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यह किला भी ढह गया …

सीएनबीसी टीवी 18 और सीएनबीसी आवाज़ में बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है। दिल्ली में सीएनबीसी आवाज़ की पूरी संपादकीय टीम एक झटके में हटा दी गई। चैनल के संपादक संजय पुगलिया ने सभी साथियों को विदाई चिट्ठी बांटी। जाती हुई मंदी में लिए गए इस फैसले से सभी कर्मचारी सकते में हैं। वो समझ नहीं पा रहे हैं कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि इतना बड़ा फैसला ले लिया गया।

दिल्ली से वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक्स समेत सभी तकनीकी महकमों में भी बड़े पैमाने पर लोग हटाए गए हैं। मुंबई में भी तकनीकी विभागों में भारी छंटनी की गई है। स्टॉक एक्सचेंज को कंपनी ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक कंपनी अंग्रेजी और हिंदी बिज़नेस चैनलों – टीवी 18 और आवाज़ के ब्रॉडकास्ट ऑपरेशन्स का विलय करना चाहती है। इसी योजना के तहत आवाज़ में भारी छंटनी की गई है।

सूत्रों के मुताबिक करीब 125 कर्मचारियों की छंटनी के अलावा अधिकारियों की तनख्वाह में भारी कटौती भी की गई है। वेतन की यह कटौती 15 से 30 फीसदी के करीब बताई जा रही है। सीएनबीसी टीवी 18 के इस फैसले ने मीडियाकर्मियों को एक बार फिर निराश कर दिया है। इस वक़्त हजारों की संख्या में पत्रकार, कैमरामैन और दूसरे तकनीकी विभागों के लोग बेरोजगार हैं। उन्हें लग रहा था कि मंदी ख़त्म हो गई है और अब कोई अच्छी ख़बर सुनने को मिलेगी। लेकिन लगता है कि अभी मंदी का कहर ख़त्म नहीं हुआ है।

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One Response to यह किला भी ढह गया …

  1. प्रकाश Reply

    November 21, 2009 at 10:49 pm

    इस छंटनी के लिए हरेश चावला जैसा मैनेजर है, जिसने भारत में फोर्ब्स खरीदने का फैसला करके कंपनी को डुबा दिया।

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