सहारा से हटाए जा रहे कर्मचारी अब लंबी लड़ाई लड़ने का मन बना रहे हैं। करीब 30-35 कर्मचारियों का एक दल आज लखनऊ गया है। इन कर्मचारियों की कोशिश सहारा के मालिक सुब्रत राय से मुलाकात करने की है। अगर उनसे भेंट नहीं हुई या फिर भेंट होने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो ये कर्मचारी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती से मिलने की कोशिश करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे लेकिन इस्तीफ़ा नहीं देंगे।
कर्मचारी मंदी की दलील को हजम करने को तैयार नहीं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने कहा कि अगर मंदी का असर इतना ही अधिक है तो फिर छंटनी ऊपर से क्यों नहीं शुरू की जा रही। निकाले गए सभी कर्मचारियों की औसत तनख्वाह बीस हज़ार रुपये प्रति माह के करीब है। जबकि सहारा में एक-एक लाख रुपये से ज़्यादा तनख्वाह पाने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है।
हटाए जा रहे कर्मचारियों का यह भी कहना है कि अभी तीन महीने पहले कंपनी के सीईओ के लिए दो बड़ी गाड़ियां आई हैं जिनमें से एक मर्सडीज है और सारे चैनल हेड्स को नई गाड़ियां दी गई हैं। स्विफ्ट डिजायर। साथ ही लेटेस्ट ब्लैकबेरी फोन भी। ये वो खर्चा है जिससे हटाए जा रहे सभी 48 कर्मचारियों को साल भर तक तनख्वाह दी जा सकती थी। लेकिन तब मैनेजमेंट को मंदी का ख्याल नहीं आया। कर्मचारियों का आरोप है कि मैनेजमेंट और सहारा के चंद लोग कंपनी को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
इन कर्मचारियों के बागी तेवर को देखते हुए अब सहारा मैनेजमेंट बचाव की मुद्रा में आ गया है। बीस तारीख को स्ट्रिंगर्स के साथ होने वाली बैठक टाल दी गई है। उत्तर प्रदेश के सभी स्ट्रिंगर्स के साथ लखनऊ में बैठक होनी थी। उसके लिए फोन किए जा चुके थे, लेकिन अब उन्हें लखनऊ पहुंचने से मना किया जा रहा है।
Nitin Gupta
August 19, 2009 at 3:58 pm
me to ye kahta hu ki agar channel walo ko inta mandi sata rhi he to pure india ke stringers ko hata de, ya fir sabhi channel ke stringers or staff sirf ek din kam na kare…ya sirf india ke sabhi channels ke stringers hi sirf ek din koi khabar channels ko na de to kya hoga?????????….kyo? kya hoga, mandi ki bat kare to ek din ka staff ki salary cut kr le….kafi fayeda hoga, stringers ki salary hoti nahi he…..dusra sabse majbut pahlu ye ki channel ko apni asaliyat ka pata chal jayega………jo ye no.1–ka dawa karte sab hawa nikal jayegi….ek tarah se yeh kah sakte he insaniyat ka gala ghot rahe he ye sab.
Joy
September 5, 2009 at 12:50 pm
एक सिरे से सबसे इस्तीफा न मांग कर…चैनल के अंदर उन बड़े हाथियों की खोज की जानी चहिए…जो हर महिने मोटे रकम एटते तो हैं ही साथ में किसी प्रकार की कोई काम नही करते…पहले इन्हें हटाए… पुराने लोगो में ही ये लोग शामिल हैं…जो अब अपने आप को सहारा के खास मानते तो है ही और दुसरो पर भी ये रोप दिखाने की कोशिश कर काम से बचते हैं…क्योकि इन्हें काम नहीं आता…
दुसरा कम और नये और तजुर्वेकार पुराने लोगो की खोज कर उन्हें चैनल की जिम्मेदारी दी जाएं…ना की दुसरे चैनल से बड़े रकम में चैनल हेड या लोग ढूड़ लाए…तभी सहारा में सब ठिक होगा…आज देश के सभी शीर्ष चैनल भले वो अंग्रेजी हो या फिर हिंदी सभी में 70 प्रतिशत सहारा के लोग हैं… इसलिए लकनऊ को गौर करना चहिए कि हिरे अपने अंदर ही हैं…उन्हें ढूड़ कर मौका दिया जाना चहिए… नहीं तो क्या हैं बाहर से अच्छे ऑफर मिलते ही ये भी उड़न छू हो जायेंगे…और नुकसान सहारा को ही होगा…जो हो रहा हैं…