकज पचौरी, संजय अहिरवाल और मनिका रायकवार, आज तक से कमर वहीद नकवी, स्टार से शाजी जमा, इंडिया टीवी से रजत शर्मा और विनोद कापरी, ज़ी न्यूज़ से सतीश कुमार सिंह, आईबीएन 7 के आशुतोष और इंडिया न्यूज़ से हरीश गुप्ता मौजूद रहे। इनके अलावा प्रिंट से मृणाल पांडे समेत कई बड़े संपादकों ने बैठक में हिस्सा लिया।
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