हिंदुस्तान से मृणाल पांडे की विदाई हो गई है। उनकी विदाई के बाद वहां पर उनके करीबी कर्मचारियों में डर का माहौल है। हिंदुस्तान के सूत्र बताते हैं कि मृणाल पांडे की सत्ता में मलाई खाने वाले कई कर्मचारी उनकी फेयरवेल पार्टी से गायब थे। शायद वो अभी से अपने दामन पर लगे मृणाल पांडे के लेबल को हटाने की कोशिश में जुट गए हैं।
हिंदुस्तान के सूत्रों ने बताया कि मृणाल पांडे ने विदाई भाषण में कर्मचारियों से गुजारिश की है कि वो इस्तीफा नहीं दें। लेकिन यह सवाल तो तब उठता जब कोई मृणाल समर्थक शशि शेखर की नियुक्ति का विरोध करते हुए उनके साथ इस्तीफ़ा दे देता। सच तो यही है कि किसी ने अभी तक इस्तीफ़े की पेशकश नहीं की है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर हिंदुस्तान के कुछ कर्मचारियों ने यह भी जानकारी दी कि डर का माहौल सबसे अधिक पहाड़ के लोगों में है। उनके अलावा वो लोग भी काफी डरे हुए हैं जिनके घर के दो-दो, तीन-तीन लोग हिंदुस्तान में काम कर रहे हैं। ऐसे लोग ब्यूरो से लेकर तकनीकी विभाग में मौजूद हैं। उन सभी ने मृणाल पांडे से करीबी का फायदा उठाते हुए अपने रिश्तेदारों को भर्ती तो करा दिया। लेकिन अब सत्ता परिवर्तन के बाद नौकरी जाने का डर सता रहा है। ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि कुछ लोगों ने दूसरे अख़बारों में नौकरी की संभावना तलाशने के लिए फोन करना शुरू कर दिया है।
यह हाल तब है जब नए प्रमुख संपादक शशिशेखर ने कार्यभार नहीं संभाला है। वो दो दिन बाद, यानी शुक्रवार से कार्यभार संभालेंगे। सूत्रों के मुताबिक हर संस्थान में कुछ लोग दल बदलने में माहिर होते हैं। इसलिए हो सकता है कि वो अपना ओहदा और ताकत बचा लें, लेकिन कई ऐसा कर पाने में नाकाम होंगे। ऐसे में अनुमान तो यही है कि अगले एक-दो महीने में हिंदुस्तान में काफी अहम बदलाव होंगे।
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