नई दुनिया के दिल्ली संस्करण में बुधवार को एक तस्वीर छपी। पहले पन्ने पर चार कॉलम में छपी यह तस्वीर काफी कुछ कह देती है। इसमें माननीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल उत्तर प्रदेश की सुरेखा यादव को पुरस्कार दे रही हैं। सुरेखा के दोनों पैर काम नहीं करते। वो हाथों के बल चल कर लोगों को साक्षर बना रही हैं। यकीनन यह तस्वीर पहले पन्ने पर छापी जा सकती है।
लेकिन राष्ट्रपति और राष्ट्रपति भवन में होने वाले कार्यक्रम को लेकर नई दुनिया के संपादक आलोक मेहता का आदरभाव सब जानते हैं। इस महीने तो कम से कम दस मौकों पर या तो राष्ट्रपति से जुड़ी कोई ख़बर या फिर उनकी तस्वीर ने नई दुनिया के पहले पन्ने की शोभा बढ़ाई है। यही वजह है कि अख़बार के एक पाठक ने जनतंत्र पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि आलोक मेहता को इस तपस्या का फल जरूर मिलना चाहिए। राष्ट्रपति को चाहिए कि अब वो आलोक मेहता को राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दें। आप नई दुनिया की यह तस्वीर देखिए और अपनी राय दीजिए।

नई दुनिया में 23 सितंबर को छपी तस्वीर
रीतेश
September 24, 2009 at 4:01 pm
सर, ये तस्वीर पहले पन्ने की हकदार है.
राजेश पांडे
September 25, 2009 at 3:53 am
हां गुरू, वही तो कहा जा रहा है. जब तक नई दुनिया में आलोक मेहता का राज है माननीय राष्ट्रपति की हर तस्वीर पहले पन्ने की हक़दार है.
sandip thakur
September 25, 2009 at 2:48 pm
samay ke saath saath insan ki prathmikta badal jati hai.alok mehta ki bhi badal gai hai.patrakartia se jo unehe kamana tha wah ue kama chuke hai. ab rajniti ka galyara bacha hai jahai wai tahalnana chatai hai.sansad tak jane ke laye sonia gandhai ke gun gane pare ya phir mahamahim rashpati ka gungaan karna pare,ki pharak panda hai jee…washe alokjee ko aesa karna sobha nahe deta.