मशहूर पत्रकार प्रभाष जोशी नहीं रहे। 72 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। बीती रात भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच के बाद करीब 11:30 बजे उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। जिसके तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके परिवार में उनकी पत्नी, उनके दो बेटे और एक बेटी हैं।
प्रभाष जोशी ने पत्रकारिता में अपने सफ़र की शुरुआत नई दुनिया से की। उसके बाद चंडीगढ़ और दिल्ली में इंडियन एक्सप्रेस के रेजिडेंट एडिटर के तौर पर काम किया। फिर जनसत्ता के संस्थापक संपादक बने और पत्रकारिता को नए मायने दिए। प्रभाष जोशी आज़ाद कलम से सिपाही थे और अपना फर्ज निभाते वक़्त उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया। हाल ही में चुनाव में अख़बारों के गोरखधंधे पर उन्होंने जमकर लिखा। बड़े-बड़े दिग्गज आर्थिक और रोजगार की मजबूरियों में कलम से सौदा करते रहे लेकिन प्रभाष जोशी ने पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के लिए अंत तक लड़ाई लड़ी। मीडिया की साख बचाने के लिए पत्रकारों को एकजुट करने की कोशिश की। प्रेस काउंसिल पर दबाव बढ़ाया।
पत्रकारिता में प्रभाष जोशी का सफ़र लंबा रहा है और इस सफ़र में बहुतों को उनसे वैचारिक मतभेद और टकराव रहे हैं। लेकिन उनके विरोध में खड़े लोग भी इस बात पर सहमत होंगे कि पत्रकारों की कई पीढ़ियों ने प्रभाष जोशी से बहुत कुछ सीखा है। चाहे बात भाषाई पैनापन की हो या फिर अपनी आस्था, अपने विश्वास और अपनी ईमानदारी पर टिके रहने की।
प्रभाष जोशी के विरोधी उन्हें संघ परिवार के करीब बताते रहे। लेकिन बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद प्रभाष जोशी ने बीजेपी और संघ परिवार के ख़िलाफ़ जितना लिखा है उतना बहुत कम लोगों ने लिखा होगा। प्रभाष जोशी कई प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के करीब रहे। लेकिन जब कभी जनहित की बात उठी तो उनकी कलम ने रिश्तों को दरकिनार कर दिया।
हमारे बीच से उनका यूं चले जाना बहुत अखर रहा है। अथाह दुख के इन पलों को व्यक्त करने के लिए हमारे पास फिलहाल कोई शब्द नहीं हैं।
कुमार राकेश
November 6, 2009 at 8:59 am
इस काली अंधेरी रात में, रोशनी की एक किरण बुझ गई। प्रभाष जोशी को मेरी श्रद्धांजलि…
सुधीर शर्मा
November 6, 2009 at 9:05 am
मैं उनका कोई भक्त नहीं। लेकिन आज उनकी कमी बहुत खल रही है। पत्रकारिता के एक युग का अंत हो गया है और इस खालीपन को भरने का साहस किसी में नहीं।
शशि सिंह
November 6, 2009 at 10:57 am
अपने वैचारिक प्रतिबद्धता की वजह से अपने विरोधियों के भी श्रद्धेय रहे प्रभाष जी। उन्हें मेरी भी श्रद्धांजलि…
shirish
November 6, 2009 at 11:10 am
बहुत दुखद समाचार है. प्रभाष जी को मेरी श्रद्धांजलि…
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Dilip Jaiswal
November 6, 2009 at 6:19 pm
prabhash ji ke Achanak is taraha chale jane patrakarita jagat ke liye bahut bada sadama hai
Dilip Jaiswal
November 6, 2009 at 6:20 pm
prabhash ji ka Achanak is taraha chale jana patrakarita jagat ke liye bahut bada sadama hai
Anand Prasad
November 7, 2009 at 6:44 pm
अथाह दुख के इन पलों को व्यक्त करने के लिए हमारे पास फिलहाल कोई शब्द नहीं हैं। बहुत दुखद समाचार है. प्रभाष जी को मेरी श्रद्धांजलि…!!!!! Dr. Anand Prasad, Patna