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प्रेस क्लब से पुष्पेंद्र की विदाई, बालाचंद्रन को कमान

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की मैनेजमेंट कमेटी भंग कर दी गई है। शनिवार को ईजीएम में दो सौ से ज़्यादा सदस्यों ने सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और अध्यक्ष परवेज अहमद के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित कर दिया। इस प्रस्ताव के मुताबिक मौजूदा कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग करते हुए चुनाव तक पी पी बालाचंद्रन की अगुवाई में सात सदस्यों की अंतरिम कमेटी का गठन कर दिया गया है।

प्रेस क्लब में अगले एक-दो महीने में चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले ही क्लब के सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ पर घोटाले के आरोप लग गए। उन आरोपों के बाद आपात ईजीएम बुलाई गई। उस ईजीएम में क्लब के ट्रेजरार नदीम अहमद काजमी ने आरोप पत्र पढ़ा। उन्होंने बताया कि पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने मैनेजमेंट कमेटी की मंजूरी के बगैर बैंक में एक गोपनीय खाता खुलवाया और उस खाते से लेन-देन किया। इसके अलावा क्लब में कच्ची पर्चियों पर कई बड़े भुगतान किए गए। नियमों के ख़िलाफ़ पांच हज़ार रुपये से अधिक का कैश पेमेंट किया गया। कई एसोसिएट मेम्बरों पर 50-50 हज़ार रुपये तक के बकाए को नज़रअंदाज किया गया। पांच लाख रुपये से अधिक ओवरड्राफ्ट। बिना किसी की जानकारी के क्लब के ऊपरी हिस्से को ठेके पर चढ़ाना और रोक के बावजूद बड़ी संख्या में नए सदस्य बनाना। ऐसी ढेरों अनियमितताएं हैं जो सेक्रेटरी जनरल और उनकी टीम को कठघरे में खड़ा करती हैं। नदीम ने यह भी बताया कि बीते एक साल में क्लब के किसी भी सौदे की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। अगर यही सब करना है तो फिर कोषाध्यक्ष की नियुक्ति क्यों की जाती है।

इन आरोपों के बाद सीनियर मेंबर राहुल जलाली ने प्रस्ताव पेश किया। जिसमें मौजूदा कमेटी को भंग करके एक अंतरिम कमेटी के गठन की मांग की गई। बैठक में मौजूद ज़्यादातर सदस्यों ने इस प्रस्ताव को हाथ उठा कर मंजूरी दे दी। पी पी बालाचंद्रन को अंतरिम कमेटी का संयोजक बनाया गया है। शाहिद फरीदी, गिरजा शंकर कौड़ा , सुधीरंजन सेन, टी के राजलक्ष्मी, अजय कुमार और वाई एस गिल सदस्य मनोनीत किए गए हैं।

ईजीएम के दौरान थोड़ा हंगामा भी हुआ। एक सदस्य ने जबरन माइक छीन कर अपनी बात रखने की कोशिश की। लेकिन कुछ दूसरे सदस्यों ने यह कहते हुए उसे बोलने नहीं किया कि वो पेशे से डॉक्टर है। इस एक वाकये को छोड़ दे तो सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। आखिर में पी पी बालाचंद्रन के बुलाने पर पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद ने भी अपनी बात रखी।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि क्लब के सभी लेन-देन के पेपर उनके पास सुरक्षित हैं और अगर भ्रष्टाचार का आरोप साबित हुआ तो वो और उनकी कमेटी के बाकी साथी प्रेस क्लब की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। पुष्पेंद्र ने यह भी कहा कि इससे पहले भी कई कमेटियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं… कई बार अंतरिम कमेटियों का गठन हो चुका है लेकिन कभी भी कोई आरोप साबित नहीं हुआ। किसी के ख़िलाफ़ कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं हुई। परवेज अहमद ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन लोगों ने जो नहीं किया उस पर तो बात हो गई, लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि उन लोगों ने कितना कुछ किया है।

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