हड़ताल का चौथा दिन
वॉयस ऑफ इंडिया में कर्मचारियों की हड़ताल का चौथा दिन है। वहां लोग अब भी धरने पर बैठे हुए हैं और अपने जायज हक़ की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मैनेजमेंट ने अभी तक उनकी मांगों पर अमल नहीं किया है। जून की तनख्वाह भी सभी कर्मचारियों को नहीं दी गई है। धरने पर बैठे कर्मचारियों का यह भी कहना है कि “जो भी यह कह रहे हैं कि समझौता हो गया है वो झूठ बोल रहे हैं और मैनेजमेंट के हाथों में खेल रहे हैं।”
वीओआई त्रिवेणी ग्रुप का चैनल है और पिछले शुक्रवार से वहां पर हड़ताल चल रही है। वहां कर्मचारियों को मई के बाद से तनख्वाह नहीं मिली थी। सैकड़ों की संख्या में लोग सिर्फ़ उम्मीद के सहारे काम में जुटे थे। लेकिन शुक्रवार को वो उम्मीद की डोर खुद मैनेजमेंट के लोगों ने तोड़ दी। सूत्रों के मुताबिक जब कुछ कर्मचारियों ने नए सीईओ अमित सिन्हा से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि वो मुंबई में हैं और अभी उनकी मदद करने की स्थिति में नहीं हैं। गौरतलब है कि त्रिवेणी ग्रुप ने जून में अमित सिन्हा को कंपनी का सीईओ और डायरेक्टर नियुक्त किया था। तब यह खुद अमित सिन्हां ने कुछ पत्रकारों को बताया था कि मधुर मित्तल अपनी मीडिया कंपनी की पचास फीसदी हिस्सेदारी उनके नाम करेंगे। यह सौदा कितने में हुआ इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया। बताया जा रहा है कि त्रिवेणी ग्रुप ने उस करार पर अमल नहीं किया और उसकी वजह से अमित सिन्हा ने पैसा लगाने का इरादा टाल दिया। फिर कर्मचारियों ने इस बारे में मधुर मित्तल से बात की। सूत्रों के मुताबिक मधुर मित्तल ने यह कह कर उनकी मांगों पर गौर करने से इनकार कर दिया कि बीते तीन महीनों से चैनल कौन चला रहा है? जो चला रहा है उसी से बात करें।
दोनों मालिकों के इस झगड़े ने कर्मचारियों की उम्मीद तोड़ दी। तकनीकी कर्मचारियों ने उसी शाम हंगामा खड़ा कर दिया। काम बंद कर दिया गया। चैनल ब्लैकआउट हो गया और नारेबाजी शुरू हो गई। करीब तीस घंटे तक ब्लैकआउट के बाद शनिवार और रविवार की आधी रात चैनल ऑनएयर हुआ। लेकिन रिकॉर्डेड कार्यक्रमों की बदौलत। बीते चार दिन में एक भी कार्यक्रम लाइव नहीं हुआ है। यही नहीं कंपनी के आला अधिकारी और वरिष्ठ संपादकीय टीम दफ़्तर नहीं पहुंच रही है। सभी क्षेत्रीय चैनलों के हेड भी गायब हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएंगी बकाया पैसा नहीं चुकाया जाएगा वो काम पर नहीं लौटेंगे। वो मैनेजमेंट पर डराने-धमकाने का आरोप भी लगा रहे हैं।
मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया
कर्मचारियों के आरोपों के बाद हमने वीओआई के समूह संपादक किशोर मालवीय से बात की। उन्होंने माना की कर्मचारियों की हड़ताल जारी है (गौरतलब है कि दो दिन पहले उन्होंने जनतंत्र को बताया था कि सभी कर्मचारी काम पर लौट आए हैं)। उन्होंने यह भी माना कि अब तक चैनल रिकॉर्डेड मोड पर चल रहा है। लेकिन आज एक प्रेश बुलेटिन रोल किया जाएगा। इसके लिए कंपनी ने जैन टीवी का स्टूडियो किराए पर लिया है। उनके मुताबिक संपादकीय और तकनीकी विभाग के कई कर्मचारी बुलेटिन बनाने में जुटे हैं। इन कर्मचारियों को अंदाजा है कि मौजूदा हालात में बाहर कहीं नौकरी नहीं मिलने वाली है। इसलिए बेहतर तो यही होता कि आंदोलन की जगह इस मुश्किल दौर से उबरने में सभी कर्मचारी साथ देते।
किशोर मालवीय ने ये आरोप भी लगाया कि कुछ बाहरी तत्व साज़िश के तहत चैनल बंद कराना चाहते हैं। हालांकि ये बाहरी तत्व कौन हैं वो ये साफ़ नहीं कर सके। किशोर मालवीय के मुताबिक कंपनी के मालिकाना हक़ को लेकर कोई विवाद नहीं है। जो कानूनी पेंच फंसा है उसे भी सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
“मैनेजमेंट के आरोप झूठे”
समूह संपादक की प्रतिक्रिया के बाद हमने विरोध प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से दोबारा बात की। उन्होंने कहा कि उनकी हड़ताल में किसी बाहरी तत्व का हाथ नहीं है। वो अपना जायज हक़ मांग रहे हैं। कंपनी उनकी मांगों को पूरा कर दे तो फिर से सबकुछ सामान्य हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मैनेजमेंट डरा-धमका कर और झूठे प्रचार के जरिए उन्हें तोड़ने की कोशिश कर रहा है लेकिन वो ऐसा नहीं होने देंगे।
संदीप
August 24, 2009 at 8:05 pm
मेरा वी.ओ.आई. के हड़ताली साथियों का पूरा समर्थन करता हूं। क्या उनसे किसी तरह संपर्क किया जा सकता है।