एनडीटीवी इंडिया और इंडिया टीवी में अब बहुत थोड़ा अंतर बचा है। यू ट्यूब से वीडियो छाप कर एनडीटीवी इंडिया पर अजब-गजब तो हर रोज दिखाया जाता था। सास-बहू-साज़िश की तरह सास-बहू-संसार भी शुरू हो चुका है। राखी सावंत के लटके-झटके को बेचने की पूरी कोशिश हो चुकी है। लेकिन दो दिन पहले एनडीटीवी ने इंडिया टीवी से एक और चीज चुरा ली। उसका नाम है यूएफओ यानी अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट। उड़ने वाली ऐसी वस्तु जिसे कोई नहीं पहचानता हो।
आमतौर पर यूएफओ का जिक्र दूसरे ग्रह के प्राणियों और अंतरिक्ष यानों के संदर्भ में किया जाता है। एनडीटीवी को छोड़ कर तमाम दूसरे चैनल यूएफओ पर सीरीज चला चुके हैं। दूसरे ग्रह के प्राणियों के नाम पर अंधविश्वास फैलाने के साथ पब्लिक को डराने का कारोबार हो चुका है। लेकिन अब एनडीटीवी इंडिया भी इस कारोबार में कूद पड़ा है। चैनल के कर्ता-धर्ताओं ने टीआरपी के चक्कर में बची खुची इज्जत को भी दांव पर लगा दिया है।
दो दिन पहले पर वहां पर दूसरे ग्रह के प्राणियों पर विशेष कार्यक्रम दिखाया गया। इसमें बताया गया कि चांद पर यूएफओ नज़र आते हैं। वहां गए अंतरिक्ष यात्रियों ने दूसरे ग्रह के यानों को वहां पर देखा था और धरती पर आने के बाद उसका ब्योरा भी दिया था। लेकिन वह ब्योरा दबा दिया गया। हॉलीवुड की फिल्मों से क्लिप उधार लेकर यह भी बताया गया है कि इस साल ब्रिटेन में कुछ ज़्यादा ही यूएफओ देखने का दावा किया गया है।
दर्शकों की जानकारी को बढ़ाने के एक स्टोरी यह भी चलाई गई कि एक देश में तो बकायदा ऐसे मामलों के निपटारे के लिए अलग महकमे का गठन कर दिया गया है। आखिर में भारत की भी एक स्टोरी चलाई गई। जिसमें कुछ गांववाले दावा कर रहे थे कि उन्होंने एक यूएफओ देखा था। शायद दूसरे ग्रह से कोई अंतरिक्ष यान उनके गांव में उतरा था। उसकी वजह से खेत का एक हरा-भरा हिस्सा पूरी तरह सूख गया।
एनडीटीवी के कर्ता-धर्ताओं की स्थिति सांप-छुछुंदर सी है। कुछ समय पहले तक उस चैनल के पास टीआरपी भले ही नहीं थी, लेकिन सम्मान हासिल था। जिसकी वजह से उसे एक बड़े ब्रांड के तौर पर देखा जाता था। लेकिन बीते एक साल में वहां टीआरपी के लिए सारे धत्तकर्म हुए। दुख की बात है कि टीआरपी भी नहीं मिली और सम्मान भी छिन गया।
एनडीटीवी पर यूएफओ से जुड़े कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें



((यूएफओ के बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप यहां क्लिक करें।))
संजय ग्रोवर
September 30, 2009 at 10:21 am
मेरा ख्याल है कि इस यू.एफ.ओ को एन.डी.टी.वी. में ‘वायवीयता, अमूत्र्तता, और ब्रहम-संवाद की वापसी’ मान कर चलना चाहिए।
Updesh Awasthee
September 30, 2009 at 4:36 pm
in your first photo
he is not any SADHOO
He is RAM KRUSHNA KUSMARIA
Agriculture Minister of MP Govt
pls open mpinfo.org
जनतंत्र डेस्क
September 30, 2009 at 8:55 pm
धन्यवाद उपदेश जी।
Suresh
October 1, 2009 at 3:37 am
NDTV ab woh NDTV nahi raha…jise hum log dekha karte the..ab yaha kayi samajhdar log nahi dikhayi padate hain…lekin samajhdaro se bewkoof ban chuke loge jaroor dikhte hain. ab bas thoda sa hindi ke akbaro ka hi sahara hai. hindi samajhane wale aur kar bhi kya sakte hai?