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द हिंदू की "चीन" नीति

बुधवार को द हिंदू की सबसे बड़ी ख़बर दलाई लामा पर चीन का एक आरोप है। ख़बर के मुताबिक चीन ने कहा है कि दलाई लामा की वजह से भारत से उसके संबंधों पर असर पड़ रहा है। चीन ने यह भी कहा है कि भारत से सटे पूर्वोत्तर इलाकों को लेकर उसका रुख पहले की तरह है और वो दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा का विरोध करता है।

यह ख़बर अंग्रेजी के किसी दूसरे अख़बार में पहली ख़बर के तौर पर नहीं छापी गई है। लेकिन द हिंदू में भारत और तिब्बत को लेकर अगर चीन ने कुछ कहा है तो उसे प्राथमिकता से जगह दी जाती है। वह भी चीनी नज़रिए के साथ। चार नवंबर के दिल्ली संस्करण में पेज नंबर 12 पर एक और ख़बर छपी है कि वीजा नियमों को लेकर चीन ने भारत से अपनी चिंता जताई है। वह ख़बर भी ऐसे छापी गई है जैसे भारत को हर हाल में चीन की इस चिंता को दूर कर देना चाहिए।

यह द हिंदू की “चीन” नीति है। उस नीति में चीन का स्थान भारत से काफी पहले है। तभी द हिंदू में भारत की नीतियों के ख़िलाफ़ और चीन के समर्थन में विचार व्यक्त किए जाते हैं। अगर वह मसला दलाई लामा से जुड़ा है तो द हिंदू का विरोध और तल्ख हो जाता है। वैसे भी दलाई लामा को लेकर द हिंदू के संपादक एन राम अपनी नफ़रत वक़्त बेवक़्त जाहिर करते रहते हैं। 2007 में उन्होंने एक चर्चित लेख लिखा था। “चीन के सिद्धांतों” के आधार पर। लेख का शीर्षक था “द पॉलीटिक्स ऑफ तिब्बत: ए 2007 रिएल्टी चेक”।  उसमें एन राम ने दलाई लामा को जमकर कोसा था। उन्होंने कहा कि पुनर्जन्म को लेकर दलाई लामा का नज़रिया न केवल धार्मिक है बल्कि “वैचारिक और राजनीतिक” भी है। उस पूरे लेख में एन राम ने दलाई लामा पर पश्चिमी देशों के हाथों में खेलने का आरोप लगाया। वह न केवल तिब्बत की आज़ादी और स्वायत्तता को लेकर वहां के नागरिकों के संघर्ष को खारिज करते हैं बल्कि दलाई लामा को भारत और चीन के संबंधों में कलह की बहुत बड़ी वजह बताते हैं। चीन भी शुरुआत से ही ठीक यही आरोप लगाता आया है।

इसी साल फरवरी में एन राम तिब्बत के दौरे पर गए थे। सन 2000 के बाद उनकी यह तीसरी तिब्बत यात्रा थी। वहां उन्होंने चीन के आधिकारी समाचार एजेंसी जिन्हुआ को एक इंटरव्यू दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि तिब्बत तेज विकास की राह पर है और उसको लेकर जो ग़लत ख़बरें प्रसारित की जाती हैं वह एक प्रोपोगेंडा का हिस्सा है। एन राम ने यह भी कहा कि दलाई लामा और उनकी तथाकथित निर्वासित सरकार भारत और दुनिया के तमाम देशों में यह प्रोपोगेंडा फैलाने में कामयाब रही है कि चीन ने तिब्बतियों को दबा कर रखा है।

द हिंदू में एन राम का यही नज़रिया भारत और चीन से जुड़े हर मुद्दे पर जाहिर होता है। इसी साल अक्टूबर में चीन ने आज़ादी की साठवीं सालगिरह मनाई। तब द हिंदू को पढ़ने पर लगा कि कोई चीन का अख़बार पढ़ रहे हैं। चीन की शान में इतने कसीदे किसी अख़बार ने नहीं पढ़े थे। इसलिए अगर आप जब भी चीन से जुड़ी ख़बर ह हिंदू में पढ़ें तो किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले दूसरे अख़बारों पर भी एक नज़र ज़रूर डालें। वरना इन एकतरफा ख़बरों से सोच भी एकतरफा बनने लगती है।

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