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	<title>Comments on: हर चीज को जाति के चश्मे से मत देखिए प्रभाष जी</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: ashutosh</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1773</link>
		<dc:creator>ashutosh</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2009 04:48:55 +0000</pubDate>
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		<description>शम्भूनाथजी, बड़ी लम्बी लिस्ट दी है आपने परन्तु ब्राहमणों की लिस्ट और बड़ी निकलेगी. फिलहाल इतना ही देख लीजिये की बड़े बड़े सभी की पदों पर ब्राह्मण तैनात थे जैसे कि प्रभात खबर में राजपूत हैं. जनसत्ता के प्रधान सम्पादक प्रभाष जोशी और दिल्ली से बाहर के शेष सभी संस्करणों के संपादक सभी ब्राह्मण_ मुंबई में राहुल देव, चंडीगढ़ में ओम थानवी, कोलकाता में श्याम आचार्य. और देखो_ सहायक संपादक जवाहरलाल कोल, सतीश झा, हरी शंकर व्यास, राजेन्द्र घोड्पकर, मैगजीन हैड मंगलेश डबराल, उनके साथ रवीन्द्र त्रिपाठी व पारुल शर्मा, समाचार संपादक ए एन मिश्र, उनके नीचे शिरीष मिश्र (बाद में समाचार संपादक) एवं एस पी त्रिपाठी (बाद में प्रोडक्शन एडिटर), उप समाचार सम्पादक शम्भुनाथ शुक्ला, अभय कुमार दुबे, मुख्य संवाददाता सुमंत मिश्र ( अब मनोज मिश्र)....आलोक तोमर जैसे दो-चार चमचों को मत्त्वपूर्ण पद दे देने से कुछ साबित नहीं होगा. की पदों पर सब जगह ब्राह्मण रखे गए शुक्लाजी अब जो सूची बनाते रहे. वे तो बनायेंगे ही.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शम्भूनाथजी, बड़ी लम्बी लिस्ट दी है आपने परन्तु ब्राहमणों की लिस्ट और बड़ी निकलेगी. फिलहाल इतना ही देख लीजिये की बड़े बड़े सभी की पदों पर ब्राह्मण तैनात थे जैसे कि प्रभात खबर में राजपूत हैं. जनसत्ता के प्रधान सम्पादक प्रभाष जोशी और दिल्ली से बाहर के शेष सभी संस्करणों के संपादक सभी ब्राह्मण_ मुंबई में राहुल देव, चंडीगढ़ में ओम थानवी, कोलकाता में श्याम आचार्य. और देखो_ सहायक संपादक जवाहरलाल कोल, सतीश झा, हरी शंकर व्यास, राजेन्द्र घोड्पकर, मैगजीन हैड मंगलेश डबराल, उनके साथ रवीन्द्र त्रिपाठी व पारुल शर्मा, समाचार संपादक ए एन मिश्र, उनके नीचे शिरीष मिश्र (बाद में समाचार संपादक) एवं एस पी त्रिपाठी (बाद में प्रोडक्शन एडिटर), उप समाचार सम्पादक शम्भुनाथ शुक्ला, अभय कुमार दुबे, मुख्य संवाददाता सुमंत मिश्र ( अब मनोज मिश्र)&#8230;.आलोक तोमर जैसे दो-चार चमचों को मत्त्वपूर्ण पद दे देने से कुछ साबित नहीं होगा. की पदों पर सब जगह ब्राह्मण रखे गए शुक्लाजी अब जो सूची बनाते रहे. वे तो बनायेंगे ही.</p>
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		<title>By: premranjan</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1772</link>
		<dc:creator>premranjan</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2009 06:57:09 +0000</pubDate>
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		<description>“सिलिकॉन वैली अमेरिका में नहीं होता, अगर दक्षिण भारत में आरक्षण नहीं लगा होता. दक्षिण के आरक्षण के कारण जितने भी ब्राह्मण लोग थे, ऊंची जातियों के, वो अमरीका गये और आज सिलिकॉन वेली की हर आईटी कंपनी का या तो प्रेसिडेंट इंडियन है या चेयरमेन इंडियन है या वाइस चेयरमेन इंडियन है या सेक्रेटरी इंडियन है. क्यों ? क्योंकि ब्राह्मण अपनी ट्रेनिंग से अवव्यक्त चीजों को हैंडल करना बेहतर जानता है. क्योंकि वह ब्रह्म से संवाद कर रहा है. तो जो वायवीय चीजें होती हैं, जो स्थूल, सामने शारीरिक रूप में नहीं खड़ी है, जो अमूर्तन में काम करते हैं, जो आकाश में काम करते हैं. यानी चीजों को इमेजीन करके काम करते हैं. सामने जो उपस्थित है, वो नहीं करते. ब्राह्मणों की बचपन से ट्रेनिंग वही है, इसलिए वो अव्यक्त चीजों को, अभौतिक चीजों को, अयथार्थ चीजों को यथार्थ करने की कूव्वत रखते है, कौशल रखते हैं. इसलिए आईटी वहां इतना सफल हुआ. आईटी में वो इतने सफल हुए.”


जिताने के लिए आप को ऐसा आदमी चाहिए, जो लंगर डालकर खड़ा हो जाये और आखिर तक उसको ले जा सके यानी धारण शक्ति वाला. अब धारण शक्ति उन लोगों में होती है, जो शुरू से जो धारण करने की प्रवृत्ति के कारण आगे बढ़ते है. अब आप देखो अपने समाज में, अपनी राजनीति में. अपने यहां सबसे अच्छे राजनेता कौन है ? आप देखोगे जवाहरलाल नेहरू ब्राह्मण, इंदिरा गांधी ब्राह्मण, अटल बिहारी वाजपेयी ब्राह्मण, नरसिंह राव ब्राह्मण, राजीव गांधी ब्राह्मण (पिता का नाम फिरोज गांधी हुआ तो क्या हुआ-चार्वाक सत्य). क्यों ? ”

“क्रिकेट में भी आप देखेंगे, सभी क्रिकेटरों का एनॉलिसिस करके देखेंगे तो आप पाएंगे कि सबसे ज्यादा सस्टेन करने वाले, सबसे ज्यादा टिके रहने वाले कौन खिलाड़ी हैं ? सुनील गावस्कर सारस्वत ब्राह्मण, सचिन तेंदुलकर सारस्वत ब्राह्मण. ”

“अब ये विनोद कांबली… कांबली गाड़ी साफ करने वाले क्लीनर का बेटा है. वो अपने यहां विकेट कीपर था, वो किसका बेटा था? ढोली का. अभी भी उसके पिता हरियाणा में कहीं ढोल बजाते हैं. यह सब बहुत ही साधारण, बहुत ही साधारण परिवारों से आए हुए लोग हैं.”

मैं ब्राह्मण के उस कौशल की बात कर रहा हूं. वो सिलिकान वैली में, आईटी में जाकर सफल हुए, यहां सफल नहीं होते थे. क्योंकि आईटी में आपको जो अमूर्त है, उसको मूर्त करने की कला आनी चाहिए. क्योंकि ब्राह्मण का काम वही है. वो उससे पैदा हुआ है. मैं परंपरा से विभिन्न जातियों के काम के दौरान विकसित हुई कुशलता की बात कर रहा हूं.”

“मैं यह मानता हूं कि सती प्रथा के प्रति जो कानूनी रवैया है, वो अंग्रेजों का चलाया हुआ है. अपने यहां सती पति की चिता पर जल के मरने को कभी नहीं माना गया. सबसे बड़ी सती कौन है आपके यहां ? सीता. सीता आदमी के लिए मरी नहीं. दूसरी सबसे बड़ी कौन है आपके यहां ? पार्वती. वो खुद जल गई लेकिन पति का जो गौरव है, सम्मान है वो बनाने के लिए. उसके लिए. सावित्री. सावित्री सबसे बड़ी सती मानी जाती है. सावित्री वो है, जिसने अपने पति को जिंदा किया, मृत पति को जिंदा किया. सती अपनी परंपरा में सत्व से जुड़ी हुई चीज है. मेरा सत्व, मेरा निजत्व जो है, उसका मैं एसर्ट करूं. अब वो अगर पतित होकर… बंगाल में जवान लड़कियों की क्योंकि आदमी कम होते थे, लड़कियां ज्यादा होती थीं, इसलिए ब्याह देने की परंपरा हुई. इसलिए कि वो रहेगी तो बंटवारा होगा संपत्ति में. इसलिए वह घर में रहे. जाट लोग तो चादर डाल देते हैं, घर से जाने नहीं देते. अपने यहां कुछ जगहों पर उसको सती कर देते हैं. आप अपने देश की एक प्रथा को, अपने देश की पंरपरा में देखेंगे या अंग्रेजों की नजर से देखेंगे, मेरा झगड़ा यह है. मेरा मूल झगड़ा ये है.”


-This is for you Mr. Shambhunath Shukla. This is the &quot;pavitra pravachana&quot; of your &quot;icon&quot; and &quot;non-castiest&quot; PJ...!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>“सिलिकॉन वैली अमेरिका में नहीं होता, अगर दक्षिण भारत में आरक्षण नहीं लगा होता. दक्षिण के आरक्षण के कारण जितने भी ब्राह्मण लोग थे, ऊंची जातियों के, वो अमरीका गये और आज सिलिकॉन वेली की हर आईटी कंपनी का या तो प्रेसिडेंट इंडियन है या चेयरमेन इंडियन है या वाइस चेयरमेन इंडियन है या सेक्रेटरी इंडियन है. क्यों ? क्योंकि ब्राह्मण अपनी ट्रेनिंग से अवव्यक्त चीजों को हैंडल करना बेहतर जानता है. क्योंकि वह ब्रह्म से संवाद कर रहा है. तो जो वायवीय चीजें होती हैं, जो स्थूल, सामने शारीरिक रूप में नहीं खड़ी है, जो अमूर्तन में काम करते हैं, जो आकाश में काम करते हैं. यानी चीजों को इमेजीन करके काम करते हैं. सामने जो उपस्थित है, वो नहीं करते. ब्राह्मणों की बचपन से ट्रेनिंग वही है, इसलिए वो अव्यक्त चीजों को, अभौतिक चीजों को, अयथार्थ चीजों को यथार्थ करने की कूव्वत रखते है, कौशल रखते हैं. इसलिए आईटी वहां इतना सफल हुआ. आईटी में वो इतने सफल हुए.”</p>
<p>जिताने के लिए आप को ऐसा आदमी चाहिए, जो लंगर डालकर खड़ा हो जाये और आखिर तक उसको ले जा सके यानी धारण शक्ति वाला. अब धारण शक्ति उन लोगों में होती है, जो शुरू से जो धारण करने की प्रवृत्ति के कारण आगे बढ़ते है. अब आप देखो अपने समाज में, अपनी राजनीति में. अपने यहां सबसे अच्छे राजनेता कौन है ? आप देखोगे जवाहरलाल नेहरू ब्राह्मण, इंदिरा गांधी ब्राह्मण, अटल बिहारी वाजपेयी ब्राह्मण, नरसिंह राव ब्राह्मण, राजीव गांधी ब्राह्मण (पिता का नाम फिरोज गांधी हुआ तो क्या हुआ-चार्वाक सत्य). क्यों ? ”</p>
<p>“क्रिकेट में भी आप देखेंगे, सभी क्रिकेटरों का एनॉलिसिस करके देखेंगे तो आप पाएंगे कि सबसे ज्यादा सस्टेन करने वाले, सबसे ज्यादा टिके रहने वाले कौन खिलाड़ी हैं ? सुनील गावस्कर सारस्वत ब्राह्मण, सचिन तेंदुलकर सारस्वत ब्राह्मण. ”</p>
<p>“अब ये विनोद कांबली… कांबली गाड़ी साफ करने वाले क्लीनर का बेटा है. वो अपने यहां विकेट कीपर था, वो किसका बेटा था? ढोली का. अभी भी उसके पिता हरियाणा में कहीं ढोल बजाते हैं. यह सब बहुत ही साधारण, बहुत ही साधारण परिवारों से आए हुए लोग हैं.”</p>
<p>मैं ब्राह्मण के उस कौशल की बात कर रहा हूं. वो सिलिकान वैली में, आईटी में जाकर सफल हुए, यहां सफल नहीं होते थे. क्योंकि आईटी में आपको जो अमूर्त है, उसको मूर्त करने की कला आनी चाहिए. क्योंकि ब्राह्मण का काम वही है. वो उससे पैदा हुआ है. मैं परंपरा से विभिन्न जातियों के काम के दौरान विकसित हुई कुशलता की बात कर रहा हूं.”</p>
<p>“मैं यह मानता हूं कि सती प्रथा के प्रति जो कानूनी रवैया है, वो अंग्रेजों का चलाया हुआ है. अपने यहां सती पति की चिता पर जल के मरने को कभी नहीं माना गया. सबसे बड़ी सती कौन है आपके यहां ? सीता. सीता आदमी के लिए मरी नहीं. दूसरी सबसे बड़ी कौन है आपके यहां ? पार्वती. वो खुद जल गई लेकिन पति का जो गौरव है, सम्मान है वो बनाने के लिए. उसके लिए. सावित्री. सावित्री सबसे बड़ी सती मानी जाती है. सावित्री वो है, जिसने अपने पति को जिंदा किया, मृत पति को जिंदा किया. सती अपनी परंपरा में सत्व से जुड़ी हुई चीज है. मेरा सत्व, मेरा निजत्व जो है, उसका मैं एसर्ट करूं. अब वो अगर पतित होकर… बंगाल में जवान लड़कियों की क्योंकि आदमी कम होते थे, लड़कियां ज्यादा होती थीं, इसलिए ब्याह देने की परंपरा हुई. इसलिए कि वो रहेगी तो बंटवारा होगा संपत्ति में. इसलिए वह घर में रहे. जाट लोग तो चादर डाल देते हैं, घर से जाने नहीं देते. अपने यहां कुछ जगहों पर उसको सती कर देते हैं. आप अपने देश की एक प्रथा को, अपने देश की पंरपरा में देखेंगे या अंग्रेजों की नजर से देखेंगे, मेरा झगड़ा यह है. मेरा मूल झगड़ा ये है.”</p>
<p>-This is for you Mr. Shambhunath Shukla. This is the &#8220;pavitra pravachana&#8221; of your &#8220;icon&#8221; and &#8220;non-castiest&#8221; PJ&#8230;!</p>
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		<title>By: Shambhunath Shukla</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1771</link>
		<dc:creator>Shambhunath Shukla</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2009 14:13:24 +0000</pubDate>
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		<description>i am sorry mr. charvak satya but in 80s non brahimans didnt prefer this job, b&#039;coz that time they prefers govt. services, business &amp; teaching job only few non brahimans (specially gair savarn people)liked to join journolism. remember before coming electronic media we journolist were very low paid worker. i had joined jansatta as full fledged sub editor with three increments but was getting only 1463/- only. so many people not prefer to joined this job</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>i am sorry mr. charvak satya but in 80s non brahimans didnt prefer this job, b&#8217;coz that time they prefers govt. services, business &amp; teaching job only few non brahimans (specially gair savarn people)liked to join journolism. remember before coming electronic media we journolist were very low paid worker. i had joined jansatta as full fledged sub editor with three increments but was getting only 1463/- only. so many people not prefer to joined this job</p>
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		<title>By: चार्वाक सत्य</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1770</link>
		<dc:creator>चार्वाक सत्य</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2009 14:24:46 +0000</pubDate>
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		<description>one woman journalist!!! great! I am still in search of a dalit/muslim journalist in the dream team of PJ. What was the percentage of non upper caste journalists in that team. Uncomfortable questions? is not it? You have named a few non brahmins, but almost all of them are upper caste. I am still trying to know the PJ.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>one woman journalist!!! great! I am still in search of a dalit/muslim journalist in the dream team of PJ. What was the percentage of non upper caste journalists in that team. Uncomfortable questions? is not it? You have named a few non brahmins, but almost all of them are upper caste. I am still trying to know the PJ.</p>
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		<title>By: Shambhunath Shukla</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1769</link>
		<dc:creator>Shambhunath Shukla</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2009 13:26:03 +0000</pubDate>
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		<description>I was associated with Prabhashji&#039;s 1st team. Prabhashji never been castiest. in his 1st team there were many brahimans but they get job by their ability &amp; skill. though many non brahimans journolist were also got the job like Banwari, RB Ray,
Alok Tomar, Mahadev Chauhan, Rakesh Koharwal, AL Prajapati, Chamanlal, JP Shahi, Riazuddin Sheikh, Surendra Kishore, AP Singh, BS Giri, Ashok Kumar, one female jourlist was also appointed Parul Sharma. How can you PJ was castiest? First know PJ well and then comment.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>I was associated with Prabhashji&#8217;s 1st team. Prabhashji never been castiest. in his 1st team there were many brahimans but they get job by their ability &amp; skill. though many non brahimans journolist were also got the job like Banwari, RB Ray,<br />
Alok Tomar, Mahadev Chauhan, Rakesh Koharwal, AL Prajapati, Chamanlal, JP Shahi, Riazuddin Sheikh, Surendra Kishore, AP Singh, BS Giri, Ashok Kumar, one female jourlist was also appointed Parul Sharma. How can you PJ was castiest? First know PJ well and then comment.</p>
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	<item>
		<title>By: भारत अनजान</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1768</link>
		<dc:creator>भारत अनजान</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2009 23:55:43 +0000</pubDate>
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		<description>प्रभाषजी की इज़्ज़त करता हूं (था) और क्रिकेट का रसिया हूं, इसलिए लेख को बड़ी तन्मयता से पढ़ा. मैं समरेंद्रजी की बातों से सहमत हूं. लेकिन प्रभाषजी से ऐसी उम्मीद वाक़ई नहीं थी. किसी दिन बाबा साहेब अंबेडकर, मार्टिन लूथर किंग और गांधीजी (जो प्रभाषजी की भाषा में कहें तो ब्राह्मण नहीं थे) पर भी प्रभाषजी कुछ लिख दें तो अच्छा रहेगा. उनके विचार जानने को मिलेंगे. वैसे गांधीजी के हत्यारे (ब्राह्मण नाथूराम गोडसे)के बारे में उनका क्या विचार हैं, यह भी जान लिया जाए तो अच्छा होगा. अब समझ में आया कि दरअसल नेताओं से कहीं ज़्यादा क़लम के ठेकेदारों में जाति की भावना भरी पड़ी है, जो दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. वैसे रविवार में दिए साक्षात्कार में प्रभाषजी यह भी कह गए हैं कि शिव सैनिकों ने बाबरी मस्जिद गिरने से पहले क्रिकेट पिच खोदी. भई, ये तो अभी अभी की बातें हैं.. बाबरी मस्जिद 1992 में ढही, जबकि दिल्ली का कोटला ग्राउंड 1999 में खोदा गया, जब वहां पाकिस्तान को खेलना था. तो थोड़ा तथ्यों का भी ध्यान रख लेते प्रभाषजी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रभाषजी की इज़्ज़त करता हूं (था) और क्रिकेट का रसिया हूं, इसलिए लेख को बड़ी तन्मयता से पढ़ा. मैं समरेंद्रजी की बातों से सहमत हूं. लेकिन प्रभाषजी से ऐसी उम्मीद वाक़ई नहीं थी. किसी दिन बाबा साहेब अंबेडकर, मार्टिन लूथर किंग और गांधीजी (जो प्रभाषजी की भाषा में कहें तो ब्राह्मण नहीं थे) पर भी प्रभाषजी कुछ लिख दें तो अच्छा रहेगा. उनके विचार जानने को मिलेंगे. वैसे गांधीजी के हत्यारे (ब्राह्मण नाथूराम गोडसे)के बारे में उनका क्या विचार हैं, यह भी जान लिया जाए तो अच्छा होगा. अब समझ में आया कि दरअसल नेताओं से कहीं ज़्यादा क़लम के ठेकेदारों में जाति की भावना भरी पड़ी है, जो दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. वैसे रविवार में दिए साक्षात्कार में प्रभाषजी यह भी कह गए हैं कि शिव सैनिकों ने बाबरी मस्जिद गिरने से पहले क्रिकेट पिच खोदी. भई, ये तो अभी अभी की बातें हैं.. बाबरी मस्जिद 1992 में ढही, जबकि दिल्ली का कोटला ग्राउंड 1999 में खोदा गया, जब वहां पाकिस्तान को खेलना था. तो थोड़ा तथ्यों का भी ध्यान रख लेते प्रभाषजी.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: समरेंद्र</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1767</link>
		<dc:creator>समरेंद्र</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Aug 2009 16:29:28 +0000</pubDate>
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		<description>रत्नेश जी,

अगर आपको ऐसा लगा कि हम ब्राह्मणों को गाली दे रहे हैं तो ये गलत है। यकीन मानिए हमारा यह मकसद कतई नहीं। अगर हम ऐसा करने लगेंगे तो हम भी उन्हीं फासीवादी लोगों के बीच में खड़े होंगे जिनकी हम आलोचना कर रहे हैं। दरअसल यहां बहस उस प्रवृति को लेकर हो रही है जिसमें किसी को जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर श्रेष्ठ और छोटा साबित किया जाता है। यह प्रवृति बहुत ख़तरनाक होती है और इसके नतीजे बहुत ही घातक। इस सोच की आलोचना होनी ही चाहिए। इस वक़्त प्रभाष जी उसी सोच का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसलिए उनकी आलोचना हो रही है।

समरेंद्र</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रत्नेश जी,</p>
<p>अगर आपको ऐसा लगा कि हम ब्राह्मणों को गाली दे रहे हैं तो ये गलत है। यकीन मानिए हमारा यह मकसद कतई नहीं। अगर हम ऐसा करने लगेंगे तो हम भी उन्हीं फासीवादी लोगों के बीच में खड़े होंगे जिनकी हम आलोचना कर रहे हैं। दरअसल यहां बहस उस प्रवृति को लेकर हो रही है जिसमें किसी को जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर श्रेष्ठ और छोटा साबित किया जाता है। यह प्रवृति बहुत ख़तरनाक होती है और इसके नतीजे बहुत ही घातक। इस सोच की आलोचना होनी ही चाहिए। इस वक़्त प्रभाष जी उसी सोच का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसलिए उनकी आलोचना हो रही है।</p>
<p>समरेंद्र</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: ratnesh tripathi</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1766</link>
		<dc:creator>ratnesh tripathi</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Aug 2009 15:26:34 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=1907#comment-1766</guid>
		<description>भाई जी
सादर वन्दे!
आपका लेख, चिंता, समझदारी व विद्वान लोंगों की टिपण्णी बहुत ही अच्छी है किन्तु आप सभी एक बात का जबाब दे दें तो मुझे अति प्रशन्नता होगी कि कुछ लोगों के लेखों के आधार पर आप लोग पूरे ब्राह्मण  समाज को गाली दे देते हैं, क्या वे इस देश के अपराधी हैं? आप लोगों ने कितना इतिहास पढ़ा है ये मै नहीं जानता किन्तु मै भी इतिहास का छात्र हूँ इस लिए कह रहा हूँ, अपनी वैमनष्यता को किसी भी व्यक्ति को आधार न बनावें, उसकी गलती कि सजा उसी को दें, शायद मेरी नजर में ( जरुरी नहीं सभी इससे सहमत हों) विद्वता यही कहती है,
रत्नेश त्रिपाठी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाई जी<br />
सादर वन्दे!<br />
आपका लेख, चिंता, समझदारी व विद्वान लोंगों की टिपण्णी बहुत ही अच्छी है किन्तु आप सभी एक बात का जबाब दे दें तो मुझे अति प्रशन्नता होगी कि कुछ लोगों के लेखों के आधार पर आप लोग पूरे ब्राह्मण  समाज को गाली दे देते हैं, क्या वे इस देश के अपराधी हैं? आप लोगों ने कितना इतिहास पढ़ा है ये मै नहीं जानता किन्तु मै भी इतिहास का छात्र हूँ इस लिए कह रहा हूँ, अपनी वैमनष्यता को किसी भी व्यक्ति को आधार न बनावें, उसकी गलती कि सजा उसी को दें, शायद मेरी नजर में ( जरुरी नहीं सभी इससे सहमत हों) विद्वता यही कहती है,<br />
रत्नेश त्रिपाठी</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: संजय ग्रोवर</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1765</link>
		<dc:creator>संजय ग्रोवर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Aug 2009 12:08:08 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=1907#comment-1765</guid>
		<description>आंकड़े अपनी जगह हैं पर मौका और माहौल भी कोई चीज़ होती है।
एक वक्त था, जब बंबई फिल्म इंडस्ट्री में लता, आशा, रफी, किशोर, महेंद्र, मन्ना के अलावा कोई घुस नहीं सकता था। आज देखिए हर महीने एक नया गायक आ रहा है। एक से एक टैलेंटेड।
ये महेंद्र धोनी कौन जात है भाई ! इसमें इतनी धारण, मारक और जितावक क्षमता कहां से आयी !
(puchh raha huN kyoNki mujhe waqai nahiN pata)
अगर प्रभाषजी के ही एंगल से सोचें तो, धारण-क्षमता क्या सचिन तेंदुलकर से ज़्यादा राहुल द्रविड़ में नहीं थी ! और सौरभ गांगुली से तो निश्चय ही कई गुना ज़्यादा थी। द्रविड़ और ग्रेग मिलकर शुरु में अच्छे-खासे परिणाम भी दे रहे थे कि एकाएक जाने क्या हुआ कि ‘लुट गया सिंगार तार-तार हुई चूनरी’ !
उम्मीद है कि कोई मानवीय संवेदना रखने वाला आंकड़ा-विशेषज्ञ इस कहानी के भी नए आयाम दिखाएगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आंकड़े अपनी जगह हैं पर मौका और माहौल भी कोई चीज़ होती है।<br />
एक वक्त था, जब बंबई फिल्म इंडस्ट्री में लता, आशा, रफी, किशोर, महेंद्र, मन्ना के अलावा कोई घुस नहीं सकता था। आज देखिए हर महीने एक नया गायक आ रहा है। एक से एक टैलेंटेड।<br />
ये महेंद्र धोनी कौन जात है भाई ! इसमें इतनी धारण, मारक और जितावक क्षमता कहां से आयी !<br />
(puchh raha huN kyoNki mujhe waqai nahiN pata)<br />
अगर प्रभाषजी के ही एंगल से सोचें तो, धारण-क्षमता क्या सचिन तेंदुलकर से ज़्यादा राहुल द्रविड़ में नहीं थी ! और सौरभ गांगुली से तो निश्चय ही कई गुना ज़्यादा थी। द्रविड़ और ग्रेग मिलकर शुरु में अच्छे-खासे परिणाम भी दे रहे थे कि एकाएक जाने क्या हुआ कि ‘लुट गया सिंगार तार-तार हुई चूनरी’ !<br />
उम्मीद है कि कोई मानवीय संवेदना रखने वाला आंकड़ा-विशेषज्ञ इस कहानी के भी नए आयाम दिखाएगा।</p>
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		<title>By: aam admi</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/21/samar-reply-to-prabhash-ji/comment-page-1/#comment-1764</link>
		<dc:creator>aam admi</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Aug 2009 10:26:39 +0000</pubDate>
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		<description>समरेन्द्र जी,

सचिन तेंदुलकर के रिकार्ड के बारे में लिखने के दौरान हुई छोटी से छोटी त्रुटि को दुरुस्त करने में हम पूरी तत्परता दिखाते हैं. लेकिन ब्राह्मणवाद के कारण उपजी सामाजिक विसंगतियों को दूर करने में भी हम इतनी तत्परता क्यों नहीं दिखाते, असली सवाल यह है. खैरलांजी, गोहाना कांड और जीवन  के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद सामाजिक असंतुलन और गैरबराबरी की असलियत पर बात  करने से आखिर कब तक मुंह चुराते रहेंगे हम?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>समरेन्द्र जी,</p>
<p>सचिन तेंदुलकर के रिकार्ड के बारे में लिखने के दौरान हुई छोटी से छोटी त्रुटि को दुरुस्त करने में हम पूरी तत्परता दिखाते हैं. लेकिन ब्राह्मणवाद के कारण उपजी सामाजिक विसंगतियों को दूर करने में भी हम इतनी तत्परता क्यों नहीं दिखाते, असली सवाल यह है. खैरलांजी, गोहाना कांड और जीवन  के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद सामाजिक असंतुलन और गैरबराबरी की असलियत पर बात  करने से आखिर कब तक मुंह चुराते रहेंगे हम?</p>
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