ऐसी ख़बरें बहुत कम होती हैं और इसलिए अख़बारों में भी ऐसा कम ही देखने को मिलता है। एक-दो अपवादों को छोड़ कर आज सभी अख़बारों की पहली ख़बर वेंकटरमन को मिला नोबेल पुरस्कार है। भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक वेंकटरमन रामकृष्ण को इजरायल की अदा ई. योनथ और अमेरिका के थॉमस स्टेत्ज के साथ कमेस्ट्री में नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्होंने रहस्यमयी राइबोसोम की संरचना का एटम-दर-एटम मैप तैयार किया है।
राइबोसोम प्रोटीन और आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) से बने होते हैं। अगर डीएनए (डाइऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) का काम हर प्राणी के जीवन की तमाम सूचनाओं को और पूर्वजों से मिले तत्वों को सहेज कर रखना है, तो राइबोसोम का काम उन सूचनाओं को ज़िंदगी में तब्दील करना है। ऐसे में राइबोसोम की संरचना को पूरी तरह समझने से जीवन के विकास में बहुत मदद मिलेगी।
तीनों वैज्ञानिकों ने इसी राइबोसोम का थ्री डाइमेंशनल मॉडल तैयार किया है। और बताया है कि कैसे अलग-अलग एंटीबायोटिक राइबोसोम के साथ बंध जाते हैं। इससे जीवन की रक्षा के लिए एंटीबायोटिक तैयार करना आसान होगा।
इस महत्वपूर्ण खोज पर हिंदी के ज़्यादातर अख़बारों ने लीड ख़बर तैयार की है। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान – तीनों ही अख़बारों की यह पहली ख़बर है। दैनिक जागरण का शीर्षक है एक और नोबेल पर भारत का नाम तो हिंदुस्तान ने लिखा है हमें तुम पर नाज है वेंकी। दैनिक भास्कर का शीर्षक सीधा और सपाट है – वेंकटरमन को नोबेल पुरस्कार। नई दुनिया में यह ख़बर बॉटम एंकर है। जहां तक अंग्रेजी अख़बारों का सवाल है। द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया की यह लीड ख़बर है। हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस की यह दूसरी लीड है।
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