Subscribe by Email

अगर वो ख़बरें सच निकलती, तो ज़िंदा होते वाईएसआर

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी के लापता होने की ख़बर आने के बाद करोड़ों निगाहें टेलीविजन न्यूज़ चैनलों पर अटक गईं। हर कोई जानना चाहता था कि वाईएसआर कहां हैं और किस हाल में हैं? अनहोनी की आशंका के बीच एक उम्मीद की मजबूत डोर भी थी कि वो ज़िंदा होंगे। यह और बात है कि एक दिन बाद ख़ौफ़नाक सच ने एक झटके में वो डोर तोड़ दी। हम सबको अहसास करा दिया कि ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं। हादसे कभी भी और किसी के साथ भी हो सकते हैं। लेकिन बीते दो दिन से चैनल पर नज़रें टिकाएं करोड़ों लोगों को न्यूज़ चैनलों ने तीन-चार मौकों पर दिलासा जरूर दिया।

बुधवार की दोपहर कई चैनल वाईएसआर के लापता होने की ख़बर चला रहे थे। जबकि कई चला रहे थे कि वाईएसआर रेड्डी का सुराग मिला और वो सही सलामत हैं। ब्रेकिंग न्यूज़ की मोटी पट्टियों पर तमाम आशंकाओं को तोड़ती उस ख़बर ने बहुतों को अपनी ओर आकर्षित किया। बहुतों ने देश के सबसे तेज और नंबर वन चैनल पर इस खुशखबरी को देख कर राहत की सांस ली। यही ग़लती आईबीएन 7 ने भी की। उसने भी दोपहर में करीब सवा घंटे तक यह जानकारी दी कि राजशेखर रेड्डी का सुराग मिल गया है। बताया जाता है कि ख़बर उड्डयन मंत्रालय के सूत्रों ने दी थी। उन्होंने जानकारी दी थी कि हेलीकॉप्टर सुरक्षित उतार लिया गया है। ज़ी न्यूज़ ने भी एक सांसद के हवाले से ख़बर दी कि राजशेखर रेड्डी सुरक्षित हैं। बाद में उसने भी अपनी ख़बर बदली।

उधार - मीडियामार्ग

उधार - मीडियामार्ग

लेकिन सबसे बड़ी चूक इंडिया टीवी पर हुई। वो भी रात नौ बजे। ब्रेकिंग न्यूज़ में दावा किया गया कि वाईएसआर रेड्‍डी ज़िंदा हैं। नल्ला मल्ला के जंगलों में आदिवासियों ने उनके बारे में ख़बर दी है। यह ख़बर सभी के लिए एक राहत के झोंके की तरह थी। एक साथी ने बताया है कि ठीक उसी समय वो बिहार में अपने पिता से फोन पर बात कर रहे थे। उनके पिता ने कहा कि इंडिया टीवी देखो उस पर ब्रेकिंग न्यूज आ रही है। वाईएसआर रेड्डी ज़िंदा हैं। साथी ने कहा कि इंडिया टीवी पर भरोसा मत कीजिए। कोई दूसरा चैनल देखिए। लेकिन उन्होंने कहा कि वो अभी इंडिया टीवी ही देखेंगे। वैसे भी आशंकाओं के बीच कहीं से भी उम्मीद की धुंधली सी भी रोशनी दिखाई दे तो निगाहें वहीं टिक जाती हैं। यहां भी आशंकाओं पर उम्मीद भारी पड़ी। उम्मीद ने उन्हें इंडिया टीवी से जोड़े रखा। ये और बात है कि दस बजे आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव रमाकांत रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस ख़बर का खंडन कर दिया। उन्होंने इंडिया टीवी के आदिवासियों से अपील की अगर उन्हें कहीं भी हेलीकॉप्टर या फिर राजशेखर रेड्डी के बारे में कोई सूचना मिले तो इसकी ख़बर दी जाए। उसके बाद इंडिया टीवी ने पलटी मार ली। उसकी जगह कोई भी चैनल होता तो यही करता। सुनते हैं कि सहारा ने भी एक बार वाईएसआर को ज़िंदा कर दिया था।

इन ग़लतियों के अलावा कई न्यूज़ चैनलों ने इस हादसे में नक्सली पेंच भी फंसाया। चूंकि हेलीकॉप्टर जब लापता हुआ तो उस वक़्त वो नक्सल प्रभावित करनूल जिले की आसमान में था। नक्सली पहले से कुख्यात हैं। कुछ भाई लोगों ने मौके का फायदा उठा कर एक नई थ्योरी हवा में उड़ा दी। ख़बरों के भूखे चैनलों ने उसे लपक लिया। हिंदी हो या फिर अंग्रेजी सभी चीख-चीख कर बताने लगे कि राजशेखर रेड्डी के लापता होने के पीछे नक्सलियों का हो सकता है। उन्होंने इतना चरस कर दिया कि आखिर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) एम के नारायणन को ये थ्योरी खारिज करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि अभी नक्सलियों के पास यह क्षमता नहीं आई कि वो किसी हेलीकॉप्टर को गिरा दें। एनएसए के उस बयान के तुरंत बाद हेलीकॉप्टर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने लगे। हो सकता है कि अगले कुछ दिन में कोई नया पेंच भी सामने आ जाए।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>