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शहीदों के साथ यह कितना भद्दा मज़ाक है!

पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकी हमले से अभी देश उबर भी नहीं पाया है। उन हमलों का मुख्य आरोपी आमिर अजमल कसाब मुंबई की ही एक जेल में बंद है। 26\11 की पहली बरसी को महज दो हफ़्ते हैं। और मुंबई की जनता को महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने इस पहली बरसी पर गिफ्ट दिया है – आर आर पाटिल को दोबारा महाराष्ट्र का गृह मंत्री बनाकर।

आर आर पाटिल वही शख्स हैं जो 26 नवंबर 2008 को महाराष्ट्र के गृह मंत्री थे। ताज और ट्राइडेन्ट होटल में हुए आतंकी हमलों के बाद पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में पाटिल ने उन हमलों को ‘छोटी-मोटी’ घटना करार देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की। आतंकियों ने 186 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 300 से ज़्यादा लोग जख़्मी हुए। अकेले अजमल कसाब ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी रेल टर्मिनस पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर 50 बेकसूरों की हत्या कर दी थी।

आतंकियों के उस वहशी हमले की तुलना 11 सितंबर (9\11) 2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले से की गयी। जनता के आक्रोश को भांपते हुए कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और एनसीपी ने गृहमंत्री आर आर पाटिल को उनके पदों से हटा दिया। दिल्ली की कैबिनेट में केन्द्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। लेकिन वो तो लगता है बीते दिनों की बात है। कांग्रेस की एनसीपी गठबंधन के साथ दोबारा सरकार बनी है। और एनसीपी को खुश रखने के लिये कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें मुंह मांगी सौगात दी है।

अब 26\11 की बरसी पर जब गृह मंत्री आर आर पाटिल शहीद हुए पुलिस वालों को श्रद्धांजलि देंगे तो उन पुलिस वालों के परिवार को क्या जवाब देंगे? वो क्या कहेंगे शहीद एएसआई ओम्बले की बेटी वैशाली से जो अभी अभी पुलिस में भर्ती हुई हैं? क्या करकरे, सालस्कर, काम्टे की विधवाएं या उन तमाम लोगों के परिवार उस हमले को भुला पाएंगे जिसके बारे में पाटिल ने कहा था ये छोटी मोटी घटना है? जिन्हें मुंबई से माफी मांगनी चाहिए वो मुंबई से क्या ये कह सकेंगे कि मैं वापस आ गया हूं – आपको चिन्ता करने की जरूरत नहीं? मैं लेता हूं आपकी सुरक्षा की गारंटी। आपका (आर आर पाटिल का) बायोडेटा तो कुछ और कहता है। आपका बायोडेटा तो ये कहता है कि मुंबई में सुरक्षा के जो पुख्ता इंतजाम होने थे वो आपने महाराष्ट्र का गृह मंत्री रहते नहीं किए इसलिए 26\11 हुआ। आपका बायोडेटा तो ये कहता है कि आतंकी हमले के बावजूद आपने उस हमले को हल्के में लिया। आपने मुंबई वासियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया। उनके विश्वास को चोट पहुंचायी है। आपका बायोडेटा तो चीख-चीख के ये कहता है कि इतने बड़े और संवेदनशील राज्य का गृह मंत्री होने के लिए जो भी गुण होने चाहिये वो आपमें मौजूद नहीं है। लेकिन शायद आपके मेन्टर शरद पवार को ऐसा नहीं लगता?

लेकिन शरद पवार और कांग्रेस की तरफ से लोकतंत्र की दुहाई देते हुए ये दलील दी जाएगी कि आखिर आर आर पाटिल को जनता ने दोबारा चुनकर विधानसभा भेजा है। यानी जनता ने उन्हें माफ़ कर दिया। लेकिन जनता ने ये कब कहा कि पाटिल को ही दोबारा राज्य का गृह मंत्री बनाया जाए? क्या पवार साहब के पास कोई विकल्प नहीं था। एनसीपी के विधायकों की संख्या कम होने के बावजूद मुंबई मंत्रालयों की सौदेबाजी में शरद पवार कांग्रेस पर भारी पड़े। और उन्होंने अपने सबसे वफादार पार्टी कार्यकर्ता को गृह मंत्री बना दिया। कांग्रेस ने चूं भी नहीं की। सरकार जो चलानी है। जनता का वोट जीत लिया है। लेकिन जीत की खुमारी में बेबस जनता का क्या भरोसा जीत पायी है कांग्रेस-एनसीपी सरकार?

ये वही सरकार है जिसने 26\11 के आतंकी हमले के पहले मुंबई के सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने के लिये केन्द्र सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये आधुनिक हथियारों की खरीद के लिये नहीं, मुंबई पुलिस को और सशक्त बनाने के लिये नहीं बल्कि किसी और मद में ज़ाया कर दिए। ये भी तब हुआ जब आर आर पाटिल महाराष्ट्र के गृह मंत्री थे। क्या पाटिल उस फोर्स का भरोसा जीत पाएंगे जिसने जान पर खेल कर सरकार की ग़लती का खामियाजा भुगता।

आर आर पाटिल तो बतौर गृहमंत्री बहाल कर दिए गए हैं। अब तो लगता है विलासराव देशमुख भी वापस मुंबई भेजे जाएंगे। शिवराज पाटिल ने भी हो सकता हो अपने वार्ड्रोब (कपड़ों की अलमारी) के लिए आधा दर्जन नए गला बन्द ऑर्डर कर दिए हों। पता नहीं कब प्रधानमंत्री की कैबिनेट में वापसी का न्योता आ जाए। (हरिभूमि से साभार)

(( वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू IBN 7 में एडिटर (स्पेशल असाइनमेंट) हैं))

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2 Responses to शहीदों के साथ यह कितना भद्दा मज़ाक है!

  1. श्याम Reply

    November 13, 2009 at 11:06 pm

    बात बिल्कुल सही कही है आपने। यह किसी भद्दे मजाक से कम नहीं। अगर आर आर पाटिल को फिर से गृह मंत्री बनाना था तो फिर उन्हें हटाया क्यों गया था? यह सवाल कांग्रेस और एनसीपी से पूछा जाना चाहिए। 26/11 पर होने वाले कार्यक्रमों में मंच पर चढ़ कर पूछा जाना चाहिए।

  2. सुधीर शर्मा Reply

    November 17, 2009 at 1:13 am

    प्रभात जी, आज की सियासत ही ऐसी है। यहां हर पार्टी जनता के साथ मजाक ही कर रही है। केंद्र में यूपीए के मंत्री मजाक कर रहे हैं और राज्यों में वहां की सरकारें। अब देखिए न… भूख-गरीबी में कोई कमी नहीं आई है। लेकिन सरकार यूनीक आईडी के नाम पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार है। कपिल सिब्बल संसद में कहते हैं कि एक भी नया केंद्रीय विद्यालय खोलने का पैसा सरकार के पास नहीं है। लेकिन डेढ़ लाख करोड़ रुपये यूनीक आई डी के नाम पर खर्च हो सकते हैं। यह सब भद्दे मजाक से कम है क्या? कभी-कभी लगता है कि हमारे जैसे इस देश के तमाम नागरिकों की स्थिति भेड़-बकरी से भी बद्दतर है।

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