
हरिवंश, संपादक, प्रभात ख़बर
चलिए, जो बात कहनी थी, वो करते हैं। प्रभात खबर लगातार जनअधिकारों की बात करता है। आदिवासियों के हक़ में चल रहे आंदोलन के पक्ष में स्टैंड लेता रहा है। लेकिन विडंबना ये है कि कभी उसने स्थानीय आदिवासी समुदायों को खुद से नहीं जोड़ा। इस अख़बार में हमेशा दिकू (झारखंड पर कब्ज़ा जमाये बाहरी लोग) ही छाये रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आदिवासी नाम इस अखबार में जगह ही न पाते हों। जगह पाते हैं। बीजू टोप्पो, दयामनी बरला, पुष्पा टेटे से लेकर वासवी तक प्रभात ख़बर में लिखती रही हैं, लेकिन इन सबकी हैसियत एक फ्रीलांसर की रही। इनमें से कइयों ने प्रभात खबर में नौकरी पाने की कोशिश की – लेकिन उन्हें हमेशा टाला जाता रहा।
पिछली बार हमारे राजपूत संदर्भों वाले आरोप के जवाब में किसी ने उन लोगों के नाम परोसे, जिन्हें हरिवंश जी ने संपादक बनाया – अनुज कुमार सिन्हा, विजय पाठक, अविनाश दास, रविप्रकाश, राघवेंद्र आदि-आदि। बेशक ये लोग राजपूत नहीं हैं – लेकिन हरिवंश जी की पैदाइश ज़रूर हैं (ग़ौर कीजिए, ये सब के सब सवर्ण हैं)। अनुज सिन्हा और विजय पाठक अब भी हरिवंश जी के साथ हैं लेकिन बाक़ी लोग टपले खा रहे हैं। ग़ौर करने की बात ये है कि हरिवंश जी ने इन तमाम नामों को इसलिए प्रोमोट किया, क्योंकि ये लोग सस्ते संपादक थे। लेकिन सबसे अधिक प्रोमोशन उन नामों का किया, जो औसत होने के बावजूद राजपूत थे।
गोपालगंज के रहने वाले ओमप्रकाश अश्क ने कारोबार ख़बर को शुरू कराया, बंद कराया। पटना एडिशन के संपादक बने, कुछ कर नहीं पाये। धनबाद एडिशन का एडिटर बनाया और विपरीत परिस्थितियों के चलते वहां से भाग खड़े हुए। फिर हरिवंश जी ने ढूंढा और कोलकाता एडिशन का संपादक बनाया। कोलकाता में अखबार अभी रेस में ही नहीं है। हिंदी अखबारों में वहां सन्मार्ग की तूती बोलती है। तिस पर भी हरिवंश जी ने उन्हें कार्यकारी संपादक बना दिया। इतने उपकार के बावजूद एक बार फिर ओमप्रकाश पैसे के चक्कर में (जैसा कि उन्होंने एक वेबसाइट को इंटरव्यू में बताया है) हरिवंश जी का साथ छोड़ गये हैं। लेकिन तथागत अब भी दावे के साथ कहता है कि हरिवंश जी फिर उन्हें गले लगाएंगे।
एक संपादक उन्होंने बनाया है पटना में, स्वयं प्रकाश को। वह उपसंपादक बनने के लायक भी नहीं हैं। जोड़-तोड़ कर पुरस्कार हासिल करने में माहिर हैं। बिहार राजभाषा विभाग का आर्थिक पत्रकारिता के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार उन्हें मिला – जबकि अर्थ पत्रकारिता से उनका दूर-दूर तक का नाता नहीं है। अभी मॉरिशस में किसी सम्मान के लिए गये हैं – जिसकी सूचना प्रभात ख़बर में लगातार उनकी तस्वीरों के साथ छप रही है। एक अनुराग कश्यप को हरिवंश जी बिहार-झारखंड घुमा रहे हैं, सिर्फ राजपूत होने के नाते – जबकि हरिवंश जी अच्छी तरह जानते रहे होंगे अनुराग का भावुक लेखन घुमक्कड़ी को ठीक से अभिव्यक्त नहीं कर सकता। रियाज़ुल हक्र ज़्यादा काबिल रिपोर्टर हो सकते थे। उन्होंने पिछले साल बाढ़ की बेमिसाल रिपोर्टिंग की। लेकिन उन्हें साइड लाइन कर दिया गया। अंतत: वे प्रभात खबर छोड़ने पर मजबूर हुए।
सार यह कि प्रभात ख़बर में जनजातीय और अल्पसंख्यक और अवर्ण अस्मिताओं के लिए कोई जगह नहीं है। ये सवर्णों का अख़बार है और जनहितकारी पत्रकारिता भी समाज पर उपकार करने की शैली में करता है।
khaderan
August 24, 2009 at 10:25 pm
tathagat jee, mujhe lagta hai aap ghor jatiwadi hain. ho sakta hai aap mansik rogi ho? ye kaisi bahas chal rahi hai jantantra par? kisi vaikti vishes ke baare mai is trha ki galat tippani karna kitna sahi hai? kya ravi prakash rajpoot hai? nahi. woo yaadav hai.raghvendra bhi sampadak the, we bhi rajpoot nahi hain.abhi patna ko chod kar koi bhi sampadak rajpoot nahi hai.jaha tak reyaz ki bbat hai, aap pata kar lijiy, reyaz ne padhai kI khatir prabhat khabar choda, abhi woh J.N.U. me hai.AAP APNI JANKARI KO PUKHTA KAREN. aap pata kar len kitni unchi jaati ke log yehan kaam karte hain. jagran, hindustan ke baare me kya khyaal hai aapka? prabhat khabar se kaisi khunnas hai? mahodya, aap gandgi failana bannd karin.
vikash
August 24, 2009 at 11:29 pm
वाह खदेरन भाई. एकदम सही कहा. मैं भी तथागत भाई की जुगाली पढता रहा हूं. मुझे लगता है िक ये कुंिठत आदमी हैं. पता नहीं क्या खुन्नस पाल रखा है इन्होंने. गंदगी फैला रहे हैं. कृपया इन्हें रोका जाये
kirnesh
August 25, 2009 at 12:16 am
आप केवल िकसी एक आदमी या संस्थान पर जाितवादी या संिकॅण मान िसकता पर आरोप नहीं लगा सकते. आप िजस संस्थान में काम कर रहे हैं. वहां भी आप को एेसे कई उदाहरण देखने को िमल जायेंगे. भले ही आप ह िरवंश जी को जाितवाद के दायरे में खडा कर रहे हों पर उनके योगदान को क्यों भूल रहे हैं. आप जैसे लोग उनकी ही पैदाइश हैं, वरना िकसी गंदी नाली में रेंग रहे होते.
Ram Kumar
August 25, 2009 at 8:42 am
तथागत ने जो सच्चाई बयान किया है उस पर हरिवंश जी के पालतुओं का चिल्लाना स्वाभाविक है. जो भाई लोग ये कह रहे हैं की हरिवंश जी जातिवादी नहीं हैं, क्या वे बताएँगे प्रभात खबर में जो की आदिवासी बहुल रांची से निकलता है आज तक उसमें एक भी आदिवासी को नौकरी क्यों नहीं दी गई? हरिवंश जी ने अखबार से जो आन्दोलन चला रखा है वो झारखंडी लोगों के लिए नहीं है दिकुओं के लिए है. हरिवंश जी झावर, बिडला और उषा मार्टिन के एजेंट हैं, प्रभात खबर ब्राहमणों का अड्डा है और भाजपा का भोपू. ये किसी से भी थोड़े छिपा है.
Mrityunjay Prabhakar
August 25, 2009 at 2:49 pm
Bhaiyon,
Jab tak savarn apni chalata rahe
jativadi vartav karta rahe
jati ke nam aur pehchan par naukari aur taraki karta rahe
tab tak to thik
sab badhiya hai
isme koi jativad nazar nahi ata
koi bas yeh samne rakh de
baat khol de to wo jativadi ho jata hai
koi shak nahi ki jab tak inhen inki aukat tak nahi laya jayega
yeh aise hi vyavahar karte rahenge
jaroorat is baat ki hai ki in savarno ko bhi
savarna hone ke nate nakara jaye
inhe samaj se bahar kar diya jaye
tab inhe samajh men ayega ki jati ka dansh kya hota hai
kirnesh
August 25, 2009 at 5:41 pm
लो भाई, यह एक अौर नमूना आ गये. अलग राग अलापने. क्या बात हो रही थी. बीच में कूद पडे दुगॅंध फैलाने. मैं खुद अवणॅ हूं. देश कहां-से-कहां जा रहा है. ये भाई साहब किसे औकात बता रहे हैं. स्वणॅ-अवणॅ कहां से आ गया. पिछडो की राजनीति करने की क्या यही जगह मिली है भाई. किसी राजनीतिक दल में क्यों नहीं चले जाते. एक और भाई हैं राम कुमार जी. ये सबको पालतू बता रहे हैं. क्या ये खुद गुलाम मानसिकता के नहीं लगते. अगर हौसला है हिम्मत है खुद पर भरोसा है, तो आगे बढिए. तोडिए इन मान्यताओं को. रचिए इतिहास. सिफॅ लफ्फाजी से काम नहीं चलता मेरे भाई. अगर आप में मेरिट है तो कोई वाद आपको नहीं रोक सकता. कई उदाहरण हैं देश में, उनसे सबक लिजिए न. किसी पर किचड उछालने से कुछ नहीं होता, खुद पर किचड पडने की आशंका रहती है.
amit tyagi
August 25, 2009 at 7:51 pm
pata nain ye tathagat kaun hain aur prabhat khabar mein kya teer maar rahe hain, lekin inka badbolapan mujhe bahut raas aa raha hai. eisa lagta hai ki puri duniya ka theka inhone le rakha hai aur kisi ke baare mein kuchh bhee anaap shanap likhte rahna inki aadat hai. ho sakta hai ye harivansh ke bahut priya hon aur patrakarita mein bhee bahut bada teer mara hai, lekin kisi ke baaare mein yah kahna ki wah up sampadak banne layak nahin hai, mere hisaab se theek nahin hai. jis swayamprakash kee ye baaat kar rahe hain, wah shri shri 108 ravishankar ki jeevni likh chuke hain aur dainik bhaskar jaise organisation mein R E rah chuke hain. tathagat ki jankari ke liye bata dun ki west up mein amar ujala aur rajshthan mein dainik bhaskar mein kuchh saaal kaaam karne ke baaad logon ki kamar seedhee ho jati hai, wahan jharkhand aur bihar wali patrakarita nahin hoti. ek baaar mauka mile to kam karke dekhiye, phir pata chalega ki akhbar mein kaaam kise kahte hain. dainik bhaskar rajsthan mein aap patrika ya navjyoti ya bhaskar mein ek edition saaal bhar nikal kar dikha dijiye safaltapurvak to main aaapki jindgi bhar gulami karne ko taiyaaar hun. bahut bade top honge aaap, lekin tippanni karte samay maryadaon ka dhyan rakhein.
अरविंद
September 14, 2009 at 1:06 am
आलोचना कीजिए। लेकिन तथ्यों की पड़ताल करके। वरना पाठक यही कहेंगे कि आप पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर लेखन कर रहे हैं। आपके बारे में मेरी भी यही राय बनी है।
अनुराग कश्यप राजपूत नहीं, भूमिहार जाति के हैं। धनबाद से प्रकाशित आवाज के उप मुख्य संपादक रहे रवींद्र सिंह के भतीजे हैं वे। अपने चाचा से प्रेरणा पाकर ही उन्होंने पत्रकारिता में कदम रखा था।
यह बात भी गलत है कि प्रभात खबर में गैर राजपूत सबके सब संपादक सवर्ण हुए। आप ऐसी बात कहते हुए विष्णु राजगढिया को क्यों भूल जा रहे हैं। वह सवर्ण नहीं हैं। लेकिन हरिवंश जी ने उन्हें प्रमोट किया।
santosh singh
September 25, 2009 at 9:01 pm
Aapki bat sahi hai, anurag jee ko main bhi janta hoo. we rajput nahi hai, we bhumihar hai aur kafi tailented reporter hai aur apni prabhat khabar ko dhanbad mein khada karne mein unki ullekhniya bhumika hai.
chandramani
September 29, 2009 at 3:58 pm
Bhai Tathagat,
apke vichar padhta raha hun. Lagta hai aap Prabhat Khabar se chot khaye huye hain. Vishvaman k bajaye agar aap koi aise kam karte jisse yuvaon ko rojgar k awsar milte apin site pur yuvaon k liye koi positive tips dete to jyada achha hota. Aap vul rahe hain ki Jhawar,Birla,Jindal v kisi wakt mamuli insan the pur unki doordarshita aur sabko sath lekar chalne ki kuwat ne unko gair-mamuli banaya hai.Ishwar apko aisi shakti de mai to yehi kamna karunga. Sayad aap vul rahe hain ki ek ungli dusro ke taraf uthate wakt apki 3 ungliyan apke apni taraf hoti hai. Apne andar jhank kar dekhen apko atmaglani hone lage.. sayad..
Sanjay Kumar
October 13, 2009 at 7:06 pm
Bhai sach tau ye hai ki Prabhat Khabar ne apani Progressive image banakar sare improtant pado par jatiwadi logo ko bitha rakha hai. Jab kabhi koi communal ya regional ya caste based mamala aata hai ya koi anti-BJP situation aati hai, tab Prabhat Khabar ka role kaphi negative ho jata hai. Ye jyada khatarnak hai