वॉयस ऑफ इंडिया में जिसकी आशंका थी आखिर वही बात सच निकली। दोनों मालिक अपनी जिद पर अड़े रहे। नतीजतन मालिकाना हक़ को लेकर कोई समझौता नहीं हो सका। ख़राब मैनेजमेंट, बेतुके फैसलों और गड़बड़ प्लानिंग के कारण वॉयस ऑफ इंडिया ने असमय दम तोड़ दिया। समूह संपादक किशोर मालवीय ने इस्तीफ़ा दे दिया और सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी और अधिकारी एक झटके में सड़क पर आ गए।
वैसे चैनल तो पिछले महीने से ही ऑफएयर है। बीच में कुछ दिनों के लिए जबरन प्रसारण शुरू किया गया था। लेकिन हरियाणा सरकार की तरफ़ से विज्ञापन रोक दिए जाने के बाद वो प्रसारण भी बंद कर दिया गया। तब ख़बरें आई कि जल्दी ही चैनल के सीईओ अमित सिन्हा मुंबई से दिल्ली आएंगे। त्रिवेणी मीडिया के मालिक मधुर मित्तल से बातचीत करेंगे और दोनों पक्षों के बीच करार पर दस्तख़त हो जाएगा। जिसके बाद चैनल ऑनएयर कर दिया जाएगा।
वीओआई की अकाल मौत के लिए जिम्मेदार कौन?
इसी महीने की दो तारीख को खबर आई कि त्रिवेणी मीडिया लिमिटेड ने चार नए चैनलों के लिए लाइसेंस की अर्जी दी है। वॉयस ऑफ इंडिया – एनसीआर, वॉयस ऑफ इंडिया – गुजराती, वॉयस ऑफ इंडिया – पंजाब और वॉयस ऑफ इंडिया – आमची मुंबई। अब यह ख़बर आ रही है कि वॉयस ऑफ इंडिया का दम निकल गया है और त्रिवेणी मीडिया लिमिटेड के मालिक सुमित और मधुर मित्तल चैनल चलाने की हालत में नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एक साल के भीतर ऐसा क्या हुआ कि वॉयस ऑफ इंडिया को बंद करने की नौबत आ गई? और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं?
सीधे तौर पर कहा जाए तो इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं कंपनी के मालिक और उनके सलाहकार। ये सलाहकार ही निजी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी सेठ को फंसाते हैं और फिर उसे सपना दिखाना शुरू करते हैं। बताते हैं कि सत्ता के केंद्र तक पहुंचना है तो इमारतें खड़ी करने और फैक्ट्रियां लगाने की जगह सीधे पॉवर गेम में उतरो। चैनल शुरू करो।
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सूत्रों के मुताबिक अमित सिन्हा मुंबई से दिल्ली आए और मालिकाना हक़ को लेकर मित्तल बंधुओं से उनकी बातचीत भी हुई। लेकिन उस बातचीत में मित्तल बंधुओं ने दो टूक कह दिया कि जब तक पूरा पैसा नहीं दिया जाएगा तब तक वो पचास फ़ीसदी हिस्सेदारी अमित सिन्हा को नहीं देंगे। अमित सिन्हा ने कहा कि जब तक आप हिस्सेदारी नहीं देंगे तब तक एक पैसा भी नहीं दिया जाएगा। दोनों अपनी बात पर अड़े रहे। समझौता नहीं हुआ। जिसके बाद अमित सिन्हा ने पैसा लगाने से इनकार कर दिया। बात पहले से ही मित्तल बंधुओं की औकात से बाहर जा चुकी थी। चैनल बंद कर दिया गया।
इस ख़बर के बाद वॉयस ऑफ इंडिया के सभी चैनलों के करीब छह सौ कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वो भी जो समूह संपादक किशोर मालवीय के साथ मिल कर कुछ दिन पहले जैन टीवी के स्टूडियो से चैनल का प्रसारण करा रहे थे और वो भी जो हड़ताल कर रहे थे। अब वो सभी कंपनी के मालिक मधुर मित्तल से अपना हक़ मांग रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों का एक दल मंगलवार की शाम मधुर मित्तल से मिलने भी गया था। उस बैठक में मित्तल बंधुओं से कर्मचारियों की तीखी नोकझोंक हुई। मित्तल बंधुओं का कहना है कि अब वो चैनल नहीं चलाना चाहते। इस पर कर्मचारियों ने पूछा कि उनके बकाए का क्या होगा? जवाब में मित्तल बंधुओं ने कहा कि चेक से पेमेंट कर दिया जाएगा। लेकिन कर्मचारियों को कंपनी के मालिकों पर अब भरोसा नहीं है। वो नकद भुगतान की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों में हाथापाई भी हुई।
उधर वॉयस ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने फिर से आंदोलन छेड़ दिया है। उन्होंने जायज पैसे की मांग के साथ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
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