टाइम्स नाउ का जवाब नहीं। यह अंग्रेजी का सबसे लोकप्रिय न्यूज़ चैनल हैं। आक्रामक और नए-नए प्रयोग करने वाला न्यूज़ चैनल। लेकिन शनिवार को एक ऐसा प्रयोग देखने को मिला जिसने बहुतों को चौंका दिया। टाइम्स नाउ पर राज ठाकरे का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिखाया गया और उसे यह कह कर बेचा गया कि किसी राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर राज ठाकरे का पहला इंटरव्यू। वो भी आधे घंटे का इंटरव्यू। चैनल के संपादक के कार्यक्रम “फ्रैंकली स्पीकिंग विद अर्णब” में। लेकिन यह इंटरव्यू कम एक नौटंकी ज़्यादा थी। इसमें अर्णब गोस्वामी के अंग्रेजी सवालों का राज ठाकरे ने मराठी में जवाब दिया। शायद तभी पूरे इंटरव्यू के दौरान अर्णब अपनी लय में नज़र नहीं आए।
आमतौर पर टेलीविजन स्क्रीन पर कूद-कूद कर सवाल पूछ कर मेहमानों पर हावी हो जाने वाले अर्णब पूरे इंटरव्यू के दौरान जरूरत से ज़्यादा मर्यादित नज़र आए। लगता है कि हर जवाब के बाद बगल में बैठा कोई शख़्स अनुवादित करते उन्हें समझाता होगा और फिर वो अगला सवाल दागते होंगे। या फिर सवाल और जवाब पहले से ही तय किए गए होंगे।
इस नौटंकी की नौबत क्यों आई होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। संपादक महोदय हर हाल में राज ठाकरे का इंटरव्यू करना चाहते होंगे। लेकिन राज ठाकरे ने अंग्रेजी बोलने से मना कर दिया होगा। उन्होंने शर्त रखी होगी कि वो जवाब मराठी में ही देंगे। वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ऐसा ही करते हैं। रिपोर्टर गैर मराठी भाषा में सवाल पूछते हैं तो मराठी में जवाब देते हैं। यह भाषा के प्रति लगाव कम दिखावा ज़्यादा है, लेकिन राज ठाकरे का क्या कीजिएगा। वो और उनके जैसे नेता अपनी इन्हीं अदाओं से तो पब्लिक को झांसा देते हैं। राज ठाकरे की जिद के आगे दो ही विकल्प बचते थे। उन्हें मना कर दिया जाता या उनकी बात मान ली जाती। अर्णब तैयार हो गए होंगे। तभी यह अंग्रेजी और मराठी के बेमिसाल जुगलबंदी सुनने और देखने को मिली।
इंटरव्यू को अंग्रेजी सबटाइटल्स के साथ दिखाया गया। अब अंदाजा लगाइये कि एक घोर साम्प्रदायिक, कट्टर और उन्मादी हद तक क्षेत्रवाद फैलाने वाले नेता को एक राष्ट्रीय चैनल पर आधे घंटे तक सबटाइटल्स के साथ झेलना कितना अजीब सा रहा होगा। वैसे इस प्रयोग के बाद कुछ लोग कह रहे हैं कि भविष्य में आपको अंग्रेजी चैनलों पर जयललिता और करुणानिधि तमिल में आधे-आधे घंटे का इंटरव्यू देते हुए नज़र आएंगे। मैनेजमेंट गुरू लालू से शुरू हुए इस प्रयोग का फिलहाल फायदा राज ठाकरे को हुआ है, लेकिन भविष्य में पूरे देश के क्षेत्रीय नेताओं को भी लाभ मिलेगा।
अगर आप टाइम्स नाउ पर राज ठाकरे और अर्णब गोस्वामी की जुगलबंदी को देखना सुनना चाहते हैं नीचे दिए लिंक्स पर क्लिक कर सकते हैं।
सुधीर शर्मा
September 29, 2009 at 5:24 pm
चलिए कुछ ट्रेंड तो उल्टा हुआ. वरना आमतौर पर तो हिंदी चैनलों पर अंग्रेजी दां लोगों के इंटरव्यू सबटाइटल के साथ दिखाए जाते रहे है. मैं भी उम्मीद करता हूं कि मायावती, मुलायम सिंह यादव और जयललिता सरीखे नेताओं को अपनी बोली में इंटरव्यू देने का मौका अंग्रेजी चैनलों पर मिलेगा.
रंगनाथ सिंह
September 29, 2009 at 9:18 pm
इस मामले में तो राज ठाकरे ने कमाल कर दिया। भारतीय भाषाओ को इस जिद्द की जरूरत है।
अंग्रेजी के अहंकार का दमन ऐसे ही संभव है। राज ठाकरे ने कम से कम एक अच्छा काम तो किया।
चण्डीदत्त शुक्ल
September 30, 2009 at 11:14 pm
भारत और भारतीयता के लिए भी ऐसी ज़िद करो भाई! मराठी बहुत ख़ूबसूरत भाषा है, उसका सम्मान-अनुकरण होना ही चाहिए…हां ऐसी ही इज़्ज़त हिंदी और सभी प्रादेशिक भाषाओं-बोलियों को भी मिलनी ज़रूरी है।