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	<title>Comments on: कमाल है प्रभाष जी, आप कुछ बोलते क्यों नहीं?</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: manas</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/24/questions-on-prabhash-ji-interview/comment-page-1/#comment-1123</link>
		<dc:creator>manas</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2009 07:39:57 +0000</pubDate>
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		<description>ब्राह्मण कैसे हैं। इनके बारे में अगंरेजों ने सही समझ लिया था. वे जानते थे कि ये लंबा-लंबा फेंक तो सकते हैं। कथित ज्ञानी हो सकते हैं। महानता की बाते कर सकते हैं। लेकिन जंग में शहीद नहीं हो सकते । यही वजह है कि ब्राह्मणों के नाम पर किसी फौजी रेजिमेंट को नहीं बनाया गया। उन्हे मालूम था कि इनकी बदौलत जंग जितने का भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। अपवाद छोड़ दे तो   गौर करने वाली बात यह है कि आज भी कोई ब्राह्मण फौज में भर्ती नहीं होता है। आईआईटी कंपनियों के चेयरमैन ब्राह्मण हैं एेसी  बाते करेगा, तमाम बहस करेगा, लंबा-लंबा फेंकेगा लेकिन देश के लिए जान देने की बात आती है तो सोचता है कोई दूसरा जान दे। शहीद कोई और हो मलाई कोई और खाए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्राह्मण कैसे हैं। इनके बारे में अगंरेजों ने सही समझ लिया था. वे जानते थे कि ये लंबा-लंबा फेंक तो सकते हैं। कथित ज्ञानी हो सकते हैं। महानता की बाते कर सकते हैं। लेकिन जंग में शहीद नहीं हो सकते । यही वजह है कि ब्राह्मणों के नाम पर किसी फौजी रेजिमेंट को नहीं बनाया गया। उन्हे मालूम था कि इनकी बदौलत जंग जितने का भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। अपवाद छोड़ दे तो   गौर करने वाली बात यह है कि आज भी कोई ब्राह्मण फौज में भर्ती नहीं होता है। आईआईटी कंपनियों के चेयरमैन ब्राह्मण हैं एेसी  बाते करेगा, तमाम बहस करेगा, लंबा-लंबा फेंकेगा लेकिन देश के लिए जान देने की बात आती है तो सोचता है कोई दूसरा जान दे। शहीद कोई और हो मलाई कोई और खाए।</p>
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		<title>By: गांधीजी</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/08/24/questions-on-prabhash-ji-interview/comment-page-1/#comment-1122</link>
		<dc:creator>गांधीजी</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2009 01:46:43 +0000</pubDate>
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		<description>माफ करना मित्रो, ब्राहमण नहीं हूं फिर भी वक्तव्य देने चला आया। दरअसल एक ज़रुरी सच्चाई बताने आया हूं कि इस देश को मैंने नहीं नाथूराम ने आज़ाद कराया था। आपको तो मालूम है कि नाथूराम ब्राहमण था और उसकी धारण-क्षमता की गोली मेरे सीने में मलाई की तरह घुल गई थी।
गुरुदेव प्रभाष जोशी जी से कहना आपका चेला गांधी आया था। कमज़ोर धारण-क्षमता की वजह से ज्यादा देर रुक नहीं पाया। अच्छा मित्रो चलता हूं, पाचक-क्षमता भी जवाब दे रही है।

*पुनश्चः*** बेटा, एक ज़रुरी बात रह गयी थी, आना पड़ा। अच्छा बताओ तो, गुरुदेव प्रभाष जी ने इस बहस के बारे में कुछ कहा कि नहीं। क्या बोला! आप सब को लल्लू-पंजू बोल रहे हैं। ठीक ही तो है बेटा, मैं तो अपने अखबारों में छात्रों से बराबरी के स्तर पर संवाद करता था। अब इतनी धारण-क्षमता तो थी नहीं कि भेद-भाव करता ! अच्छा पूछना कि जो प्रयोग मैं किया करता था वही बा ने किए होते तो क्या वे तब भी मेरे गुरु बने रहते ? थोड़ा अजीब तो लगता है बेटा पर हिम्मत करके पूछ ही लेना। वैसे तो सवाल गंभीर हैं बेटा पर अगर कोई भदेस कहे तो कहना कि हमारे गुरुदेव ह्यूमर के भी काफी शौकीन हैं। धारण-क्षमता का सवाल है, बेटा। आप तो सवालों की गठरी खोले बैठे हो, दो सवाल मेरे भी डाल लो, बेटा। अच्छा चलता हूं। इस सवाल पर गुरुदेव नाराज़ न हुए तो फिर आऊंगा। अभी रास्ते में गुरु गौडसे की समाधि पर मत्था भी टेकना है। सी यू बेटा, हां।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>माफ करना मित्रो, ब्राहमण नहीं हूं फिर भी वक्तव्य देने चला आया। दरअसल एक ज़रुरी सच्चाई बताने आया हूं कि इस देश को मैंने नहीं नाथूराम ने आज़ाद कराया था। आपको तो मालूम है कि नाथूराम ब्राहमण था और उसकी धारण-क्षमता की गोली मेरे सीने में मलाई की तरह घुल गई थी।<br />
गुरुदेव प्रभाष जोशी जी से कहना आपका चेला गांधी आया था। कमज़ोर धारण-क्षमता की वजह से ज्यादा देर रुक नहीं पाया। अच्छा मित्रो चलता हूं, पाचक-क्षमता भी जवाब दे रही है।</p>
<p>*पुनश्चः*** बेटा, एक ज़रुरी बात रह गयी थी, आना पड़ा। अच्छा बताओ तो, गुरुदेव प्रभाष जी ने इस बहस के बारे में कुछ कहा कि नहीं। क्या बोला! आप सब को लल्लू-पंजू बोल रहे हैं। ठीक ही तो है बेटा, मैं तो अपने अखबारों में छात्रों से बराबरी के स्तर पर संवाद करता था। अब इतनी धारण-क्षमता तो थी नहीं कि भेद-भाव करता ! अच्छा पूछना कि जो प्रयोग मैं किया करता था वही बा ने किए होते तो क्या वे तब भी मेरे गुरु बने रहते ? थोड़ा अजीब तो लगता है बेटा पर हिम्मत करके पूछ ही लेना। वैसे तो सवाल गंभीर हैं बेटा पर अगर कोई भदेस कहे तो कहना कि हमारे गुरुदेव ह्यूमर के भी काफी शौकीन हैं। धारण-क्षमता का सवाल है, बेटा। आप तो सवालों की गठरी खोले बैठे हो, दो सवाल मेरे भी डाल लो, बेटा। अच्छा चलता हूं। इस सवाल पर गुरुदेव नाराज़ न हुए तो फिर आऊंगा। अभी रास्ते में गुरु गौडसे की समाधि पर मत्था भी टेकना है। सी यू बेटा, हां।</p>
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