
मीडियामार्ग से उधार
अगले दिन जब मुख्यमंत्री वाईएसआर समेत हेलीकॉप्टर में सवार सभी पांचों व्यक्तियों के मरने की पुष्टि हो गई तब कई नेता भड़क उठे। सूत्रों पर यकीन करें तो उनके मुताबिक इंडिया टीवी ने झूठी ख़बर चला कर करोड़ों लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किसी चैनल का कोई संपादक इस तरह की हरक़त कैसे कर सकता है? बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के एक बेहद संवेदनशील माहौल में इस तरह की ख़बर कैसे चलाई जा सकती है? इससे जाहिर होता है कि दूसरे चैनलों से आगे निकलने की होड़ में कुछ चैनल किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।
उधर संपादकों के बीच भी इसकी चर्चा है। उस दिन ज़्यादातर चैनलों ने एक न एक बार ग़लत ख़बर चलाई थी। इसलिए वो भी तैयार बैठे हैं। एक चैनल के संपादक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ग़लत ख़बरों के लिए सरकार ही जिम्मेदार है। पहली ग़लत ख़बर उड्डयन मंत्रालय के एक नुमाइंदे की तरफ से आई। कई चैनल उसके लपेटे में आ गए। उसके अलावा हेलीकॉप्टर के लापता होने के बाद से पूरे दिन कभी मुख्यमंत्री के करीबी नेता, कभी खुद मुख्यमंत्री कार्यालय तो कभी कोई और महकमा भ्रामक ख़बरें देता रहा। उनका यह भी कहना है कि सरकार वाईएसआर से जुड़ी कवरेज के आधार पर कोई दबाव बनाने की कोशिश नहीं करेगी। अगर ऐसा हुआ तो उसमें सरकार के फंसने की गुंजाइश ज़्यादा है।
बी एस पाबला
September 7, 2009 at 12:24 pm
एकाध ‘अफवाह’ चैनल खोल लेना चाहिए। पत्र पत्रिकायों के गॉसिप कॉलम की तर्ज़ पर
देख लीजिएगा अगर कोई टीवी निर्माता कम्पनी इसको अपने खास मॉडल के साथ बंडल कर बेचेगी तो उसकी बिक्री आसमान छू जाएगी
ashish
September 9, 2009 at 9:02 pm
इंडिया टीवी तो चल ही ऐसी ही खबरों के सहारे रहा है, बिना किसी ढंग के रिपोर्टर, बिना किसी ढंग के प्रोड्यूसर या एंकर के बिना इतने साल चैनल चल गया, और तो और कुछ दिन नंबर वन की कुर्सी तक भी पहुंच गया (बदौलत चैनल के ही बराबर घटिया मानसिकता और स्तर के दर्शक), लेकिन इस चैनल में चंद दूसरी जगहों से लतियाए गए और अब बड़ी कारों में घूमने वाले आका हैं। रजत शर्मा ने तो पत्रकारिता को बहुत पहले ही पैसे कमाने की चाह में तिलांजलि दे दी थी। अब यू ट्यूब से पाकिस्तान या तालिबान या फिर ऐसा ही कोई वीडियो उठाकर उसमें अपना गंदा दिमाग लगाकर किसी तरह से पूरे दिन स्पेशल के नाम पर चलाने वाले क्या करेंगे। मुझे तो ताज्जुब है कि इंडिया टीवी ने उस दिन रेड्डी साहब का फोनो नहीं दिखाया।
arvind
September 10, 2009 at 12:24 pm
india tv ki yahi khasiyat hai