सहारा के लोग अब बेसहारा हो रहे हैं। उन्हें बेसहारा कोई और नहीं बल्कि उनकी ही कंपनी कर रही है। ताज़ा ख़बर के मुताबिक मंगलवार को 48 रिपोर्टरों, कैमरामैनों और टेक्नीशियनों से मैनेजमेंट ने इस्तीफ़ा मांगा। ज़्यादातर कर्मचारियों ने मैनेजमेंट के इस आदेश को मानने से इनकार किया जिसके बाद बात इतनी बढ़ी कि रात आठ बजे उन सभी को गेस्टहाउस खाली करने का हुक्म दे दिया गया।
नाम नहीं छापने की शर्त पर सहारा के एक कर्मचारी ने इस पूरे मामले का ब्योरा दिया। बताया कि मैनेजमेंट ने उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के स्टाफ रिपोर्टरों और कैमरामैनों को एक बैठक के लिए दिल्ली आने का न्योता दिया। दिल्ली पहुंचने पर उन सभी से कहा गया कि वो तीन महीने की बेसिक तनख्वाह लेकर नौकरी छोड़ दें। सभी 48 कर्मचारी पांच-छह साल से सहारा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि तीन महीने की बेसिक का क्या मतलब? इससे तो इतने पैसे भी नहीं मिलेंगे जिनसे महंगाई के इस दौर में कोई दो महीने भी गुजारा कर सके।
क्या आपको घनश्याम केवट याद है? इसी साल 18 जून को ये खूंखार डकैत चित्रकूट में मारा गया। तब टेलीविजन स्क्रीन पर एक तस्वीर दिखाई जा रही थी। उस तस्वीर में घनश्याम केवट एक छत से कूद कर भाग रहा था। सहारा समय के जांबाज रिपोर्टर सुशील कुमार तिवारी और कैमरामैन अरविंद द्विवेदी ने घनश्याम के भागने की तस्वीरों को कैमरे में कैद किया था। उसके लिए वो दोनों फायरिंग के बीच बचते बचाते उस मकान में दाखिल हुए थे जहां से छुप कर धनश्याम केवट पुलिस का मुकाबला कर रहा था। उस दिन ज़्यादातर चैनलों पर सुशील कुमार तिवारी और अरविंद द्विवेदी की खींची तस्वीरें ही नज़र आ रही थीं। इस बहादुरी के लिए उन्हें कोई इनाम देना तो दूर, छंटनी की लिस्ट में उनका नाम शामिल है।
गौरतलब है कि सहारा में कर्मचारियों की तनख्वाह मीडिया से जुड़ी दूसरी बड़ी कंपनियों के मुकाबले काफी कम होती है। कर्मचारियों ने ये भी कहा कि इस तरह बेइज्जत करने से तो बेहतर होता कि कंपनी कोई मुआवजा नहीं देती। लेकिन मैनेजमेंट कर्मचारियों की बात पर गौर करने को तैयार नहीं हुआ। जिसके बाद कर्मचारियों ने सीईओ सुमित राय से मुलाकात का समय मांगा। सीईओ ने भी मिलने से मना कर दिया। मैनेजमेंट और सीईओ के दबाव में कुछ कर्मचारियों ने इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन ज़्यादातर इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए गेस्टहाउस लौट गए।
सूत्रों के मुताबिक उन सभी कर्मचारियों को दो दिन की बैठक के नाम पर नोएडा बुलाया गया था। लिहाजा गेस्टहाउस 18 और 19 अगस्त के लिए बुक था। लेकिन मैनेजमेंट ने कर्मचारियों को तुरंत गेस्टहाउस खाली करने का हुक्म दिया। रात आठ बजे तक सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया। एक पराए शहर में वो सभी अचानक सड़क पर आ गए। जिस संस्थान के लिए उन्होंने दिन रात पसीना बहाया उसी संस्थान ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।
आपको फूलन देवी भी याद होंगी। फूलन देवी की हत्या 25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा ने दिल्ली में की थी। पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने से थोड़ी दूरी पर। इस हत्याकांड ने सबको सकते में डाल दिया। उसके कुछ समय बाद शेर सिंह राणा ने देहरादून में आत्मसमर्पण किया और 2004 में वो तिहाड़ जेल से फ़रार हो गया। वो करीब दो साल तक पुलिस के चंगुल से आज़ाद घूमता रहा। जिस समय पुलिस को उसका सुराग नहीं मिल रहा था, उस समय सहारा के एक रिपोर्टर रत्नेश राय ने उसका इंटरव्यू किया था। वो इंटरव्यू ज्यादातर चैनलों में दिखाया गया और अख़बारों में भी उसकी चर्चा हुई। रत्नेश राय भी उन कर्मचारियों में शामिल हैं जिनसे इस्तीफ़ा देने को कहा गया है।
ख़बरों के मुताबिक अब तक अस्सी स्टाफ रिपोर्टरों और दूसरे कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का हुक्म दिया जा चुका है। उनमें से कई नौकरी छोड़ कर जा चुके हैं। लेकिन ये तो शुरुआत है। अगले एक महीने के भीतर सहारा से करीब 200 से 250 लोगों की छंटनी होनी है। बताया जा रहा है कि अगली बैठक इसी महीने की 24 और 25 तारीख को है। इस छंटनी के लिए कंपनी मंदी को जिम्मेदार ठहरा रही है। लेकिन सूत्रों की माने तो मंदी सिर्फ एक बहाना है। असली वजह कुछ और है। कंपनी को बेचने की तैयारी है। बेचने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कर्मचारियों की फौज कुछ कम करनी है। ताकि खरीदारों को ये कहा जा सके कि सहारा समय पर कर्मचारियों का बोझ ज़्यादा नहीं है। लेकिन ऐसी किसी भी छंटनी की प्रक्रिया तो ऊपर से शुरू होनी चाहिए, फिर यहां पर क्यों निचले पायदान पर तैनात कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
सुशील कुमार तिवारी और रत्नेश राय जैसे ढेरों उदाहरण दिये जा सकते हैं। और इन उदाहरणों को पेश करने का मतलब सिर्फ़ एक ही संदेश देना है। वह यह कि आमतौर पर ऐसी छंटनी और कर्मचारियों के प्रदर्शन के बीच कोई रिश्ता नहीं होता है। साथ ही यह भी कि ऐसी छंटनी के दौरान कई बार कुछ शातिर लोग ईमानदार, मेहनती और काबिल कर्मचारियों को भी निपटा देते हैं।
सूत्रों की माने तो इसके पीछे एक बड़ा “खेल” है। इस “खेल” में सुमित राय का साथ दे रहे हैं राजेश कुमार और संजय मिश्र। एक बड़ी साज़िश के तहत निचले पायदान पर तैनात रिपोर्टरों और कैमरामैन को हटाया जा रहा है। आगरा, बनारस, इलाहाबाद जैसे शहरों से रिपोर्टर, कैमरामैन और टेक्नीशियन निकाले जा रहे हैं। वो भी एक ऐसे दौर में जब बाज़ार में नौकरी की भारी किल्लत है। यहां से हटाए जाने के बाद हो सकता है कि उन्हें कई महीनों तक नौकरी नहीं मिली या फिर कई साल तक।
आज सहारा के जिन कर्मचारियों पर रोजी-रोटी का ख़तरा है वो मैनेजमेंट से एक और सवाल पूछ रहे हैं कि क्या छंटनी और नियुक्ति एक साथ हो सकती है? अगर मंदी इतनी भारी है कि दो-ढाई सौ कर्मचारी हटाए जाने हैं तो फिर कुछ समय पहले एक शख़्स की नियुक्ति क्यों हुई? उसके पीछे मैनेजमेंट का क्या तर्क है?
Nitin Gupta
August 19, 2009 at 2:42 pm
Bahut galat kiya. Sab se kam liya munafa kamaya, ab agar ghata hi ho rha tha to salary kam kar dete. Aakhir nikala kyon? Yo sarasar manmani hai. Channel ki tanashahi hai. yhi reporter- camera man field me risk leker inhi channels ke liye khabar late he. Jab mandi aayi to bahar ke raste dikha diye. Yhi nahi Allahabad ki team me Sushil tewari reporter …jisne Chitrakoot me dadua dakait aur haal me hi hue ek aur Ghanshyam kewat dakait ka live encounter cover kiya tha. Guns firing me goliyan in logo ke sir ke uper se gujar rhi thi, phir bhi ye datey rhe. Kya yahi natija he is jaan hateli pe leker kaam ka?
sharm karo. Mandi ka bahana leker roti chinne wali company, kya hoga inke bare me kabhi socha hai? Kuch dino pahle yahi kaam Ndtv ne kiya tha aur ab ye hain.
Deepak Gambhir
August 19, 2009 at 5:03 pm
Ye baat sau partishat satya hain ki imandari ka yah natija mila ki..Allahabad mein mujhe bhi 5 saal ho gaye hain.is field mein .! Lekin sahara ka staff hamesha se hi accha kaam karta a raha hain..aur rahi baat chitrakoot wale exclusive visuals ki to woh Susheel ji aur arvind bhai ki mehnat ka nateeja hain ki undono ne jaan par khelkar un visuals ko apne camere mein kaid kiya..lekin aaj natija yeh ho raha hain to dhikkar hain aise sansthan par jo ek coverage mein to apko itna exposure de denge lekin dusri or apko demoralise karne se bhi nahi chukkte…Yeh sarasar galat hain jo bhi aisa kaam ho reaha hain..>!
Manavendra pratap singh
August 19, 2009 at 7:49 pm
sir..aapne ghanshyaam kewat encounter ka jikra kiya usme shusheel tiwari ji reporter ki haisiyat se gaye the aur unke sath unke cameraperson arvind dwivedi the jinhone ghanshyam ke bhagne ka shot record kiya tha lekin isme koi shaq nahi ki dono ne apni jaan khatre me daal kar report tayyar ki thi, unke sath aisa salook batata hai ki corporate jagat kitna beraham hai. yahan kisi wafadari aur emaandari ki koi keemat nahi yahan har cheej nafa -nuksaan ke paimane par hi tay hoti hai aisa lagta hai ab company ko apne karmachariyon ko nikaalne me hi koi fayda nazar aa raha hai..
ashish rai
August 19, 2009 at 9:32 pm
jantantra waaley bhai sahab …aap ney jo likha hai wah wakai satya hai…par mai ek baat aap sey kahna chahu ga….ki ghanshyam kewat ki footage susil tiwari ji ney nahi balki un key cameraman arvind ney keechi thi,,,
समरेंद्र
August 19, 2009 at 10:16 pm
दीपक जी, नामवेंद्र जी और आशीष जी,
आप लोगों की बात के बाद हमने इस बारे में जानकारी ली। आपकी बात सही है। सहारा के सूत्रों ने बताया है कि घनश्याम केवट की एक्सक्लूसिव तस्वीरें लेने में अरविंद और सुशील कुमार तिवारी दोनों लोगों का योगदान है। हमारा मकसद किसी की कामयाबी को कम करना नहीं है। हमने स्टोरी में सुशील कुमार तिवारी के साथ अरविंद का नाम भी जोड़ दिया है। ये जानकारी देने के लिए आप सभी का शुक्रिया।
tanha patrakaar
August 20, 2009 at 12:14 pm
mandi ke naam par chainal ke liye apnaa sab kuchh daanv par lagane wale nichale aur majhole patrakaron ko nipatane ki sazish kuchh bade log karte hain….ratnesh ne sirf sher singh rana ka hi nahi balki do din jungalon ki khaak jhaan ke khatre me daal ke badi mushkil ke baad 100 naxali ke saath 2 din bitaa kar ….naxali comander kameshwar baithaa ka bhi exclusive intervive kiyaa thaa…jisse sahara ne khoob bhunayaa thaa…bade log apni peeth thapthapai thi ki ye sab unake manegment ki vazeh se huwaa….aise hi sher singh rana ke intervive ke waqt bhi chainel ne khoob naam kamayaa…..us waqt ratnesh ke pass kai chanel ka offer the lekin unhone sahara ko nahi chhodaa…..par afsos aaj wahi chanel unhe bahar jaane ko kah raha hai……ye kaisaa insaaf hai….aur agar aisaa hotaa hai to kyaa bhavishyaa me patrakaar chanel ke prati imandaar rah payenge…aur agar wo imandaar nahi rah paate….to unhe aisi bewafaai ke raste par dalane ka kaun zimmedar hogaa……..jaraa sochiye…ye ek bada sawaal hai………….
anil kumar
August 20, 2009 at 3:26 pm
सहारा के कर्मचारियों को निकालने और विद्रोही तेवर अपनाने की खबर से सहारा के कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। यहां कार्यरत कर्चारियों को उम्मीद है कि अब तक परिवार के नाम पर हो रहे शोषण से उन्हें मुक्ति मिलेगी और संस्था में यूनियन बनाया जा सकेगा। यहां के कर्मचारियों में अंदर-अंदर बगावत फैलने लगी है। लोग यूनियन बनाने की बात करने लगे है। हमें उम्मीद है कि ये खबर प्रकाशित आप प्रकाशित करेंगे।
anil kumar
tanha patrakaar
August 20, 2009 at 4:23 pm
badaa achha lagaa ye path kar ki sahara ke mukhiyaa ne mehnat kash patrakaron ki baat suni aur mainegment ke faisale ko badal diyaa…..sahara pariwar apne pariwar ke sadsyon ke prati samvedana ke liye jana jataa rahaa hai…jise ek baar feer parwaair ke mukhiyaa ne sidh kiyaa…isase ye bhi pataa chaltaa hai ki ye sab kaarwai binaa unaki jaankari ke ho rahi thi…ho saktaa hai ki malikano ne kharch kam karne ka sujhaav mangaa ho ….jisake natije me company me ho rahe falatu kharch par lagam lagane ke bajaay…..in logon ne un patrakaron ko hi bahar ka rastaa dikhaane ki sazish rach di….jinake dam par chainel chal rahaa hai…….
raaj
August 20, 2009 at 4:26 pm
sahara ke shoshit patrakaron ke haq me jantantra ka is tarah khadaa honaa …aur patrakaron ke kaam ko dhyaan me lanaa bahut achha lagaa……aap aise hi lage rahiye gareeb patrakaron ke haq me……ham sab ki duwaa aap ke saath hai…..
Sanjay Chintamani
October 9, 2009 at 1:04 pm
Sahara TV ki engineering team kaafee dukhi hai kabhi bhi dhadas toot sakta hai.
Ho sakta hai Sahara TV ki technical team strenght kam ho sakti hai .
Sahara ki technical team ki financial halat theek nahin hai;
agar Sahara TV ki technical team tooti to fir dubara khada karna mushkil saabit hoga kyuon ki bahar se Sahara main nahin aana chahtey .
Sahara ke Management ko yeh baat nazar andaaz nahin karni chahiye’