एनबीसी यूनिवर्सल ने एनडीटीवी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया है। जिसके बाद एनडीटीवी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि वो एनबीसी यूनिवर्सल की हिस्सेदारी को वापस खरीदेगा। लेकिन यह सौदा कितने में हुआ है इसका खुलासा नहीं किया गया है।
एनबीसी यूनिवर्सल ने मई 2008 में एनडीटीवी की सब्सिडरी कंपनी एनडीटीवी नेटवर्क्स पीएलसी में 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। एनडीटीवी नेटवर्क्स पीएलसी के अंतर्गत एनडीटीवी इमैजिन समेत सभी नॉन न्यूज़ चैनल हैं। इसके एवज में तब एनबीसी यूनिवर्सल ने 15 करोड़ डॉलर (तब की कीमत के हिसाब से करीब 630 करोड़ रुपये) दिए थे। लेकिन यह सौदा कामयाब नहीं रहा। वित्तीय वर्ष 2008-2009 में एनडीटीवी को करीब 508 करोड़ रुपये का ऑपरेशन घाटा हुआ था। मंदी के दौर और खराब नतीजों की वजह से कंपनी के शेयरों की कीमत लगातार गिरती गई। एक समय 400 रुपये से अधिक के भाव वाले शेयर 68 रुपये तक गिर गए। हालांकि बीते कुछ महीनों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है।
जिस समय एनबीसी यूनिवर्सल ने एनडीटीवी में हिस्सेदारी खरीदी थी उस समय एनडीटीवी के शेयरों का भाव चरम पर था। लेकिन अब उनकी कीमत एक तिहाई के करीब है। ऐसे में एनबीसी यूनिवर्सल को हिस्सेदारी वापस बेचने के एवज में कितने पैसे मिले यह गौर करने लायक बात होगी। तभी पता चलेगा कि साल भर बाद एनबीसी यूनिवर्सल को फायदा हुआ है या नुकसान? सूत्र तो नुकसान का अनुमान ज़्यादा लगा रहे हैं। उनके मुताबिक एनडीटीवी की माली हालत इतनी मजबूत नहीं है कि वो एनबीसी यूनिवर्सल से ऊंची बोली लगा कर शेयर वापस खरीद सके। सूत्रों के मुताबिक एनबीसी यूनिवर्सल ने ही पीछा छुड़ाने के लिए कम कीमत पर एनडीटीवी के शेयरों को वापस बेचने का फैसला लिया होगा। सच क्या है यह जानने के लिए इंतज़ार रहेगा इस सौदे के बारे में और अधिक खुलासे का।
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