प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में ईजीएम होनी है। लेकिन इस ईजीएम को लेकर भी विवाद है। इसका एलान वहां की मैनेजमेंट कमेटी के एक धड़े ने किया है। इसके लिए करीब चार सौ सदस्यों ने हस्ताक्षर भी किए हैं। लेकिन प्रेस क्लब के जनरल सेक्रेटरी पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ इसे गैरकानूनी बता रहे हैं। ऐसे में आज की बैठक में हंगामा हो सकता है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया इन दिनों विवादों के घेरे में है। क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ पर घोटाले का आरोप है। ये आरोप लगाया है कोषाध्यक्ष (ट्रेजरार) नदीम अहमद काजमी और मैनेजमेंट कमेटी के कुछ सदस्यों ने। उनके मुताबिक क्लब एक करोड़ रुपये के घाटे में है और इसके लिए जिम्मेदार हैं पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ। नदीम ने पिछले महीने एक पर्चा जारी करके खुलासा किया था कि प्रेस क्लब ने कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई की रकम जमा कराने में कई बार देरी की। यही नहीं फंड की कमी के कारण कई बार बिजली का बिल और किराया भी समय पर जमा नहीं कराया जा सका है। नदीम के मुताबिक प्रेस क्लब ने एक बैंक से पांच लाख रुपये का कर्ज भी लिया है।
प्रेस क्लब के सदस्यों को भेजे गए इस ई-मेल में ट्रेजरार ने क्लब के लेखा-जोखा में भारी धांधली का आरोप लगाते हुए इमरजेंसी ईजीएम बुलाने की मांग की है। नदीम अहमद काजमी ने ये भी कहा है कि तीन साल पहले क्लब की माली हालत मजबूत थी। तब घाटा 25 लाख रुपये के करीब था लेकिन क्लब के खाते में उतना ही पैसा नकदी के तौर पर पड़ा था। लेकिन आज हालत बहुत ख़राब है। यही नहीं बीते पांच साल से क्लब का ऑडिट नहीं हुआ है। इसके अलावा पुष्पेंद्र ने एक गोपनीय खाता खुलवाया है और लेन-देन उसी खाते के जरिए हो रहा है।
नदीम के इन आरोपों के बाद 18 जुलाई को मैनेजमेंट कमेटी की आपात बैठक होनी थी। लेकिन उसी दिन महासचिव ने बैठक रद्द कर दी। मगर नदीम और मैनेजमेंट कमेटी के सात सदस्यों ने बैठक की और ईजीएम बुलाने का फैसला ले लिया। नदीम के मुताबिक ईजीएम बुलाने की अर्जी पर क्लब के 250 सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए थे जबकि उन लोगों ने 400 सदस्यों से हस्ताक्षर कराए हैं। ऐसे में ईजीएम को गैरकानूनी ठहराने का कोई तुक नहीं बनता।
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