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सोनिया गांधी ने प्रेस क्लब की मानद सदस्यता लौटाई

आखिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रेस क्लब की मानद सदस्यता लौटा दी। सोनिया गांधी को दिया गया कार्ड प्रेस क्लब वापस भेज दिया गया है। उसके साथ कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी की चिट्ठी भी लगी हुई है। उसमें कहा गया है कि प्रेस क्लब से जुड़े विवाद को देखते हुए सोनिया गांधी तत्काल प्रभाव से मानद सदस्यता लौटा रही हैं।

प्रेस क्लब इन दिनों विवादों के घेरे में है। क्लब के सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिसके बाद ईजीएम में पुष्पेंद्र को हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। ईजीएम में मैनेजमेंट कमेटी को भंग करते हुए एक अंतरिम कमेटी का गठन कर दिया। वही कमेटी इन दिनों प्रेस क्लब का काम संभाल रही है। ईजीएम के दौरान पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद ने अंतरिम कमेटी को मदद देने का भरोसा दिया। लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर ईजीएम के फैसले को अदालत में चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि ईजीएम गैर कानूनी तरीके से बुलाई गई थी इसलिए उसके फैसले को सही नहीं ठहराया जा सकता।

इसी बीच पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर के उन्हें मानद सदस्यता का कार्ड दे दिया। इस ख़बर के सामने आने के बाद कई पत्रकारों ने कांग्रेस नेताओं के सामने विरोध जताया। कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस पर सवाल पूछे गए। कांग्रेस को भी लगा कि पत्रकारों से जुड़े विवादित मामले में सोनिया गांधी का नाम घसीटना सही नहीं। उसके बाद वो कार्ड सम्मान पूर्व प्रेस क्लब लौटा भेज दिया गया।

प्रेस क्लब के लिए संघर्ष कई मोर्चों पर चल रहा है। प्रेस क्लब के भीतर लड़ाई हार जाने के बाद पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद ने अदालती लड़ाई शुरू कर दी है। अदालत में दोनों तरफ से जोरदार दलीलें रखी जा रही हैं। एक पक्ष का कहना है कि प्रेस क्लब के संविधान के मुताबिक ईजीएम को यह हक नहीं है कि वो चुनी हुई मैनेजमेंट कमेटी को भंग कर दे। लेकिन तीन साल पहले भी ईजीएम ने ही तत्कालीन कमेटी को भंग किया था। इस लिहाज से देखा जाए तो ईजीएम को यह हक है।

कानूनी लड़ाई के अलावा दोनों तरफ से एक दूसरे के ख़िलाफ़ जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है। उसी प्रक्रिया के तहत पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद ने सोनिया गांधी से मिल कर उन्हें मानद सदस्यता प्रदान की। बताया जा रहा है कि यह भ्रष्टाचार के आरोपों के खुद को बचाने के लिए किया गया। उन्हें लगा कि सोनिया गांधी के बीच में आने से उनके विरोधी गुट पर दबाव बढ़ जाएगा। लेकिन जैसे ही कांग्रेस के नेताओं को यह भनक मिली कि सोनिया गांधी का नाम प्रेस क्लब की गुटबाजी में घसीटा जा रहा है उन्होंने हटाए गए पदाधिकारियों की तरफ से मिला कार्ड लौटा दिया।

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