राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को एक तरह से नई दुनिया ने अपना ब्रांड एम्बेडसर बना लिया है। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता है जब उनकी तस्वीर नई दुनिया के किसी न किसी पन्ने को शोभा नहीं बढ़ाती हो। बीते एक हफ़्ते में दो दिन को छोड़ कर हर रोज उनकी तस्वीर नई दुनिया में छापी गई है। आमतौर पर चार कॉलम में मगर एक बार तीन कॉलम में। जिन दो दिन उनकी तस्वीर नहीं छपी है उनमें से एक दिन यानी चार अक्टूबर को पहले पन्ने पर उनकी ख़बर है और उसी दिन अपने कॉलम में अख़बार के समूह संपादक आलोक मेहता ने प्रतिभा पाटिल के बेटे को केंद्र में रख कर वंशवाद के समर्थन में एक लेख लिखा है।
नई दुनिया में किस दिन और कौन से पन्ने पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की तस्वीर छपी है या फिर रिपोर्ट या लेख – उसका ब्योरा नीचे दिया जा रहा है। आप एक नज़र डालिए।
8 अक्टूबर – तीसरे पन्ने पर फूल वालों की सैर की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति को पंखा भेंट किया गया
7 अक्टूबर – पहले पन्ने पर कुंवर नारायण को ज्ञानपीठ पुरस्कार देते हुए तस्वीर
5 अक्टूबर – पेज ग्यारह पर चार कॉलम की तस्वीर – दियु में चर्च से बाहर आती प्रतिभा पाटिल
4 अक्टूबर – पहले पन्ने पर ख़बर – प्रतिभा पाटिल की ख़बर। उसके अलावा संडे को छपने वाली पत्रिका में वंशवाद के समर्थन में समूह संपादक आलोक मेहता का लेख। खास जोर प्रतिभा पाटिल के बेटे की अमरावती से उम्मीदवारी को जायज ठहराया है।
3 अक्टूबर - पेज नंबर 10 पर चार कॉलम में तस्वीर – गुजरात के द्वारिका में पूजा करती हुईं प्रतिभा पाटिल
2 अक्टूबर – पेज नंबर सात पर तीन कॉलम में चरखा कातती हुईं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल
नई दुनिया के समूह संपादक आलोक मेहता के समर्थक राष्ट्रपति के प्रति नई दुनिया के इस भक्तिभाव को सही ठहरा सकते हैं, लेकिन किसी भी सामान्य शख़्स की नज़र में यह चाटुकारिता से अधिक कुछ नहीं।
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